जानिए हर्निया के कारण, प्रकार और इसके इलाज | Harniya Ka Ilaj

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हर्निया का नाम तो आपने सुना ही होगा। वैसे तो आमतौर पर ये जानलेवा नहीं होता है, लेकिन कई बार इससे निजात पाने के लिए सर्जरी तक की नौबत आ जाती है।

ज्यादातर मामलों में हर्निया की शिकायत पेट में ही होती है, लेकिन कई बार नाभि या कमर के अलावा जांघ के ऊपरी हिस्से में भी सरलता से हो सकता है। हर्निया पुरुष या स्त्री किसी को भी हो सकती है।

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अब सवाल उठता है कि ये किस वजह से होता है, तो दरअसल ये तब होता है जब हमारे पेट के मसल कमजोर हो जाते हैं या फिर मांसपेशियों में किसी तरह का कोई डिफेक्ट पैदा हो जाता है।

इसमें पेट के अंदर से कोई कंटेंट या कोई आंत मांसपेशियों के किसी छेद के सहारे बाहर निकलने लगते हैं। हालांकि जब हम लेट जाते हैं तो ये अंदर की ओर चले जाते हैं।

कई बार हर्निया के मरीज को खांसने में, खड़े होने में या फिर इस तरह के किसी भी कार्य को करने में परेशानी होती है, जिसे करने से मसल पर जोर पड़े।

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इस आर्टिकल में आप जानेंगे- 

  1. हर्निया क्या है?
  2. हर्निया कैसे ठीक होगा?
  3. क्या हर्निया बिना ऑपरेशन के ठीक हो सकता है?
  4. हर्निया की आयुर्वेदिक दवा कौन सी है?
  5. हर्निया कितने दिन में ठीक होता है?
  6. हर्निया ऑपरेशन खर्च
  7. बिना ऑपरेशन हर्निया का इलाज
  8. हर्निया का देसी इलाज
  9. अंडकोष में हर्निया का इलाज
  10. हर्निया से खतरा
  11. हर्निया बेल्ट के फायदे

Harniya Ka Ilaj ka Ilaj जानने से पहले जानते हैं कि हर्निया क्या है?

हर्निया क्या है?

जब पेट के किसी मांसपेशी या उत्तक के कमजोर हो जाने की वजह से उसमें अंदर छेद हो जाए और पेट के अंदर के अंग उस छेद से बाहर की ओर निकलने लग जाए, तो उसे हर्निया कहा जाता है।

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हो सकता है कि आपको इसके कोई लक्षण ना दिखे लेकिन संभव ये भी है कि इसकी वजह से आपको या तो तेज या कम दर्द हो। ये दर्द आपको किसी तरह की गतिविधि करने के दौरान हो सकता है। जैसे चलने या फिर दौड़ने के दौरान।

जब हर्निया मांसपेशी के छेद से बाहर निकलता है तो उसमें मौजूद रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है और इस वजह से उसमें खून की सप्लाई ठीक तरीके से नहीं हो पाती है।

अगर ऐसा होता है तो ये एक आपातकालीन स्थिति वाली हालत हो सकती है क्योंकि खून के जरिये उत्तक को जो ऑक्सीजन मिलती है वो नहीं मिल पाएगी, जो कि बहुत आवश्यक होती है।

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अब जानते हैं कि हर्निया को कैसे ठीक किया जा सकता है अर्थात् Harniya Ka Ilaj क्या है?

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हर्निया कैसे ठीक होगा? | Harniya Bimari Ka Ilaj

हर्निया के लक्षण और उसके गंभीरता पर निर्भर करता है कि रोगी को इसके उपचार की आवश्यकता है या नहीं।

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वैसे तो ये लाइलाज बीमारी के तौर पर जाना जाता है, लेकिन सही समय पर इलाज शुरू हो जाए तो इसके ठीक होने की पूरी संभावना रहती है। इसका इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि हर्निया का लक्षण कितना गंभीर है या फिर इसका आकार कितना है।

इसे जीवनशैली में बदलाव करके भी कंट्रोल में रखा जा सकता है, या दवाइयों के सहारे भी इससे आराम मिल सकता है, या फिर संभावना इस बात की भी हो सकती है कि आपको सर्जरी करवाना पड़ जाए।

Harnia ka Ilaj अत्यंत सरल हो जाता है यदि जीवन शैली में निम्न परिवर्तन कर लें।

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1- सही समय पर इलाज 

यदि हर्निया का इलाज सही समय पर शुरू कर दिया जाए तो बिना ज्यादा परेशानी के इसे कंट्रोल किया जा सकता है। अगर आप हाइटल हर्निया के मरीज हैं तो आपको अपने जीवन शैली में बदलाव लाने की आवश्यकता होगी।

जैसे आपको अपने खान-पान पर पूरा ध्यान रखना होगा। ज्यादा तेल मसाला वाले खाद्य-पदार्थ के दूरी बनाकर रखना आपके लिए फायदेमंद होगा। अगर आप धूम्रपान इत्यादि के आदि हैं, तो आपको उसे भी छोड़ना होगा।

2- वजन को नियंत्रण में रखना 

हर्निया को ठीक रखने के लिए कुछ व्यायाम भी बताए जाते हैं, जो काफी लाभदायक होते हैं। व्यायाम की मदद से आप अपने मांसपेशियों को मजबूत बना सकते हैं, जिससे हर्निया के लक्षण काफी हद तक कम हो जाते हैं।

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लेकिन व्यायाम करते समय इस बात का खास ध्यान रखना आवश्यक होगा कि आप सही पोजीशन में व्यायाम करें। क्योंकि व्यायाम करने पर हुई गलती के गलत परिणाम भी हो सकते हैं।

Harniya Ka Ilaj शुरू करने के साथ अपने वजन पर विशेष ध्यान दें।

3- Harniya Ka Ilaj – दवाइयों की सहायता से 

अगर कोई मरीज हाइटल हर्निया से पीड़ित है तो कई बार डॉक्टर उसे जीवन शैली में बदलाव करने की सलाह देकर कुछ ऐसी दवाइयां देते हैं, जो पेट में गैस की समस्या को कम करने का काम करते हैं।

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इससे मरीज को हर्निया की वजह से होने वाली परेशानी से आराम मिल जाता है और उसके लक्षणों में भी काफी सुधार देखने को मिल सकते हैं।

4- सर्जरी

अगर हर्निया की वजह से परेशानी ज्यादा हो रही हो तो सर्जरी एकमात्र इलाज बचता है। इसके लिए दो तरह की सर्जरी होती है। जिसमें एक होता है लेप्रोस्कोपिक सर्जरी और दूसरा होता है ओपन सर्जरी।

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में छोटे से कैमरे और छोटे से उपकरण की मदद से ही छोटा सा चीरा लगाकर सर्जरी कर दिया जाता है। उत्तक से आस पास के लिए लेप्रोस्कोपी सर्जरी ज्यादा नुकसानदेह नहीं होता है।

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वहीं ओपन सर्जरी में मरीज को 6 महीने तक के रेस्ट की सलाह दी जाती है। अब हर्निया के इलाज के लिए अगर सर्जरी की आवश्यकता है, तो ये हर्निया की स्थिति पर निर्भर करता है कि उसके लिए कौन सा सर्जरी सही रहेगा।

अकसर सर्जरी ही Harniya Ka Ilaj है।

कुछ लोगों का सवाल यह भी है कि क्या Harniya Ka Ilaj बिना सर्जरी के हो सकता है? तो यह है आपका जवाब।

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क्या हर्निया बिना ऑपरेशन के ठीक हो सकता है?

वैसे तो आमतौर पर डॉक्टर हर्निया के इलाज के लिए ऑपरेशन की ही सलाह देते हैं। हां ये अलग बात है कि इसे कुछ उपायों की मदद से ज्यादा बढ़ने से रोकना संभव हो पाता है, जैसे जीवन शैली में बदलाव करके, बेल्ट के सपोर्ट से, कब्ज को नियंत्रण में रखने से इत्यादि।

लेकिन जहां तक इलाज की बात है तो एलोपैथिक में इसका एक ही इलाज बताया जाता है और वो है ऑपरेशन।

हालांकि कई योगाचार्य और आयुर्वेदाचार्य इसे बिना ऑपरेशन के ठीक करने की बात भी कहते हैं, लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है इस बात की गारंटी हम आपको नहीं दे सकते।

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यदि आप अपनी Harniya Ka Ilaj आयुर्वेद के माध्यम से करना चाहते हैं तो निम्न जानकारी पढ़ें।

हर्निया की आयुर्वेदिक दवा कौन सी है?

आर्युवेद में भी हर्निया के रोग का वर्णन मिलता है, जिसमें इसके लक्षण, कारण और चिकित्सा आदि का भी जिक्र किया गया है।

हर्निया के मरीज अगर आयुर्वेद के जरिये अपना इलाज करवाना चाहते हैं तो इसके लिए आवश्यक होता है कि मरीज का हर्निया शुरुआती दौर में ही हो। आर्युवेद में इसके इलाज के लिए पेट पर लगाने के लिए तेल, कुछ खाने वाली दवाएं इत्यादि देते हैं।

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वहीं कुछ मामलों में अरहड़ का तेल व पत्ता भी सीधे लगाने की सलाह दी जाती है। चुकी कब्ज के मरीजों को हर्निया की समस्या ज्यादा होती है, इसलिए पेट साफ रखने ले लिए भी कुछ दवाई दी जाती है।

वैसे मरीज के लक्षण के अनुसार आयुर्वेदाचार्य इसका इलाज करते हैं।

अक्सर लोग पूछते हैं कि Harniya Ka Ilaj शुरू होने के कितने दिन बाद ठीक हो जाता है? इसका जवाब विस्तार से समझ लें।

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हर्निया कितने दिन में ठीक होता है?

मांसपेशियों की झिल्ली कमजोर होने की वजह से हर्निया की बीमारी होती है। हालांकि बच्चों में हर्निया की परेशानी जन्मजात होती है।

अगर 1 साल तक के बच्चे में हर्निया की शिकायत हो तो वो खुद ब खुद ठीक हो सकता है, इसके लिए डॉक्टर सलाह ली जा सकती है, लेकिन अगर किसी बड़े इंसान को हर्निया की बीमारी है, तो उसके लिए ऑपरेशन ही एकमात्र इलाज होता है।

हर्निया का इलाज जितना जल्दी शुरू हो जाए इसके ठीक होने की संभावना उतनी ही ज्यादा रहती है।

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सबसे अहम सवाल लोगों का यह होता है कि Harniya Ka Ilaj करने में कितना खर्च होता है?

हर्निया के ऑपरेशन में कितना खर्च होता है ?

ये कई बातों पर निर्भर करता है कि हर्निया के ऑपरेशन में कितना खर्च लगेगा। जैसे लोकेशन पर, डॉक्टर के अनुभव पर, जहां आप ऑपरेशन करवाएंगे वहां के फैसिलिटी पर और ऑपरेशन के सक्सेस रेट इत्यादि पर।

लेकिन इतना तो कहा जा सकता है कि यदि आपके ऑपरेशन के लिए लेप्रोस्कोपी सर्जरी को चुना जाता है तो इसके लिए करीब 55 हजार से 1 लाख 10 हजार रुपए तक का खर्च पड़ता है।

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वहीं अगर ओपन सर्जरी किया जाता है तो उसके लिए 55 हजार से 3 लाख 30 हजार रुपए तक का खर्च होता है। इसके अंदर ही हर्निया का ऑपरेशन हो जाता है।

कुछ लोगों को ऑपरेशन से डर लगता है तो वो चाहते हैं कि Harniya Ka Ilaj बिना सर्जरी के हो जाए। यदि आप भी उनमें से हैं तो इसी पढ़ें।

बिना ऑपरेशन हर्निया का इलाज

वैसे तो हर्निया जानलेवा नहीं होता है लेकिन कई मामलों में परेशानी को बढ़ने से रोकने के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। ज्यादातर मामलों में इसके इलाज के लिए सर्जरी की ही जरूरत पड़ती है, लेकिन बहुत मरीज ऐसे होते हैं जो सर्जरी नहीं करवाना चाहते हैं।

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अब ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या बिना ऑपरेशन के इसका इलाज संभव हो सकता है? तो इसे लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ उपायों को अपनाकर इसे काबू में रखा जा सकता है।

इस बात का ध्यान दें कि ये मात्र कुछ उपाय हैं जिससे कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं होते हैं, लेकिन अगर मरीज को इन उपायों से भी आराम ना मिले तो उसे बिना देरी के डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

Harniya Ka Ilaj शुरू होने से पहले अथवा बाद में कुछ बातों का विशेष ध्यान दें। इनसे आपको जल्दी राहत मिलेगी।

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Harnia Precautions in Hindi

हर्निया बेल्ट – आज के समय में आपको बाजारों में हर्निया के उपचार के लिए बेल्ट मिल जाएंगे। कहा जाता है कि इस बेल्ट के इस्तेमाल से पेट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता है। इस बेल्ट को पूरे दिन लगाने की सलाह दी जाती है।

हां नहाने के वक्त आप उसे उतार सकते हैं। हालांकि हम आपको ये सलाह जरूर देना चाहेंगे कि बेल्ट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

छींकते-खांसते समय हर्निया पर रखें हाथ – अगर आप बेल्ट लगा रहे हैं तो भी आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि छींकते या खांसते समय हर्निया को हाथ से पकड़कर रखें।

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ध्यान रखें कि इस वक्त सिर्फ हर्निया को ही नहीं पकड़ना है, बल्कि दूसरी तरफ के हिस्से को भी पकड़ना है।

धीरे-धीरे चलें – अगर आप हर्निया के मरीज हैं तो आपको इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि आप हमेशा बहुत आराम से धीरे-धीरे चलें, क्योंकि चलते समय आंत पर जोर पड़ता है, जिससे आपको ऐसा लगेगा कि वो निकलने वाली है।

खानपान का ध्यान रखें – अगर आप हर्निया के मरीज हैं तो आपको ऐसे किसी भी खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए जो आंतों पर बुरा प्रभाव डालने का काम करे।

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जैसे आपको मसालेदार चीजों, चीनी, मांस और चिकन इत्यादि के सेवन से बचना चाहिए।

हल्का व्यायाम करें – हर्निया के लिए कुछ एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है, लेकिन ये एक्सरसाइज किसी एक्सपर्ट की निगरानी में ही करनी चाहिए, क्योंकि इसे गलत तरीके से करने से इसके गलत परिणाम भी हो सकते हैं।

हर्निया बेल्ट के फायदे

1- हर्निया बेल्ट उन रोगियों के लिए कारगर साबित होता है, जो ऑपरेशन करवाने की हालत में नहीं होते हैं। जैसे मान लीजिए कि अगर कोई बुजुर्ग व्यक्ति या महिला हो, या फिर जिन्हें सर्जरी की खास जरूरत ना हो।

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2- अगर किसी का हर्निया छोटा हो और ज्यादा दिक्कत नहीं देता हो, तो ऐसे मरीजों को हर्निया बेल्ट से मदद मिल सकती है।

3- इसके अलावा जिन्हें ज्यादा शारीरिक गतिविधि करने की आवश्यकता ना पड़ती हो तो उन्हें भी हर्निया बेल्ट से मदद मिल सकती है। इससे सर्जरी की समस्या से बचा जा सकता है।

क्या आपको पता है कि दिनचर्या में बदलाव कर किसी भी बीमारी का इलाज किया जा सकता है? Harniya Ka Ilaj भी इन बातों को ध्यान में रखकर करें तो जल्दी ठीक हो जाएंगे।

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हर्निया का देसी इलाज | Harniya Ka Desi Ilaj

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हर्निया के कई प्रकार होते हैं, लेकिन उनमें तीन सबसे सामान्य प्रकार होते हैं, जिनमें पहला है इनगुइनल हर्निया, दूसरा है अम्बिलाइकल हर्निया और तीसरा होता है हाइटल हर्निया।

पहले दो प्रकार के हर्निया में सर्जरी ही इसका सबसे बढ़िया इलाज होता है, जबकि हाइटल हर्निया को कुछ आसान देसी इलाज के जरिये कंट्रोल में रखा जा सकता है। जैसे –

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  • सुबह के गर्म पानी पीने की सलाह दी जाती है।
  • कुछ मसाज के तरीके बताए जाते हैं।
  • कुछ योगासन करने की सलाह दी जाती है।
  • सेब के सिरके का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
  • एलोवेरा जूस भी होता है फायदेमंद।

इस तरह के कई देसी इलाज से हर्निया के इलाज की बात की जाती है, लेकिन जो सबसे उत्तम उपाय है वो है स्वस्थ खाना।

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हर्निया के घरेलू टिप्स | Harniya Ka Ilaj

इससे बचने के कुछ घरेलू टिप्स भी काफी कारगर होते हैं। जैसे –

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  • एक साथ भरपेट भोजन ना करके छोटे-छोटे टुकड़ों में खाएं।
  • सोने से करीब 3 घंटे पहले भोजन कर लें।
  • वजन को नियंत्रण में रखें।
  • धूम्रपान और तंबाकू का सेवन ना करें।
  • ज्यादा मोटे तकिये पर ना सोएं।
  • खान के तुरंत बाद लेटे नहीं और ना ही आगे की तरफ झुकें।
  • खाने के बाद थोड़ा टहलें।
  • पेट की गैस निकालने के लिए दबाव ना डालें।
  • आरामदेह कपड़े पहनें।

अंडकोष में हर्निया का इलाज

अंडकोष में जो हर्निया होता है उसका इलाज सर्जरी के जरिये किया जाता है। इसके लिए या तो ओपन सर्जरी किया जाता है या फिर लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की जाती है।

हालांकि लेप्रोस्कोपिक सर्जरी इसके लिए ज्यादा फायदेमंद बताया जाता है और इसके लिए खर्च भी कम लगता है। इस सर्जरी के लिए एक पतली सी छोटी ट्यूब को चीरे के जरिये अंदर पहुंचाया जाता है, जिसमें एक कैमरा लगा रहता है।

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तो वहीं दूसरे चीरे के जरिये सर्जिकल टूल्स डालते हैं। दोबारा से हर्निया को होने से रोकने के लिए कमजोर मांसपेशी को एक सिंथेटिक जाल से सहारा दिया जाता है।

इस सर्जरी के बाद जब मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाता है तो उसके पेट में कहीं कोई दाग नहीं दिखाई देता है।

हर्निया से खतरा

अगर हर्निया का इलाज सही समय पर शुरू हो जाए, तो इससे कोई बड़ी परेशानी नहीं होती है। लेकिन कई बार गलत जानकारी अथवा जानकारी के अभाव में लोग सही समय पर इसका इलाज नहीं करवा पाते हैं और ये बढ़ता चला जाता है।

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यहां तक कि कई बार तो ये इतना गंभीर हो जाता है कि जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसलिए समय रहते इसका इलाज करवा आवश्यक होता है।

Final Words: उम्मीद है Harniya Ka Ilaj से संबंधित आपके सभी सवालों के जवाब आपको मिल गए होंगे। आज के वैज्ञानिक युग में हर बीमारी का इलाज संभव है।

सेहत है तो खुशियां हैं, इसलिए अपनी सेहत को कभी नजरंदाज न करें।

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सबका मंगल हो

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