Gomukhasana Benefits :गोमुखासन के 9 लाभ एवं सावधानियां

Gomukhasana Benefits in Hindi: भारतीय सभ्यता संसार की सबसे धनी सभ्यता होने के साथ अनेकों गहरे राज़ स्वयं में छिपाए हुए है। योग, आसान, तथा मुद्राएं इनका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है जो व्यक्ति को उसके अस्तित्व की पहचान कराने में मदद करता है।

महर्षि पतंजलि द्वारा स्थापित हठयोग आज अनेकों छोटे छोटे रूपों में विश्व भर में परिवर्तन लाने का काम कर रहा है।

कोई भी शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक असंतुलन को संतुलित करने के साथ जीवन को सही दिशा देने अथवा कोई लत छुड़ाने में हठ योग का महत्वपूर्ण योगदान है।

आप जिस भी उद्देश्य से आसनों अथवा ध्यान, मुद्राओं का अभ्यास शुरू करें, अंत में आपको अपने जीवन की काया परिवर्तित ही दिखेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह परिवर्तन सिर्फ़ सकारात्मक ही नहीं बल्कि उम्मीद से ज्यादा अर्थात आश्चर्यजनक होता है।

हठयोग के इन्हीं आसनों से एक महत्वपूर्ण आसन गोमुखासन है। MysticMind के इस आर्टिकल में इस अद्भुत आसन को कैसे सही तरीके से करने लाभ लिया जा सकता है, इसके बारे में विस्तार से जानकारी है।

Gomukhasana Steps and Benefits in Hindi जानने से पहले यह समझ लेना आवश्यक है कि गोमुखासन क्या है तथा इसके नाम के पीछे क्या राज़ है?

What is Gomukhasana in Hindi गोमुखासन

Gomukhasana Images

हठ योग के विभिन्न योगासनों में एक विशेष आसन गोमुखासन भी है। इस आसन का शाब्दिक अर्थ देखें तो यह संस्कृत के तीन शब्दों से मिलकर बना है। गो + मुख+ आसन अर्थात गाय के मुख जैसा प्रतीत होने वाला आसन।

हठ योग में योगियों ने प्रकृति के गुणों को धारण करने के लिए भिन्न भिन्न जीवों के गुण अपनाएं है। मकरासन की भांति गोमुख आसन का नियमित अभ्यास भी कई गुप्त लाभ देता है।

हिन्दू सभ्यता के अनुसार गौमाता के सम्पूर्ण शरीर में देवताओं का वास होता है। गोमुख वाले भाग में प्रमुख देव जैसे कि श्री गणेशजी, शिवजी, सूर्य तथा चन्द्रमा का वास है।

इस तरह इस आसन के सही अभ्यास से गुप्त रूप से इनके दैवी गुणों का प्रभाव आप में समाहित होने लगता है। Gomukhasana benefits को विस्तार से जानने से पहले यह जानना आवश्यक है कि गोमुखासन का सही तरीके से अभ्यास कैसे करें।

Also Read: Bhujangasana Benefits in Hindi भुजंगासन के रहस्यमई लाभ 

How to Do Gomukhasana and it’s Benefits in Hindi

पूर्ण रूप से गोमुखासन का सम्पूर्ण लाभ अनुभव करने के लिए इसका अभ्यास सही तरीके से होना आवश्यक है। नीचे दिए तरीके से इसका अभ्यास करें।

१- गोमुखासन के अभ्यास के लिए सुबह का समय, शांत वातावरण तथा हवादार स्थान पर योग मैट अथवा चादर, चटाई बिछाकर उसपर बैठ जाएं।

२- गोमुखासन के अभ्यास के लिए सर्वप्रथम दंडासन में बैठ जाएं, दोनों पैरों को सामने की ओर पूर्ण रूप से फैलाएं। हाथों को सामान्य तथा आरामदायक स्थिति में रहने दें।

३- ध्यान को वर्तमान में लाने के लिए लंबी गहरी सांस पेट में भरें और जितनी देर संभव हो रोककर रखें। फिर लयबद्ध रूप से सांसों को मुख द्वारा बाहर छोड़ दें। इस प्रक्रिया को कम से काम आठ से दस बार दोहराएं।

४- अब दाहिने पैर को घुटने से मोड़कर बाएं नितंब के नीचे ज़मीन पर स्थित कर दें तथा बाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाहिने जांघ के पास जमीनी पर रख दें।

Gomukhasana Images

५- इसके बाद दाहिने हाथ को ऊपर ले जाएं, कोहनियों से मोड़ते हुए गर्दन के पीछे से अनाहत चक्र के पास ले जाएं। बाएं हाथ को नीचे की तरफ़ से पीठ पीछे ले जाकर दाएं हाथ की उंगलियों को पकड़ने की कोशिश करें।

६- ध्यान रहे, मेरुदंड बिल्कुल सीधा रहे तथा आरंभ में यदि उंगलियां छूना मुश्किल हो तो कोई बात नहीं, अभ्यास के साथ आसन हो जाएगा।

७- पंद्रह से बीस तक की गिनती मन में दोहराने तक उसी अवस्था में रहें तथा फिर बाएं हाथ को वापस आराम की स्थित में लाएं। फिर दाएं हाथ तथा दोनों पैरों को भी आराम की स्थिति में लेकर आएं। इस प्रकार अर्ध गोमुखासन पूर्ण हुए।

८- गोमुखासन का एक चक्र पूर्ण करने के लिए अब बाएं पैर को मोड़कर दाहिने नितंब के नीचे ले जाएं तथा दाहिने पैर को ऊपर से ले जाकर बाएं जांघ के पास रख दें।

९- बाएं हाथ को ऊपर से अनाहत चक्र के पास ले जाएं तथा दाहिने हाथ को नीचे से जाकर दोनों हाथों की उंगलियों को मिलाने की कोशिश करें। फिर सामान्य अवस्थ में आ जाएं।

इस प्रकार गोमुखासन का एक चक्र पूरा हुआ।

१०- तीन अथवा चार चक्र से इस आसन का आरंभ करें तथा प्रत्येक सप्ताह दो चक्र बढ़ाते जाएं।

गोमुखासन के सही अभ्यास के लिए उत्सुकता तभी बढ़ेगी जब आपको Gomukhasana benefits के बारे में पता चलेगा। तो, अभी। देखते हैं कि What Are the Benefits of Gomukhasana in Hindi?

Gomukhasana Benefits in Hindi

गोमुखासन के लाभ जानने के बाद कोई स्वयं को इस आसन के अभ्यास से नहीं रोक सकता। इसलिए अब देखते हैं कि सबसे Important and Useful Benefits of Gomukhasana कौन कौन से हैं?

Gomukhasana Benefits in Hindi

१- Gomukhasana Benefits in Hindi सर्वप्रथम इस आसन का प्रभाव पैरों के घुटने तथा जांघों पर पड़ता है। आजकल शरीर का बेढंग तरीके से बढ़ने तथा घुटनों में दर्द की समस्या आम हो गई है। ऐसे में गोमुखासन का नियमित अभ्यास नितंबों तथा जांघों को सुडौल व मजबूत बनाता है।

२- Gomukhasana Benefits in Hindi शारीरिक श्रम की कमी के कारण हाथों का सही तरीके से व्यायाम नहीं होता, फलस्वरूप कंधों के पास जोड़ों में दर्द की शिकायत होती है। गोमुखासन के अभ्यास से जोड़ों में रक्त संचार होने लगता है जो लंबे समय के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

५- Gomukhasana Benefits in Hindi पीठ में दर्द तथा हृदय के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निजात मिलती है क्योंकि गोमुखासन के अभ्यास से अनाहत चक्र सक्रिय होने लगता है। अनाहत चक्र का सक्रिय होना अर्थात ऊर्जा तथा रक्त प्रवाह का बढ़ जाना, जो किसी भी समस्या अथवा बीमारी को दूर करने में सक्षम है।

६- Gomukhasana Benefits in Hindi मधुमेह, स्वास संबंधी समस्याओं को दूर करने एवं मांस पेशियों को मजबूत बनाने में इस आसान का विशेष योगदान होता है। छाती की मांस पेशियों पर असर होने की वजह से ही रक्त संचार सुचारू होता है तथा कफ, अस्थमा आदि की समस्या भी दूर हो जाती है।

७- Gomukhasana Benefits in Hindi फिशर, बवासीर, मल- मूत्र के स्थान पर किसी भी बीमारी को दूर कर स्वास्थ्य बढ़ाने के लिए नियमित गोमुखासन वरदान सिद्ध हो सकता है। स्त्रियों में मासिक धर्म तथा पुरुषों में अन्य लैंगिक समस्याओं को दूर करने में भी यह आसन लाभकारी है।

८- Gomukhasana Benefits in Hindi मेरुदंड को मजबूत बनाने के साथ साथ गोमुखासन सातों चक्रों को सक्रिय कर कुण्डलिनी शक्ति को जागृत करने में मदद करता है। चक्रों के सक्रिय होने से शरीर में उर्जा का संचार होने लगता है तथा किसी भी प्रकार की शारीरिक एवं मानसिक बीमारियां दूर हो जाती हैं।

९- Gomukhasana Benefits in Hindi इस आसन के अभ्यास से बैठने तथा खड़े होने के पोस्चर में सुधार होता है। हड्डियों में मजबूती के साथ शरीर लचीला बनता है तथा समय के साथ व्यक्तित्व में निखार आने लगता है।

Precautions for Gomukhasana in Hindi गोमुखासन के लिए सावधानियां

अन्य आसनों की भांति गोमुखासन का अभ्यास करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें।

१- हाथों को पीछे अनाहत चक्र के पास एक दूसरे से मिलाने के लिए ज़बरदस्ती न करें, ऐसा करने से जोड़ों में अथवा कंधे को नुकसान हो सकता है। समय तथा अभ्यास के साथ वह स्वयं मिलने लगेंगे।

२- हाथ अथवा पैरों के जोड़ों में किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी की अवस्था में बिना चिकित्सक के सलाह के इस आसन का अभ्यास ना करें।

३- अन्य किसी शारीरिक बीमारी की अवस्था में चिकित्सक तथा योग्य शिक्षक की परामर्श तथा निगरानी में ही इस आसन का अभ्यास करें।

४- मेरुदंड अथवा कमर की हड्डी में किसी भी प्रकार का गंभीर दर्द अथवा अन्य कोई समस्या होने पर तुरंत अभ्यास रोक दें तथा चिकित्सक से सलाह लें।

५- गर्भावस्था के प्रथम तीन महीने गोमुखासन का अभ्यास ना करें अथवा योग्य शिक्षक से सलाह एवं उनकी निगरानी में ही करें।

इसे भी पढें: कुण्डलिनी शक्ति जगाने का सहज तरीका

गोमुखासन करने से पहले किए जाने वाले आसन

इस आसन के अभ्यास से पहले यदि बद्ध कोण आसन, वीरासन, तितली आसन तथा सुप्त पादं गुष्ठासन का अभ्यास किया जाए तो क्रमबद्ध तरीके से लिए गए आसन अत्यंत लाभकारी सिद्ध होते हैं।

गोमुखासन के बाद लिए जाने वाले आसन

पहले तथा बाद में में लिए जाने वाले आसन भी आसन के गुणों को बढ़ाकर अन्य लाभ देते हैं। गोमुखासन के बाद गरुणासन, मरीच्यसन पद्मासन तथा पश्चिमोत्तासन का अभ्यास अत्यंत लाभकारी है।

Final Words: उम्मीद है Gomukhasana benefits in Hindi जानने के बाद आप अपने योगाभ्यास में इस आसन को अवश्य जोड़ेंगे। इस आसन के अभ्यास से सिर्फ़ शारीरिक एवं मानसिक ही नहीं बल्कि विचारों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

आर्टिकल अच्छा लगे तो परोपकार भाव के साथ दूसरों की मदद करने के लिए इसे अन्य सोशल मीडिया पर अवश्य साझा करें।

भवतु सब्बै मंगलम!

Advertisement

3 thoughts on “Gomukhasana Benefits :गोमुखासन के 9 लाभ एवं सावधानियां”

  1. Pingback: Anonymous

Leave a Reply

%d bloggers like this: