Veerasana in Hindi: वीरासन अभ्यास के लिए 13 कारण

Veerasana in Hindi योग जगत में प्रत्येक मुद्राओं तथा आसनों का अपना अलग महत्व तथा शारीरिक एवं मानसिक लाभ होते हैं। वीरासन एक ऐसा आसन है जो मनुष्य की शारीरिक क्षमता को वीर योद्धाओं की भांति बढ़ाता है। आजकल युवाओं में मसल्स बनाने का शौक चरम सीमा पर है तथा इसके लिए न जाने किन किन उपकरणों का प्रयोग करते हैं।

योग जगत पर विश्वास कर यदि कुछ आसनों का नियमित अभ्यास किया जाए तो बिना किसी उपकरण तथा अतिरिक्त खान पान के मनचाहा शरीर बनाया जा सकता है।

योगासनों में खासकर Veerasana वीरासन मुद्रा एक महत्वपूर्ण तथा प्रभावी मुद्रा है क्योंकि इस मुद्रा के अभ्यास से न सिर्फ शरीर बल्कि चंचल मन को भी काबू में किया जा सकता है।

इस आर्टिकल में वीरासन अभ्यास का सही तरीका, अभ्यास से होने वाले लाभ तथा अन्य सावधानियों के बारे में विस्तार से जानेंगे। सबसे पहले देखते हैं कि वीरासन का अर्थ क्या है तथा इसका नाम वीरासन ही क्यों है?

What is Veerasana in Hindi वीरासन क्या है

वीरासन शब्द संस्कृत के दो शब्दों वीर तथा आसन को मिलाकर बना हुआ है। शाब्दिक अर्थ देखें तो वीर का अर्थ बहादुर, हृष्ट पुष्ट तथा आसन का अर्थ बैठने का स्थान अथवा बैठने की अवस्था। इस प्रकार वीरासन का अर्थ बैठने की एक ऐसी अवस्था है जिसके नियमित अभ्यास से शरीर एवं मन दोनों ही प्राचीन योद्धाओं की भांति मजबूत बनता है।

अन्य आसनों को भांति इस आसन के नाम के पीछे भी कुछ रहस्य छिपे हैं। उदाहरण के लिए यदि आप भुजंगासन के बारे में देखेंगे तो भुजंग अर्थात सांप के गुण, मकरासन से मगरमच्छ के गुण आदि। ठीक उसी प्रकार Veerasana वीरासन नाम भी प्राचीन वीरों के गुणों के आधार पर रखा गया है।

प्राचीन योद्धाओं के मजबूत शरीर तथा मन का राज़ इस आसन में छिपा हुआ है। यदि आप किसी पुराने राजा महाराजा के बैठने के तरीकों पर गैर करेंगे तो पाएंगे कि अधिकतर लोग इसी अवस्था में बैठते हैं। उनके गुणों को समय के साथ कायम रखने के लिए प्राचीन गुरुओं ने वीरासन का अविष्कार किया।

चलिए देखते हैं Veerasana वीरासन के नियमित अभ्यास से क्या क्या लाभ होते हैं।

Benefits of Veerasana in Hindi वीरासन के लाभ

जैसा कि हमने ऊपर देखा यह आसन शरीर तथा मन दोनों को प्रभावित करता है। विस्तार में देखते हैं कि Veerasana Benefits क्या क्या हैं।

Veerasana Images

१- वीरासन के नियमित अभ्यास से घुटने, टखने, जांघें तथा नितंब मजबूत होते हैं।

२- इस आसन के अभ्यास से पेट की मांस पेशियों पर जबरदस्त प्रभाव पड़ने के कारण पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम करने लगता है।

३- पेट पर तनाव के कारण त्वचा में कसाव आने के साथ अतिरिक्त वसा से भी मुक्ति अर्थात मोटापे से भी छुटकारा मिलता है।

४- अधिकतर लोगों को सिर्फ पैदल चलने की आदत होती है जिसकी वजह से पूरे पैर का रक्त संचार अवरूद्ध होता है। समय के साथ पैरों में जलन, दर्द, घुटने दर्द आदि की समस्या बढ़ने लगती है। ऐसे में Veerasana वीरासन के अभ्यास से रक्त संचार बढ़ने की वजह से दर्द से निजात मिलती है।

५- मूलाधार चक्र पर ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है जिसके कारण कुंडलिनी शक्ति जागृत करने में भी वीरासन अभ्यास मददगार है।

६- कई लोगों को झुकाकर चलने, बैठने अथवा खड़े होने की आदत होती है। ऐसे लोगों को लंबे समय के बाद कमर दर्द, पीठ दर्द अथवा रीढ़ को हड्डी में समस्या हो सकती है। ऐसे में Veerasana वीरासन रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने में मदद कर पोस्चर समस्या दूर करता है।

७- वीरासन का नियमित अभ्यास नाभि चक्र संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है तथा पेट में गैस बनने से छुटकारा दिलाता है।

८- जैसा कि वीरासन अभ्यास में रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी होने की वजह से ऊर्जा का प्रवाह शरीर में सुचारू होने लगता है। फलस्वरूप किसी भी प्रकार का आलस, अति निद्रा या अनिद्रा तथा थकान की समय कम होती है।

९- Veerasana वीरासन के नियमित अभ्यास से फिशर, बवासीर अथवा मूत्राशय संबंधी समस्याओं में भी लाभ होते है।

१०- वीरासन के अभ्यास से रक्त संचार सुचारू रूप से होने के कारण स्त्रियों में मासिक चक्र के दरमियान होने वाले दर्द की समस्या दूर होती है।

११- पैरों में सूजन अक्सर रक्त संचार के अभाव में होता है, अतः वीरासन रक्त संचार सुधरकर पैरों की सूजन दूर करने में मदद करता है।

१२- स्त्रियों में रजोनिवृति के दौरान होने वाली समस्याएं जैसे कि मूड स्विंग, रक्त का अधिक अथवा कम प्रवाह एवं अन्य शारीरिक एवम् मानसिक तकलीफों से राहत मिलती है।

१३- उच्च रक्तचाप तथा सांसों संबंधी किसी भी रोग से मुक्ति दिलाने में Veerasana वीरासन का अभ्यास अति लाभकारी है।

How to Do Veerasana in Hindi वीरासन कैसे करें

वीरासन करने की सही विधि Veerasana Steps ध्यान से पढ़ें।

Veerasana images

१- किसी स्वच्छ, शांत तथा हवादार स्थान पर समतल भूमि पर दरी अथवा योगा मैट बिछाकर बैठ जाएं।

२- दोनों पैरों को वज्रासन मुद्रा में लेकर आए तथा दोनों पैरों की एड़ियों को एक एक करके नितम्बों के नीचे से हटाकर कूल्हों के बगल में कर दें। इस प्रकार आप पाएंगे कि नितंब ज़मीन को छू रहे हैं।

३- अब धीरे धीरे दोनों पैरों के घुटनों को एक दूसरे से दूर अर्थात चौड़ाई में सरकाएं। ऐसा करते वक्त तो बातों का खास खयाल रखें कि पंजे नितंबों के पास से ना हिलें तथा जल्दबाजी बिल्कुल न करें।

४- दोनों हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा अथवा साधारण रूप से रख दें। यदि आप ज्ञान मुद्रा अपना रहें हैं तो हथेलियां आसमान की तरफ़ खोलिए। यदि नहीं, तो घुटनों पर हथेलियों नीचे की ओर चित्र के अनुसार रखें।

५- लंबी गहरी सांस लें तथा सांस को भीतर पेट तक जाते हुए महसूस करें। सांस रोक रखें तथा  मन में २० से २५ तक की गिनती करें। उसके बाद सांसों को धीरे धीरे छोड़ते हुए महसूस करें।

६- आंखें बंद कर। सांसों को साधारण करें तथा धीरे धीरे स्वयं को पीछे की ओर झुकाएं। पैरों के ऐसा पास, कमर तथा पेट पर पड़ने वाले खिंचाव पर गौर करें। २५ से ३० सेकंड तक पीछे रहें फिर धीरे धीरे सीधे हो जाएं।

७- फिर एक एक करने दोनों पैरों को सामने की तरफ़ फैला लें। इस प्रकार Veerasana वीरासन का एक चक्र पूरा हुआ

८- कुछ देर के विश्राम के बाद फिर से पैरों को घुटने से मोड़कर कूल्हों के बगल में ले जाएं तथा हाथों को घुटनों पर रख पहले की प्रक्रिया दोहराएं।

९- नियमित अभ्यास के साथ समय अवधि बढ़ाते रहें ताकि वीरासन के सम्पूर्ण लाभों का अनुभव कर सकें। दिन में कम से कम चार से पांच चक्र Veerasana वीरासन का अभ्यास करें।

Precaution in Veerasana in Hindi  वीरासन में सावधानियां

१- किसी भी प्रकार के फेफड़े अथवा हृदय रोग की अवस्था में वीरासन का अभ्यास ना करें।

२- घुटने अथवा टखनों में चोट होने पर भी वीरासन का अभ्यास न करें।

३- घुटनों को फैलाते, पंजों को नितंबों से दूर करते अथवा पीछे झुकते समय बिल्कुल भी जल्दबाजी न करें तथा ध्यान वर्तमान में ही रखें। अन्यथा मोच आने की संभावना हो सकती है।

४- सबसे महत्वपूर्ण, Veerasana वीरासन का अभ्यास बिल्कुल खाली पेट करें इसलिए सुबह का समय सबसे अच्छा होगा। यदि किसी अन्य समय में अभ्यास करना हो तो कम से कम दो घंटे पूर्व कुछ न खाए अथवा पिएं।

Veerasana के पूर्व किए जाने वाले आसन

अक्सर सहयोगी आसनों के क्रमानुसार किए जाने पर लाभ दोगुना हो जाता है। वीरासन अभ्यास के पहले बद्ध कोणासन तथा बालासन का अभ्यास अत्यंत फायदेमंद होता है।

Veerasana के बाद किए जाने वाले आसन

वीरासन अभ्यास के बाद शरीर में आए तनाव को कम करने के लिए पद्मासन तथा वकासन का अभ्यास अवश्य करें।

Final Words: आसनों में एक महत्वपूर्ण आसन Veerasana है, इसे अपनी दिनचर्या में अवश्य शामिल करें।
इस आसन का अभ्यास ध्यान अभ्यास के जैसा ही मन को शांति प्रदान करता है। पोस्ट कैसी लगी, कॉमेंट करके ज़रूर बताएं तथा दूसरों के साथ भी साझा करें ताकि उनको भी मदद मिले।

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