व्यतिपात योग के प्रभाव को कम करने के 5 उपाय- Vyatipata Yoga in Hindi

Vyatipata Yoga योग का एक महत्वपूर्ण अंश ज्योतिष शास्त्र है जो व्यक्ति के जन्म काल, दिन एवं अन्य नक्षत्रों के अनुसार भविष्य की एक झलक दिखाने में सक्षम है। व्यतिपात इन्हीं कालों का एक हिस्सा है जो प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में कभी ना कभी आता ही है।

समय हमेशा एक सा नहीं रहता ये शत प्रतिशत सच है किन्तु एक सच ये भी है कि हम प्रत्येक समय का सदुपयोग कर सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुछ काल, नक्षत्र अथवा घड़ियां किसी के लिए अच्छी हो सकती हैं तो किसी पर भारी भी पड़ सकती हैं।

इसका कारण प्रत्येक मनुष्य के अपने ग्रहों के साथ का मिलाप है जो कि पूर्व जन्म के कर्मों के अनुसार बनता है। व्यतिपात योग Vyatipata Yoga भी इन्हीं में से एक ग्रहों के साथ का योग है।

व्यतिपात योग किसी भी नए कार्य के लिए शुभ नहीं माना जाता है किन्तु इसका अर्थ ये नहीं कि इस यह अथवा कोई अन्य समय को व्यर्थ जाने देना चाहिए।

इस आर्टिकल में हम व्यतीपात योग Vyatipata Yoga क्या है, इसका किसी के जीवन पर कैसे प्रभाव पड़ता है तथा कैसे इन प्रभावों से बचा जा सकता है, इन सभी सवालों के जवाब देखेंगे।

सबसे पहले विस्तार से जानते हैं कि व्यतिपत योग क्या है इसकी उत्पत्ति कैसे हुई?

What is Vyatipata Yoga in Hindi

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक शुभ अथवा अशुभ समय की उत्पत्ति के पीछे कोई ना कोई कहानी प्रचलित है। व्यतिपात योग की कहानी हमें बहुत कुछ सिखाती है, ध्यान से पढ़ें।

एक बार चन्द्रमा की नज़र देवताओं के गुरु बृहस्पति की पत्नी पर पड़ी और और उनकी नियत खराब हो गई। सूर्यदेव को इस बात कि भनक लग गई कि चन्द्रमा उनके गुरुदेव की अर्धांगिनी को गलत निगाह से देखने लगे हैं।

उन्होंने चन्द्रमा को समझाने की कोशिश की किन्तु चन्द्रमा ने उनकी एक नहीं सुनी। दोनों में इस बात को लेकर कहा सुनी होने लगी। दोनों का क्रोध इतना तीव्र हो गया कि उनसे उत्पन्न ऊर्जा ने एक नया स्वरूप ले लिया। इसी ऊर्जा का नाम Vyatipata Yoga व्यतिपात योग के रूप में जाना जाता है।

हताश तथा दुखी सूर्यदेव ने चन्द्रमा द्वारा कि गई गलती को ठीक करने के लिए आखिर में अपने गुरु का ध्यान किया। गुरू की कृपा पड़ने के उसके बाद उन दोनों के बीच की स्थिति ठीक हुई।

उम्मीद है आपको इस बात की समझ तो आ ही गई होगी कि किस गलती के परिणाम के रूप में व्यतिपात योग मिलता है। यह स्त्री तथा पुरुष दोनों के लिए लागू होता है।

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What is Vyatipata Yoga in Astrology

ज्योतिष जगत में जब जन्म के समय व्यतिपात योग का समय होता है तो ऐसे में कुंडली में इस योग का प्रभाव समय समय पर देखने के लिए मिलता है।

जैसा कि नाम से संकेत मिलता है कि यह योग उत्पात मचाने वाला समय है तथा इस योगकाल में सारे बने हुए काम भी बिगड़ने लगते हैं।

Vyatipata Yoga in Kundli/ Vyatipata Yoga Effects

कुंडली में व्यतिपात योग १७ वां नित्य योग है जो रूद्र शासित है, यह समय कोई भी शुभ कार्य करने के लिए अशुभ माना जाता है। इस समय मंत्र जाप, गुरु पूजा, उपवास तथा Vyatipata Yoga Puja आदि करना अत्यंत महत्व है।

व्यतिपात योग का प्रभाव अत्यंत दुखदाई होता है और जीवन में कभी ना कभी हार राशि पर इसका असर पड़ता है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अक्सर इंसान समझ भी नहीं पाता कि क्या हो रहा है!

नीचे कुछ बातें हैं जिन्हें ध्यान में रखने से आप समय की पहचान कर सकते हैं।

१- जब व्यतिपात योग Vyatipata Yoga प्रथम गृह में होता है मनुष्य उग्र हो सकता है। अपने रिश्तेदारों तथा करीबी लोगों से ईर्ष्या कर सकता है एवं दुःख से पीड़ित हो सकता है।

२- जब व्यतिपात योग कुंडली के दूसरे घर में होता है, व्यक्ति पित्त से प्रभावित अथवा पाचन संबंधी समस्याओं से प्रभावित हो सकता है। ऐसा व्यक्ति अत्यंत भोगी तथा दूसरों का सम्मान नहीं करता। व्यक्ति दिल से बुरा नहीं होता किन्तु बुरे काम कर दूसरों को दुख देता है।

३- जब तीसरे घर में व्यतिपट योग बनता है तो व्यक्ति बुद्धिमान होता है। वह अत्यंत बलवान, साहसी, तथा धर्मार्थी होता है। ऐसा व्यक्ति राजसी एवं धनवान होते हैं।

४- जब व्यतिपातयोग चौथे घर में हो तो व्यक्ति बीमारी से पीड़ित रहता है। ऐसा व्यक्ति संतान तथा अन्य सुख से वंचित रह जाता है।

५- व्यतिपात योग Vyatipata Yoga जब पांचवे घर में हो तो व्यक्ति अत्यंत सुंदर होता है किन्तु पीड़ित होता है। ऐसा इंसान क्रूर, बेशर्म होने के साथ पित्त, वात से पीड़ित होते हैं।

६- कुंडली में जब छठें घर में व्यतीपात योग तो व्यक्ति शरीर से मजबूत होता है तथा अपने दुश्मनों को हरा सकता है। ऐसा व्यक्ति शांत स्वभाव का होने के साथ अन्य कलाओं में निपुण होता है।

७- सातवें घर में व्यतीपात योग होने पर संतान, धन, तथा सहचर का साथ सुख देता है। ऐसा व्यक्ति कामुक, महिलाओं के नियंत्रण में होता है कभी कभी दूसरों का दुश्मन बन जाता है।

८- जब आठवें घर में व्यतिपात योग होता है तो व्यक्ति की आंखें विकृत होती है, अथवा उस दुर्भाग्य का सामना कर सकता है। अक्सर ऐसे व्यक्ति रक्त समस्याओं का सामना करता है तथा विद्वानों के आलोचक होता है।

९- जब नौवें घर में व्यतिपात योग Vyatipata Yoga होता है, ये लोग अनेक पेशे में शामिल हो सकते हैं। ऐसे लोग ज्ञानी तथा महिलाओं को प्रिय होते हैं।

१०- दसवें घर में व्यतिपात योग होने पर व्यक्ति अधिक समृद्ध होते है तथा ऐसे लोगों का झुकाव धार्मिक तथा शुद्ध भाव वाले होते हैं। ऐसे लोग अक्सर ज्ञानी अथवा धर्म प्रचार प्रसार वाले होते हैं।

११- जब व्यतिपात योग ग्यारहवें योग में होता है तो व्यक्ति अत्यंत अमीर, मेहनती एवं कठोर होता है। ऐसे लोग संगीत प्रेमी होते हैं।

१२- Vyatipata Yoga व्यतिपात योग के बारहवें घर में होने पर व्यक्ति विकृत शरीर वाला हो सकता है तथा जिम्मेदार व्यक्ति होता है। ऐसे लोग दूसरों से जलने वाले तथा आलोचक होते हैं।

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Vyatipata Yoga Effects

जब साल के कुछ दिन में व्यतिपात योग का प्रभाव पड़ता है तो कुछ ऐसे प्रभाव देखने के लिए मिलता है।

१- कार्यक्षेत्र में रूकावटें आने लगती हैं, कभी कभी तो बने हुए काम भी बिगड़ने लगते हैं।

२- यदि आप व्यवसाय करते हैं तो पैसों के लेन देन पर विशेष ध्यान दें अन्यथा भारी नुक़सान का सामना करने पड़ सकता है।

३- किसी न किसी वजह से कार्यक्षेत्र में उथल पुथल बनी रहती है, कभी कभी साधारण समस्याएं भी गंभीर रूप ले लेती हैं।

४- लाख कोशिशों के बावजूद उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिलते हैं, और मन में विहवलता बढ़ने लगती है।

५- अचानक से किसी शारीरिक एवं मानसिक पीड़ा का अनुभव करना पड़ सकता है।

Vyatipata Yoga Solutions

प्रत्येक मनुष्य के जीवन में इस काल का प्रभाव पड़ता है है, और मुश्किल समय का सामना करना पड़ता है। महत्वपूर्ण यह है कि ऐसे समय में आप स्वयं को सकारात्मक रखें तथा कुछ सरल विधियों का उपाय कर संयम रखें। समय अच्छा हो या बुरा किन्तु बदलता ज़रूर है।

जब भी व्यतिपात योग Vyatipata Yoga का सामना करना पड़े, कुछ निम्न उपायों को अपनाएं।

१- जैसा कि इस योग का संबंध गुरु अर्थात बृहस्पति से है, ऐसे समय में गुरु की महिमा तथा बृहस्पति का पूजा पाठ करना लाभदायक होता है।

२- इस योग का प्रभाव पड़ने पर सूर्यदेव की उपासना कर उन्हें प्रसन्न कर ऐसे समय में संयम रख सकते हैं। मन की शांति तथा मुश्किल समय गुजरने में मदद मिलती है।

३- अपने ईश्वर की आराधना कर मंत्रों का उच्चारण, योग तथा कपालभाति का अभ्यास कर स्वयं को मजबूत बनाए रखें।

४- विचारों में शुद्धता रखें, किसी से बेवजह झगड़े ना लें। दूसरों के लिए मन में अच्छी भावना रखें तथा किसी का बुरा ना सोचे ना करें।

५- अन्य स्त्रियों के लिए अपनी नज़र तथा भावनाएं शुद्ध रखें, स्वयं की ईश्वर में श्रद्धा रखें। किसी भी हाल में अपना विश्वास ना डगमगाने दें।

Final Words: अन्य बुरे समय के समान व्यतिपात योग Vyatipata Yoga भी एक समय होता है जो आता है एवं चला जाता है। किसी भी हाल में हताश ना हों क्योंकि जीवन ऊपर नीचे होते रहता है। बुरे समय में संयम तथा अच्छे समय में जीवन के प्रति उत्साह रखना जीवन जीने का असली मकसद होना चाहिए।

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भवतु सब्बै मंगलम !

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