Udgeeth Pranayama in Hindi।उद्गीथ प्राणायाम के 12 अविश्वनीय लाभ

Udgeeth Pranayama/ उद्गीथ प्राणायाम अन्य प्राणायामों की अपेक्षा विशेष प्राणायाम है। जिस प्रकार नाड़ी शोधन प्राणायाम शरीर में प्राण ऊर्जा तथा ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाता है, उसी प्रकार उद्गीथ प्राणायाम स्वसन प्रणाली को तंदुरुस्त रखता है।

कोरोना जैसी महामारी को मात देने, अपनी शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य का संतुलन रखने के लिए यह विशेष प्राणायाम अत्यंत प्रभावी है।

उद्गीथ प्राणायाम/Udgeeth Pranayama की विशेष बात यह है कि यह प्राणायाम महामृत्युंज मंत्र की भांति भगवान शिव से संबंध जोड़ने में भी सहायक है। यही कारण है कि यह प्राणायाम ओमकारी जाप के नाम से भी प्रसिद्ध है।

दूसरे शब्दों में कहा जाए तो यह एकमात्र प्राणायाम है जो शारीरिक मानसिक एवं आध्यात्मिक लाभ देता है। ब्रह्मांड की ध्वनि “ओम” का जाप भगवान शिव से मिलन कराने एवं आपकी अध्यात्मिक यात्रा को सबल बनाने का सर्वाधिक सरल रास्ता है।

Mystic Mind के इस आर्टिकल में हम आपके साथ उद्गीथ प्राणायाम/Udgeeth Pranayama का अर्थ, अभ्यास की विधि, अभ्यास का समय के साथ इससे मिलने वाले चमत्कारी लाभों को साझा करेंगे।

नियमित सुबह दस से पंद्रह मिनट किया गया उद्गीथ प्राणायाम शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा संतुलित रखने एवं मानसिक तनाव को कम करने का काम करता है।

उद्गीथ प्राणायाम के अभ्यास की विधि एवं इसके लाभों को जानने से पहले जानते हैं कि उद्गीथ प्राणायाम क्या है?

Udgeeth Pranayama Meaning in Hindi/ उद्गीथ प्राणायाम का अर्थ

उद्गीथ प्राणायाम संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है। उद्गीथ का अर्थ होता है गहरा, लयबद्ध संगीत अथवा जाप एवं प्राणायाम सांसों का विशेष अभ्यास करना है। इस प्रकार उद्गीथ प्राणायाम/Udgeeth Pranayama सांसों का एक प्रकार का अभ्यास है जिसमें लयबद्ध रीति से ओम् का जाप किया जाता है।

ओम जिसे भारतीय शास्त्रों के साथ आधुनिक विज्ञान ने भी ब्रह्मांड की सर्वोच्च ऊर्जा उत्पन्न करने वाला मंत्र स्वीकार किया है।

आइए देखते हैं कि How to do Udgeeth Pranayama/ उद्गीथ प्राणायाम के अभ्यास की सही विधि क्या है?

Udgeeth Pranayama Steps in Hindi/ उद्गीथ प्राणायाम की विधि

योगासन, ध्यान तथा प्राणायाम को जब सही तरीके से किया जाए तभी उसका पूर्ण लाभ मिलता है। इसलिए उद्गीथ प्राणायाम के अभ्यास विधि पर विशेष ध्यान दें।

#१ सर्वप्रथम किसी हवादार तथा शांत स्थान पर समतल ज़मीन देखकर चटाई/योगा मैट पर बैठ जाएं।

#२ बैठने के लिए आप सुखासन, पद्मासन, अर्ध पद्मासन अथवा अन्य किसी आसन, जिसमें आप दस से पंद्रह मिनट आराम से बैठ सकते हैं, का चुनाव कर सकते हैं।

#३ कमर बिल्कुल सीधी रखें, हाथों को ध्यानावस्था, ध्यान मुद्रा में लाएं तथा आंखें बंद कर लें।

#४ दस से पंद्रह लंबी गहरी सांस भीतर लें तथा बाहर छोड़ते समय शरीर को बिल्कुल ढीला छोड़ दें। सांसों का यह अभ्यास शरीर तथा मन दोनों को वर्तमान में लाकर Udgeeth Pranayama/उद्गीथ प्राणायाम के अभ्यास के लिए तैयार करता है।

#५ अब धीरे धीरे एक लंबी सांस भरें तथा सांसों को धीरे धीरे बाहर छोड़ते हुए “ओम” का उच्चारण करें।

#६ ओम के उच्चारण का समय कम से कम १०ही १५ सेकंड तक रखें तथा लयबद्ध तरीके से करें।

#७ सांसों को बाहर छोड़ते तथा ओमकार का उच्चारण करते समय ध्यान को सांसों के साथ शुरू कर आज्ञा चक्र तक ले जाएं।

#८ ओम का उच्चारण करते समय के उच्चारण के साथ ध्यान पेट से शुरू कर सांसों के साथ ऊपर की ओर ले जाएं। अंत में का उच्चारण करते समय ध्यान के आज्ञा चक्र पर ले जाएं तथा यथासंभव का उच्चारण लंबा रखें।

#९ यदि आप उद्गीथ प्राणायाम/Udgeeth Pranayama का अभ्यास करने वाले नए अभ्यासी हैं तो सात बार ओम का उच्चारण करें।

#१० अंत में सांसों को सामान्य होने तक आंखें बंद किए कुछ देर बैठे रहें फिर आंखें खोल सहज हो जाएं।

आइए जानते हैं इस अद्भुत प्राणायाम/ Udgeeth Pranayama को नियमित दस से पंद्रह मिनट करने से क्या लाभ मिलते हैं।

Health Benefits of Udgeeth Pranayama in Hindi /उद्गीथ प्राणायाम के लाभ

उद्गीथ प्राणायाम का नियमित अभ्यास अनेकों शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक लाभ देता है।

#१ उद्गीथ प्राणायाम/Udgeeth Pranayama सर्वप्रथम स्वसन नलिका को स्वच्छ कर, फेफड़ों को तंदुरुस्त बनाता है।

#२ शरीर में रक्त संचार एवं ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है।

#३ मन से नकारात्मक विचार जैसे कि भय, चिंता, अवसाद आदि को दूर कर वर्तमान में जीने की क्षमता देता है।

#४ स्मरण शक्ति बढ़ाने के साथ अवचेतन मन को सक्रिय करता है। मन को एकाग्र कर कार्य क्षमता को बढ़ाने में अत्यंत मददगार प्राणायम है।

#५ उद्गीथ प्राणायाम/Udgeeth Pranayama का नियमित अभ्यास सिर संबंधी बीमारियां जैसे कि अनिद्रा, सिरदर्द यहां तक कि माइग्रेन को भी जड़ से खत्म कर देता है।

#६ अस्थमा, गले की बीमारियां अथवा सांसों संबंधी अन्य समस्याओं को दूर करता है।

#७ उच्च रक्तचाप तथा हृदय रोगियों के लिए अत्यंत मददगार प्राणायाम है। नियमित अभ्यास करने वालों के स्वास्थ्य में जबरदस्त सुधार देखा गया है।

#८ स्वसन नालियों का शुद्ध होना अर्थात इड़ा एवं पिंगला का भी शुद्धिकरण होना। उद्गीथ प्राणायाम का नियमित अभ्यास कुंडलिनी शक्ति को सक्रिय करने में मदद करता है।

जानें: कुंडलिनी शक्ति सक्रिय होने के लाभ

#९ उद्गीथ प्राणायाम का नियमित अभ्यास मन से किसी भी प्रकार का भय, मानसिक विकार निकलकर आपको निर्भय बनाने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ाता है।

#१० लंबे समय तक किया गया अभ्यास शरीर चेहरे की झुर्रियों को कम करने, बालों को असमय सफ़ेद होने से व गिरने से रोकने में मदद करता है। दूसरे शब्दों में कहें तो शरीर को जवान तथा ऊर्जावान रखने में मदद करता है।

#११ उद्गीथ प्राणायाम/Udgeeth Pranayama का अभ्यास शरीर और मन से आलस को भगाकर तुरंत नई ऊर्जा का संचार करता है, जिससे मन प्रसन्न एवं सकारात्मक बना रहता है।

#१२ शरीर की रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ाने के साथ यह प्राणायाम मानसिक एवं भावनात्मक रूप से मजबूत बनाता है।

Udgeeth Pranayama Precautions/ उद्गीथ प्राणायाम अभ्यास में सावधानियां

किसी भी योगासन अथवा प्राणायाम अभ्यास से पूर्व सावधानियों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इस प्राणायाम के अभ्यास पूर्व निम्न बातों पर ध्यान दें।

#१ हालांकि रोगियों के लिए यह प्राणायाम अत्यंत लाभकारी है, किंतु शुरुआती दिनों में चिकित्सक की राय एवं योग्य शिक्षक की निगरानी में ही इसका अभ्यास करें।

#२ उद्गीथ प्राणायाम का अभ्यास नियमित एक ही स्थान पर करने से विशेष लाभ मिलता है इसलिए स्थान सोच समझकर चुनें जहां किसी प्रकार। की हलचल ना हो।

#३ सुबह सोकर उठने के तुरंत बाद किया गया प्राणायाम विशेष तथा सम्पूर्ण लाभ देता है इसलिए कोशिश करें की सूर्योदय से पूर्व अभ्यास हो जाए। (अपनी सुविधानुसार समय का चुनाव करें, हमने सर्वश्रेष्ठ समय का सुझाव दिया है)

#४ खाने के तुरंत पहले अथवा तुरंत बाद Udgeeth Pranayama/प्राणायाम का अभ्यास बिल्कुल न करें।

#५ प्राणायाम का अभ्यास करते समय सांसों को प्रक्रिया धीमी तथा लंबी होना अति आवश्यक है इसलिए उद्गीथ प्राणयाम का अभय जल्दबाजी में न करें।

Udgeeth Pranayama Time । उद्गीथ प्राणायाम अभ्यास का समय

जैसा कि ऊपर बताया है शुरुआती दिनों में कम से कम सात बार ओमकार का उच्चारण करें। यदि सही तरीके से अभ्यास करेंगे तो यह आठ से दस मिनट तक जाएगा।

हर हफ़्ते दो से तीन बार स्वांस प्रक्रिया को बढ़ाने के साथ सांसों को भीतर लेने की अवधि तथा ओमकार उच्चारण अवधि को भी बढ़ाते रहें।

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Final Words: उद्गीथ प्राणायम/Udgeeth Pranayama का नियमित अभ्यास मात्र कोरोना ही नहीं बल्कि भविष्य में आने वाली किसी भी कठिन परिस्थितियों से जीतने के लिए सक्षम बनाता है।

सबका भला हो

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