TRIPITAKA: Importance Of Tripitaka In Hindi- Mystic Mind

TRIPITAKA त्रिपिटक, जिसे सरल शब्दों में Three Basket अर्थात तीन पिटारी भी कहा जाता है। यह एक पारंपरिक शब्द है, जिसका प्रयोग बौद्ध धर्म के लिए किया गया है।

त्रिपिटक क्या है ?

त्रिपिटक महात्मा बुद्ध के उपदेशों का संग्रह, तथा बौद्ध धर्म का प्राचीनतम ग्रंथ है। महात्मा बुद्ध की वह वाणी जो बुद्धत्व प्राप्ति के बाद से लेकर उनके महापरिनिरवाण होने तक उन्होंने जो भी उपदेश दिए, उन्हीं को धम्म कहते हैं। इन्हीं धम्मों के संग्रह ग्रंथ को त्रिपिटक कहते हैं।

भगवान बुद्ध ने अनगिनत उपदेश दिए। त्रिपिटक में कुल चौरासी हजार धम्म स्कन्द का समावेश किया गया है। जिनमें से बयासी हज़ार धम्म स्कन्द भगवान बुद्ध के शब्दों में तथा दो हज़ार उनके उपदेशों का सार, उनके शिष्यों के शब्दों में है।

अंग्रेज़ी में त्रिपिटक को पाली कैनन के नाम से जानते हैं। पाली कैनन साहित्य जगत का एक विशाल निकाय है। यह थेरवाद बौद्ध परम्परा का मानक ग्रंथ संग्रह है जो कि पाली भाषा में लिखा गया है।

Tripitaka Three Baskets

त्रिपिटक में तीन पिटक Three Baskets अर्थात तीन ग्रंथ शामिल हैं – सुत्ता पिटक, विनय पिटक तथा अभिधम्म पिटक।

१- विनय पिटक

Tripitaka / MysticMInd

सर्वप्रथम हम विनय पिटक के बारे में जानेंगे, इसे नियमों की पिटारी अर्थात Discipline Basket भी कहा जाता है।
इसके अन्तर्गत संघ में रहने वाले लोगों के लिए रोजमर्रा के नियमों का उल्लेख किया गया है। इस पिटक में स्त्री तथा पुरुष भिक्षुओं के लिए बनाए गए अलग-अलग नियमों की पूरी सूची है। इन नियमों की उत्पत्ति के पीछे की कहानियों का वर्णन भी विस्तार से किया गया है।

एक बड़े संघ को जिसमें स्त्री पुरुष दोनों के सम्मेलन हो, उसे सुचारू रूप से चलाने के लिए भगवान बुद्ध से कुछ महत्वूर्ण प्रश्न किए गए थे। उत्तर में महात्मा बुद्ध द्वारा जो भी समाधान मिला था उसका सविस्तर वर्णन विनय पिटक के अन्तर्गत मिलता है।
इन नियमों का, जीवन में उपयोग करने के लिए मंत्र की भांति हर रोज़ जाप किया जाता है।

२- सुत्ता पिटक

सुत्ता पिटक को उपदेशों की पिटारी अर्थात Discourse Basket भी कहते हैं। इस खंड में महात्मा बुद्ध तथा उनके कुछ करीबी शिष्यों के प्रवचनों का संग्रह है। इस खंड को कुल पांच निकेतों अर्थात ग्रंथों में विभाजित किया गया है। जो निम्नलिखित हैं-

१- दीघा निक या अर्थात लंबा संग्रह
२- माज्झिमा निक या अर्थात मध्यम आकार का संग्रह
३- संयुक्ता निक या अर्थात सामूहिक संग्रह
४- अंगु तारा निक या अर्थात आगे तथ्य संग्रह तथा
५- खुड्ड का निक या अर्थात छोटे ग्रंथों का संग्रह

३- अभिधम्म पिटक

आखिरी किन्तु सबसे महत्वूर्ण पिटक अभिधम्म पिटक अर्थात Higher Knowledge or Philosophy Basket है। इस खंड के अन्तर्गत सुत्त पिटक में निहित सिद्धांतों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया गया है। इसके अन्तर्गत मुख्यत: मन तथा पदार्थों अर्थात Mind and Matter के विषय में विस्तृत ज्ञान उपलब्ध है।

हिन्दू धर्म जो स्थान श्रीमदभागवत गीता का है, बौद्ध धर्म में वही स्थान धम्मपद का है। जिस प्रकार गीता ज्ञान महाभारत का एक हिस्सा है तथा इसे समझ जाने पर संपूर्ण महाभारत कथा समझ में आ जाती है। उसी प्रकार, धम्मपद अध्ययन करने वालों को बौद्ध धर्म आसानी से समझ में आ जाता है।

इन तीन ग्रंथों में भी कई ग्रंथों का समावेश है।

Frequently Asked Questions

Why is Tripitaka Important to Buddhism?

Tripikata/ MysticMInd

इसमें कोई शक नहीं कि भगवान बुद्ध के वचनों ने लाखों करोड़ों लोगों को नई दिशा दी। त्रिपिटक स्वयं भगवान बुद्ध द्वारा बताए गए नियमों और ज्ञान का संग्रह है।

वह ज्ञान जो सदियों पहले उन्होंने दिया था, आज भी जीवन के अलग अलग परिस्थितियों में प्रयोग किया जाता है तथा समस्यायों का समाधान देता है। जैसे अन्य धर्मों के लिए उनका ग्रंथ महत्वपूर्ण है वैसे ही बौद्ध धर्म के लिए त्रिपिटक महत्वपूर्ण है।

Tripitaka was written in which language?

त्रिपिटक का प्रथम अनुवाद १६४६ में चीनी भाषा में किया गया था जिसके लेखन का श्रेय मध्य भारत के तीसरी शताब्दी के भिक्षु हरिवरमन को दिया गया।

When was the Tripitaka written?

त्रिपिटक की रचना लगभग ५५० ईसा पहले, आम युग के पहले हुई थी। दीपवामसा के अनुसार वालगंभा के शासन काल के दौरान युद्ध तथा अकाल की परिस्थितियों में त्रिपिटक को सर्वप्रथम याद किया था। बाद में इसे पुस्तक का रूप दे दिया गया।

जिस प्रकार संत कबीर की रचनाओं का संग्रह स्वयं कबीरदास ने न करके उनके किसी शिष्य ने की थी। उसी प्रकार भगवान बुद्ध के विचारों, उपदेशों तथा नियमों का संग्रह, उनके महापरिनिर्वाण के उपरांत त्रिपिटक के अन्तर्गत उपलब्ध है।

बौद्ध धर्म के चार कौन-कौन से मुख्य सिद्धांत है?

१- किसी परमेश्वर या सृष्टिकर्ता में विश्वास नहीं रखना।
२- नित्य आत्मा में विश्वास नहीं करना।
३- किसी भी धर्मग्रंथ को संपूर्ण प्रमाण के रूप में नहीं स्वीकार करना।
४- जीवन सिर्फ इसी जन्म तक है, इस बात में विश्वास नहीं करना।

 

 

 

 

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