Surya Mudra in Hindi: सूर्य मुद्रा के13 चमत्कारी लाभ

Surya Mudra in Hindi सूर्य जिसके बिना इस धरा पर जीवन संभव नहीं है, हमें धूप और विटामिन डी के अलावा बहुत कुछ देता है। अगर सूरज को रोशनी कुछ दिनों के लिए पृथ्वी पर पड़ने बंद हो जाए तो शायद ही कोई जीव जीवित मिले।

पांच तत्वों से बने मानव शरीर के लिए सूर्य अहम भूमिका निभाता है। सूरज अग्नि तत्व अर्थात गर्माहट उत्पन्न करने में मदद करता है। यहां यह कहने की ज़रूरत नहीं कि भोजन पचाने के लिए कुछ जीवों का शरीर स्वयं गर्मी उत्पन्न करता है कुछ धूप खाकर पचाते हैं।

शरीर में अग्नि तत्व का असंतुलन अनेकों बीमारियों का कारण बनती हैं तथा इंसान दवाइयां खाकर ठीक करने की कोशिश में लगा रहता है। प्राचीन ऋषि मुनियों ने शरीर को प्राकृतिक तरीके से स्वस्थ रखने तथा दीर्घायु के लिए योगासनों तथा मुद्राओं का आविष्कार किया।

योगासन तथा मुद्राएं शरीर में तत्वों का संतुलन रखने में मदद करते हैं, फलस्वरूप बीमारियों के प्रवेश के लिए स्थान नहीं होता। सूर्य मुद्रा Surya Mudra शरीर में अग्नि तत्व का संतुलन कर शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य के साथ भावनात्मक रूप से भी सदृश बनाती है।

MysticMind के इस आर्टिकल में आज सूर्य मुद्रा Surya Mudra से संबंधित सभी सवालों के जवाब विस्तार में दिए जाएंगे। कोई पॉइंट ना समझने पर कमेंट बॉक्स में कॉमेंट कर ज़रूर पूछ लें।

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आइए, सबसे पहले देखते हैं कि सूर्य मुद्रा क्या है तथा इसका योग जगत में क्या महत्व है?

What is Surya Mudra in Hindi

संस्कृत शब्द सूर्य जिसे हम सूरज के नाम से ना ससिर्फ़ जानते हैं बल्कि सुबह जल अर्पण कर पूजा भी करते हैं। सूर्य की उपासना जीवन में से अंधेरे को मिटाकर उजाला भरने तथा सही राह दिखाने के लिए संस्कार के कोने कोने में की जाती है।

जैसे कि हम सभी जानते हैं कि सूर्य की ऊर्जा किसी भी प्राणी तथा पौधे के लिए अमृत तुल्य है। सूर्य मुद्रा Surya Mudra संस्कृत के दो शब्द सूर्य अर्थात सूरज व मुद्रा अर्थात उंगलियों की विशेष अवस्था है।

दूसरे शब्दों में कहें तो उंगलियों के जोड़ से शरीर में असंतुलित पांचों तत्वों को संतुलित कर स्वस्थ रह सकते हैं। हथेलियों की पांचों उंगलियां पांच तत्वों को संतुलित करने का माध्यम है। सूर्य मुद्रा Surya Mudra को दूसरे शब्दों में अग्नि शामक मुद्रा के नाम से भी जाना जाताहै।

इसके संतुलन के लिए अनामिका अर्थात रिंग फिंगर का प्रयोग किया जाता है। इस उंगली का संबंध सूर्य एवं यूरेनस ग्रह से जुड़ा है जो जीवन ऊर्जा के साथ कामुकता, अंतर्ज्ञान एवं बदलाव का भी प्रतिनिधि करती है।

पृथ्वी मुद्रा के बढ़े हुए प्रभाव को कम करने में अग्नि तत्व मदद करता है इसलिए सूर्य मुद्रा अग्नि तत्व के साथ पृथ्वी मुद्रा के संतुलन में भी मदद करती है।

How to do Surya Mudra सूर्य मुद्रा कैसे करें

मुद्राओं का अभ्यास सही तरीके तथा समुचित समय तक करने पर अपेक्षित लाभ मिलता है। देखते हैं कि सूर्य मुद्रा का सही अभ्यास कैसे करें?

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१- सूर्य मुद्रा के अभ्यास के लिए स्वच्छ तथा हवादार स्थान पर योगा मैट अथवा चटाई को बिछाकर बैठ जाएं।

२- सूर्य मुद्रा Surya Mudra के अभ्यास के लिए ध्यानमय अवस्था अर्थात सुखासन अथवा पद्मासन में बैठ जाएं। जिस भी आसन में आप लंबे समय तक स्थिर रह सकते हैं, अभ्यस्त हैं, उसका प्रयोग करें।

३- दोनों हथेलियों को दोनों घुटनों पर आसमान की तरफ़ खोलकर, हाथों को, पीठ तथा गर्दन को सीधा कर बैठ जाएं।

४- कम से कम ८ से १० लंबी गहरी सांस लेकर रोकें तथा लयबद्ध रूप से बाहर छोड़ दें। इस प्रकार सांसों को संतुलिततथा ध्यान को वर्तमान में लाएं।

५- अब हाथों की अनामिका, रिंग फिंगर, को अंदर की और मोड़कर अंगूठे से दबा लें। ऐसा करते समय हाथों की अन्य उंगलियों को बिल्कुल सीधा रखें।

६- ध्यान को फिर से उंगलियोंसे हटाकर सांसों पर लाएं तथा सामान्य रूप से सांसों के आवागम पर ध्यान दें। आप चाहें तो ओम का उच्चारण भी कर सकते हैं।

७- पांच से साथ मिनट तक इसी अवस्था में रखें तथा सांसों पर ध्यान टिकाए रखें। हर हफ्ते दो मिनट से इस मुद्रा Surya Mudra का अभ्यास समय बढ़ाते जाएं।

Surya Mudra Benefits/ Benefits of Surya Mudra

सूर्य मुद्रा के अनेकों लाभ हैं, यदि सही तरीके से प्रतिदिन इस मुद्रा का अभ्यास करें तो चमत्कारिक लाभ मिलते हैं। इसके अभ्यास से होने वाले लाभों को जानने के बाद आप स्वयं इसके अभ्यास को उत्सुक हो जाएंगे।

१- जीवन ऊर्जा के बिना शरीर निर्जीव होने लगता है, इस Surya Mudra मुद्रा का अभ्यास शरीर को ऊर्जावान कर चेहरे पर तेज़ लाता है।

२- अपच, कब्ज, एवं पर संबंधी अनेकों बीमारियों को दूर करने में सूर्य मुद्रा मदद करता है। इस मुद्रा सेको ऊर्जा उत्तपन्न होती है वह पाचन क्रिया को स्वस्थ करती है।

३- जो लोग बदलते वातावरण से जल्दी प्रभावित होते हैं तथा सर्दी, खांसी आदि के शिकार हो जाते हैं, उनके शरीर में अग्नि तत्व को संतुलित करता है। अग्नि तत्व के संतुलित होते ही रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ जाती है।

४- प्रतिदिन पंद्रह से बीस मिनट सूर्य मुद्रा Surya Mudra का अभ्यास पाचन तंत्र को सक्रिय एवं स्वस्थ कर मोटापा कम करने में भी मदद करता है। शरीर में भारी अतिरिक्त हवा को बाहर निकाल शरीर को हल्का करता है।

५- सूर्य मुद्रा के नियमित अभ्यास से मधुमेह तथा कोलेस्ट्रॉल संबंधी बीमारियों में लाभ मिलता है। यह मुद्रा शरीर में अतिरिक्त हानिकारक तत्वों को बाहर निकाल फेंक देती है।

६- अग्नि तत्व का संतुलन शरीर में किसी भी प्रकार के ब्लॉकेज को खोलकर रक्त संचार को बढ़ाने में मदद करता है। जो हृदय तथा फेंफड़ों संबंधी बीमारियों को भी दूर करती है।

७- ठंड के दिनों में होने वाली बीमारियों जैसे कि साइनस, जुकाम, खांसी, निमोनिया, गले में खरास आदि से बचाने का काम सूर्य मुद्रा Surya Mudra करती है।

८- सूर्य मुद्रा शरीर में बढ़ने हुए तत्वों को कम कर थायराइड ग्रंथि को संतुलित करती है जो मोटापे का एक विशेष कारण है। इस प्रकार थायराइड से बचने का सहज उपाय सूर्य मुद्रा है।

९- सूर्य मुद्रा Surya Mudra का नियमित अभ्यास मोतियाबिंद अथवा अन्य नेत्र बीमारियों को दूर कर आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक है। तथा आंखों के आस पास काले घेरे अथवा दसूजन को कम करती है।

१०- मेरी तरह जिन्हें ठंडे मौसम या ठंडी हवाओं के प्रभाव में आने से सरदर्द की समस्या होती है, सूर्य मुद्रा का कुछ मिनटों का अभ्यास ऐसे हालात में सरदर्द से मुक्त करती है।

११- नियमित सूर्योदय से पूर्व पंद्रह से बीस मिनट किया गया सूर्य मुद्रा का अभ्यास आज्ञा चक्र सक्रिय करने में मदद करती है। आज्ञा चक्र सक्रिय होने से जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन होने लगते हैं।

१२- सूर्य मुद्रा सिर के अंदर की ऊर्जा को संतुलित कर मस्तिष्क को आराम देती है। फलस्वरूप चिंता, अवसाद व अन्य समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है।

१३- सूर्य मुद्रा Surya Mudra पाचन तंत्र, हृदय गति, रक्त संचार एवं सातों चक्रों को संतुलित कर अन्य किसी भी बीमारी को भागकर आपके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य लाभ देती है। स्वास्थ्य व्यक्ति अपनी भावनाओं पर नियंत्रण पाने में सफल होता है।

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Surya Mudra Side Effects/ सूर्य मुद्रा Precautions

योगासन एवं मुद्राओं का अभ्यास करने से पहले सावधानियां अवश्य जान लेनी चाहिए। सूर्य मुद्रा के अभ्यास पूर्व तथा अभ्यास के समय कुछ बातों पर विशेष ध्यान दें।

Surya Mudra Precautions

१- सूर्य मुद्रा Surya Mudra का अभ्यास समय गर्मियों में कम तथा बरसात एवं सर्दियों में बढ़ा दें। मौसम का शरीर पर प्रभाव पड़ता है इसलिए अग्नि तत्व को संतुलित रखने में मौसम का विशेष प्रभाव पड़ता है।

२- सूर्य मुद्रा का अभ्यास से हो सकता है आपको अधिक भूख लगे क्योंकि पाचन तंत्र स्वस्थ होने लगता है। इसलिए अधिक भोजन ना खाएं बल्कि अपना पूर्व डायट ही रखें तथा पूर्व समय पर ही खाएं।

३- शारीरिक रूप से कमज़ोर एवं उच्च रक्तचाप कीअवस्था में सूर्य मुद्रा का अभ्यास योग्य शिक्षक के परामर्श से करें। निम्न रक्तचाप वालों के लिए इस मुद्रा का अभ्यास अमृत तुल्य है।

४- कमज़ोरी, चक्कर आने, एसिडिटी अथवा पित्त की अवस्था में सूर्य मुद्रा Surya Mudra का अभ्यास ना करें। शरीर के सामान्य होने पर ही इस मुद्रा का अभ्यास शुरू करें।

५- बैठने को स्थित व सांसों पर विशेष ध्यान दें। उंगलियों को अधिक ना दबाएं बल्कि सामान्य रूप से मुद्रा की अवस्था कायम रखें।

५- तेज़ धूप अथवा दिन के समय सूर्य मुद्रा Surya Mudra का अभ्यास ना करें।

FAQS:

१- How Long to do Surya Mudra?

सबसे महत्वपूर्ण बात Surya Mudra Duration है, तीन मिनट से शुरू कर आप पंद्रह मिनट तक इस मुद्रा का अभ्यास कर सकते हैं। सिर्फ़ उपर्युक्त बातों एवं सावधानियों पर ध्यान दें। इसके अलावा मौसम में समय अवधि घटा या बढ़ा सकते हैं।

२- When to Do Surya Mudra?

सूर्य मुद्रा के अभ्यास के लिए सर्वोत्तम समय सूर्यास्त से पहले का समय है क्योंकि यह समय सम्पूर्ण धरा के जीवों के लिए अमृत तुल्य होता है। इस समय मौजूद सूर्य की ऊर्जा अधिक लाभकारी होने के साथ तत्वों को संतुलित करने में भी मदद करती है।

३- Does Surya Mudra really Works?

यदि नियमित दस से पंद्रह मिनट तक सूर्य मुद्रा का अभ्यास किया जाए तो एक महीना पूरा होते होते इसके परिणाम आपको समझ में आने लगेंगे।

इसलिए हाँ सूर्य मुद्रा का अभ्यास कारगर एवं लाभकारी है।

Final Words: Surya Mudra का नियमित अभ्यास शरीर को स्वास्थ्य लाभ के साथ जीवन में अन्य भावनाओं को संतुलित रखने में भी सहायक हैं। इसलिए अपने नियमित ध्यान अथवा योगाभ्यास में कुछ समय जोड़कर सूर्य मुद्रा का अभ्यास अवश्य करें।

यदि आर्टिकल ज्ञानवर्धक एवं लाभकारी लगा हो तो दूसरों के साथ साझा करउनको भी सही राह दिखाएं।

भवतु सब्बै मंगलम!

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