Suchi Mudra in Hindi: सुचि मुद्रा करने की सही विधि एवं 10 गुप्त लाभ

Suchi Mudra in Hindi भाग दौड़ से भरी दिनचर्या और गलत जीवन शैली हर मानसिक और शारीरिक बीमारी की वजह है। क्या आपको पता है कि किसी भी बीमारी की जड़ पेट अर्थात पाचन तंत्र से शुरू होती है? यदि नहीं, तो आज के बाद इस बात को हमेशा ध्यान में रखें कि विचारों का तथा भोजन का सबसे पहला परिणाम पाचन तंत्र पर पड़ता है।

उदाहरण के लिए यदि आप का इंटरव्यू है तो दिमाग में नर्वस करने वाले खयाल के साथ पेट में भी हलचल होने लगती है। कुछ उल्टा- सीधा खाया की अपच अथवा पेट में मरोड़ के साथ दर्द होता है। यहां तक कि प्रेम की पहली अनुभूति के समय भी धड़कनों के साथ पेट में तितलियों की हलचल महसूस की जा सकती है।

मशहूर कहावत तो अपने सुनी ही होगी कि दिल का रास्ता भी पेट से होकर ही गुजरता है। कहने का तात्पर्य यह है, कि पेट अथवा पाचनतंत्र का सही तरीके से खयाल रखकर ना सिर्फ़ स्वास्थ्य बल्कि अन्य कामों में भी बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है।

MysticMind के इस आर्टिकल में हम आपके साथ एक ऐसी मुद्रा [Suchi Mudra] के बारे में जानकारी साझा करेंगे पाचन तंत्र को स्वस्थ करती है। इस मुद्रा के अभ्यास से पेट से संबंधित बीमारियां जैसे कि कब्ज़, गैस अथवा अपच की समस्या से निजात मिलेगी।

इस मुद्रा को कैसे करें तथा इसे होने वाले लाभ जानने से पहले जानते हैं की Suchi Mudra सूचि मुद्रा क्या है?

What is Suchi Mudra in Hindi

मुद्राएं यौगिक चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण अंग हैं जिनके माध्यम से शरीर में मौजूद पांचों तत्वों को संतुलित करते हैं। इन तत्वों जल, पृथ्वी, अग्नि वायु तथा आकाश के संतुलन से बीमारियां दूर होने लगती हैं।

सूचि मुद्रा/ Suchi Hast Mudra का शाब्दिक अर्थ देखें तो यह संस्कृत के शुचि शब्द से बना है जिसका अर्थ शुद्धता अथवा सफ़ाई होती है। मुद्रा हाथों की उंगलियों का विशेष अवस्था में स्थित करना है जिसके अभ्यास से तत्वों का संतुलन होता है।

इस प्रकार सूचि मुद्रा हाथों के उंगलियों की ऐसी विशेष अवस्था है जिसके अभ्यास से शरीर को स्वच्छ किया जाता है। शरीर को स्वच्छ करने का सबसे महत्वपूर्ण विधि पेट को साफ़ करना है। इसलिए सूचि मुद्रा कब्ज़, गैस अथवा अन्य पाचन संबंधी समस्याओं को भगाने का सबसे सरल तरीका है।

आइए अब देखते हैं कि Suchi Mudra सूचि मुद्रा का अभ्यास कैसे तथा कब करें?

How to do Suchi Mudra in Hindi

सुचि मुद्रा का लाभ लेने के लिए सही समय, सही तरीके से मुद्राओं का अभ्यास अत्यंत आवश्यक है। देखते हैं कि Suchi Mudra Steps क्या हैं?

१- सुचि मुद्रा के अभ्यास के लिए अन्य योगासनों के जैसे शांत तथा हवादार स्थान का चुनाव करें तथा आरामदायक आसन में बैठ जाएं।

२- दोनों हथेलियों की मुट्ठी बांधें तथा कोहनियों से मुड़कर छाती से लगाएं।

३- Suchi Mudra चार से पांच लंबी गहरी सांस लेकर सांस को उचित समय तक रोके रखें फिर बाहर छोड़कर ध्यान को वर्तमान में लाएं।

४- लंबी सांस लेकर दाहिने हाथ की मुट्ठी खोलें, तर्जनी उंगली को सीधी करें तथा हाथ को आंखों के सामने फैलाएं।

Suchi Mudra Images

५- Suchi Mudra नज़रें तर्जनी उंगली के पर पर टिकाएं, हाथों को बिल्कुल सीधा रखें तथा मन में १५- २० सेकंड तक गिनें। फिर सांसों को छोड़ते हुए, मुट्ठी बांधते हुए फिर से छाती के पास ले आएं।

६- अब लंबी गहरी सांस लें, बाएं हाथ की तर्जनी उंगली को खोलकर बाएं हाथ को सामने की और फैलाएं। नज़रें उंगली के पर पर टिकाएं रखें, सांस रोककर रखें तथा मन में फिर से पंद्रह से बीस तक गिनें। लयबद्ध तरीके से सांसों को छोड़ते हुए मुट्ठी बांधकर हाथ को छाती के पास लाएं।

७- इस प्रकार सूचि मुद्रा का एक चक्र पूरा हुआ। शुरू में कम से कम ८ से १० चक्र पूरा करें और समय के साथ बढ़ाते जाएं।

नोट: गंभीर कब्ज़ की अवस्था में सुबह उठने के तुरन्त बाद, दोपहर तथा शाम तीनों समय कम से कम ८ से दस बार सुचि मुद्रा/Suchi Mudra Yoga का अभ्यास करें।

Suchi Mudra Benefits in Hindi/Benefits of Suchi Mudra सुचि मुद्रा के लाभ

जैसा कि Suchi Mudra सुचि मुद्रा पेट संबंधी विकार जैसे कि एसिडिटी, कब्ज अथवा कांस्टिपेशन इत्यादि के लिए प्रसिद्ध है। इस मुद्रा के अन्य गुप्त लाभ भी हैं को निम्न हैं।

Suchi Mudra Images

१- सुचि मुद्रा के नियमित अभ्यास से पुराना से पुराना कब्ज़ दूर होता है तथा पाचन तंत्र स्वस्थ बनता है।

२- पाचन तंत्र स्वस्थ होने से किसी भी अन्य बीमारियां जैसे कि किडनी, लीवर, के रोग, मधुमेह अथवा हृदय संबंधित खतरा कम हो जाता है।

३- Suchi Mudra सुची मुद्रा का नियमित अभ्यास पेट को साफ़ कर शरीर की कार्य क्षमता को बढ़ाता है तथा मन को ताज़गी देता है।

४- सूचि मुद्रा का अभ्यास पेट से शुरू अवश्य होता है किन्तु शरीर के पांच तत्वों में से एक तत्व को संतुलित कर मानसिक स्वास्थ्य में भी योगदान देता है।

५- Suchi Mudra सुची मुद्रा इंसान के मनोभाव अथवा मूड को भी प्रभावित कर उसको चिड़चिड़ापन तथा अन्य नकारात्मक विचारों एवं भावनाओं से मुक्ति देता है।

६- सुचि मुद्रा/ Suchi Mudra Yoga का नियमित तथा लंबे समय का अभ्यास पुराने कब्ज़ के कारण बढ़े हुए माइग्रेन, सीने में दर्द तथा जलन को जड़ से मिटाने में मदद करता है।

७- इस मुद्रा के अभ्यास से पेट साफ़ होने के कारण अतिरिक्त वसा शरीर में नहीं जमा होती है। इस प्रकार यह मुद्रा कमर की चर्बी को घटाकर मोटापे को कम करने तथा मोटापे को आने से रोकता है।

८- जैसा कि अपने ऊपर पढ़ा की प्रत्येक भावनाएं पेट के आस पास के चक्रों जैसे कि मणिपुर, नाभि चक्र, तथा स्वाधिष्ठान चक्र को भी प्रभावित करती हैं। जो भावनात्मक विकारों को उत्पन्न करते हैं। यह मुद्रा भावनाओं को संतुलित कर चक्रों को संतुलित रखने में मदद करती है।

९- शरीर में किसी भी प्रकार का रोग गहराई में भावनाओं तथा चक्रों से जुड़े होते हैं, भावनाओं तथा चक्रों को संतुलित कर Suchi Mudra Yoga/ सुची मुद्रा अन्य बीमारियों को रोकने में सहायक है।

१०- लंबे समय तक रहने वाली कब्ज़ के कारण पाइल्स अथवा बवासीर की समस्या से जूझना सामान्य बात है। सुचि मुद्रा कब्ज़ को दूर कर इन बीमारियों को भगाने में मदद करती है।

Mudra for acidity and constipation/ Mudra for Constipation and Piles

सुचि मुद्रा के अलावा भी कुछ अन्य मुद्राएं हैं जिनके नियमित अभ्यास से एसिडिटी/अपच, Constipation अर्थात कब्ज़, piles अर्थात बवासीर की समस्या दूर करने में सहायक हैं।

१- अश्विनी मुद्रा का नियमित अभ्यास पाइल्स अर्थात बवासीर से बचाता है/ठीक करता है।

अश्विनी मुद्रा कैसे करें तथा इसके लाभ

२- भुजंगासन तथा शीर्ष आसन को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पेट तथा पाचन तंत्र संबंधी समस्याओं से निजात मिलती है।

भुजंगासन कैसे करें तथा इसके लाभ

३- पवन मुक्तासन, मलासान तथा बालासन के कुछ मिनटों के नियमित अभ्यास से पाचन तंत्र, एसिडिटी तथा बवासीर से मुक्ति मिलती है।

४- नियमित आधे घंटे किया गया कुण्डलिनी ध्यान का अभ्यास पाचन तंत्र अथवा अन्य किसी भी शारीरिक एवं मानसिक रोगों से मुक्ति दिलाने में सक्षम है।

कुण्डलिनी ध्यान कैसे करें तथा इसके लाभ

Suchi Mudra in BharatNatyam:

हस्त मुद्राओं का अभ्यास सिर्फ योग में ही नहीं बल्कि योग की अन्य विधाओं में भी किया गया है। योग का असली अर्थ समझने के बाद यह स्वीकार करना सरल हो जाता है कि नृत्य भी योग का एक माध्यम हैं।

Suchi Hast Mudra का भरत नाट्यम नृत्य विधा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।

Final Words: मुद्राओं अथवा आसनों का अभ्यास बीमारियों से दूर रखने तथा बचाव करने में अत्यंत लाभदायक हैं। कब्ज़, तथा अपच की शिकायत आजकल आम बात हो गई है। Suchi Mudra सुची मुद्रा का अभ्यास करने के लिए दिए गए कुछ मिनट आपको अनावश्यक समस्याओं से बचा सकता है।

उम्मीद है आज से ही आप इस मुद्रा का अभ्यास शुरू कर देंगे। इस आर्टिकल को दूसरों के साथ साझा कर उनका भी भला करें।

भवतु सब्बै मंगलम!

Advertisement

Leave a Reply

%d bloggers like this: