प्राण मुद्रा के 15 लाभ एवं सावधानियाँ/ Pran Mudra in Hindi

Pran Mudra in Hindi प्राण, जिसके बिना जीवन संभव नहीं, की तरफ़ इंसान कभी ध्यान नहीं देता। भागती दौड़ती ज़िन्दगी में बाद स्थूल चीजों के बारे में सोचता रहता है और उसकी प्राप्ति के नए नए तरीके खोजता रहता है। दुखद बात यह है कि उसे इस बात को एहसास नहीं कि उसकी अपेक्षा की शारीरिक बीमारियों, मानसिक असंतुलन का कारण है।

प्रतिदिन कुछ मिनटों का स्वयं पर ध्यान देकर जीवन को सरल एवं सुखद बनाया जा सकता है।

ध्यान, योगासन तथा मुद्राओं का जीवन शैली में समन्वय ना सिर्फ़ बेहतर स्वास्थ्य देता है बल्कि जीवन की सभी दिशाओं में संतुलन रखता है। लोगों की शिकायत रहती है कि इनके अभ्यास के लिए समय नहीं मिलता, जबकि सच तो यह है कि यदि उन्होंने शुरुआती दिनों में समय निकाल लिया तो आगे सब संतुलित हो जाता है।

मुद्राओं का अभ्यास मन तथा शरीर पर विशेष प्रभाव छोड़ता है। अक्सर लोग मात्र ध्यान एवं योगासनों को ही मान देते हैं। मुद्राओं की विशेषता जान लेने के बाद ध्यान में भिन्न भिन्न मुद्राओं का अभ्यास अनेक बीमारियों से मुक्त कर देता है।

इस आर्टिकल में [Pran Mudra] प्राण मुद्रा के बारे में विस्तार से जानेंगे। प्राण मुद्रा क्या है, कैसे काम करती है तथा इसके अभ्यास से क्या फ़ायदे होते हैं इत्यादि सवालों का विस्तार से जानकारी लेंगे।

सबसे पहले देखते हैं कि [Pran Mudra] प्राण मुद्रा क्या है?

What is Pran Mudra in Hindi

शाब्दिक रूप से देखा जाएं तो प्राण अर्थात वह शक्ति जो हमें जिंदा रखती है, जीवन देती है।

प्राण मुद्रा, जिसे पश्चिमी देशों में [Pran Mudra] ने नाम से भी जाना जाता है, हाथों की उंगलियों से बनाई गई वह स्थिति है जो जीवन शक्ति का संचार करती है। सरल तथा सीधे शब्दों में कहा जाए तो यह मुद्रा मूलाधार चक्र को सक्रिय कर शरीर में प्राण शक्ति का प्रवाह करती है।

प्राण मुद्रा को कफ कारक अथवा पित्त नाशक मुद्रा के नाम से भी जाना जाता है। इसका प्रयोग सिर्फ यौगिक क्रियाओं में ही नहीं बल्कि चिकित्सा जगत में भी प्रयोग किया जाता है।

How To Do Pran Mudra/ प्राण मुद्रा कैसे करते हैं?

प्राण मुद्रा के अभ्यास को करने से पहले कुछ बातों पर विशेष ध्यान दें क्योंकि सही तरीके से लिए गए मुद्रा का अभ्यास अनेकों लाभ देता है।

१- [Pran Mudra] प्राण मुद्रा के अभ्यास के लिए किसी शांत वातावरण में जहां वायु स्वच्छ तथा मोहक हो, चादर अथवा योगा मैट बिछाकर बैठ जाएं।

२- इस मुद्रा के अभ्यास के लिए सुखासन तथा आरामदायक कपड़ों का प्रयोग कर आराम से बैठ जाएं। दोनों हाथों को फैलाकर पैरों के घुटने पर रखें।

Pran Mudra images

३- अब दोनों हाथों की सबसे छोटी उंगली तथा तीसरी उंगली अर्थात कनिष्ठा तथा अनामिका उंगली को मोड़कर अंगूठे के पोर से मिलाएं।

४- प्राण मुद्रा [Pran Mudra]  में आने के बाद बाकी दोनों उंगलियों, गर्दन तथा मेरुदंड को बिल्कुल सीधा रखें।

५- लंबी गहरी सांस लें तथा सांसों को पेट तक जाते हुए महसूस करें, सांसों को अंदर ही रोककर रखें फिर बाहर आने दें। लयबद्ध गति से सांसों के आवागमन पर ध्यान दें।

६- बारह से पंद्रह बार सांसों पर ध्यान दें तथा बाद में उसी अवस्था में ओम् का सस्वर उच्चारण करें। प्राण मुद्रा के अभ्यास के दौरान ओम् का उच्चारण अनेक लाभ देता है।

७- बीस से पच्चीस बार ओम् का उच्चारण करने के बाद बिल्कुल शांत हो जाएं तथा मन का मौन कर शरीर तथा सिर में होने वाली प्रतिक्रिया पर ध्यान दें।

८- सांसों की गति के साथ ध्यान को रूट अर्थात मूलाधार चक्र से धीरे धीरे ऊपर क्राउन चक्र तक जाते हुए देखें।

९- प्राण मुद्रा [Pran Mudra] के अभ्यास के दौरान होने वाली प्रत्येक शारीरिक तथा आंतरिक परिवर्तन पर ध्यान देना अति आवश्यक है।

Benefits of Pran Mudra in Hindi/ Pran Mudra benefits in Hindi

मुद्रा से होने वाले क्या महत्वपूर्ण लाभ है?

जैसा कि अपने ऊपर ही जान लिया कि प्राण मुद्रा जीवनदायिनी मुद्रा है। तो, यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इसके लाभ जान लेने के बाद आप इस मुद्रा के अभ्यास के आदी हो जाएंगे।

१- सर्वप्रथम [Pran Mudra] प्राण मुद्रा प्रथम चक्र अर्थात मूलाधार चक्र को सक्रिय कर ऊर्जा का संचार करती है।

२- मूलाधार चक्र सक्रिय होने से व्यक्ति के अंदर के सारे भय दूर हो जाते हैं तथा जीवन के प्रति रवैया बिल्कुल सकारात्मक हो जाता है।

३- [Pran Mudra] प्राण मुद्रा मनुष्य के भीतर से नकारात्मक संस्कार दूर कर उसे सकारात्मकता से भर देता है उदाहरण के लिए व्यक्ति अधिक धैर्यवान तथा सहनशील बनकर किसी भी परिस्थिति का सामना कर सकता है।

४- सम्पूर्ण शरीर में ऊर्जा का प्रवाह कर शारीरिक थकान को दूर कर प्राण उर्जा व्यक्ति को तरोताजा तथा सक्रिय बनाती है।

५- शरीर के सभी अंगों में ऊर्जा तथा धमनियों में रक्त संचार कर शरीर को रोगमुक्त करने में प्राण मुद्रा मदद करती है।

६- किसी को कम भूख लगना अथवा अधिक भूख लगना दोनों ही अवस्था में प्राण ऊर्जा शरीर के सम्पूर्ण स्वास्थ्य को संतुलित कर भूख की समस्या से मुक्ति करती है।

७- प्राण शक्ति भरपूर विटामिन मिनरल तथा ज़रूरी तत्वों को स्रोत है, इसके नियमत अभ्यास से आवश्यक तत्वों की भरपाई हो जाती है।

८- ओम् का उच्चारण तथा प्राण मुद्रा का अभ्यास सिर्फ शरीर ही नहीं बल्कि मस्तिष्क की कोशिकाओं की भी आवश्यकता पूर्ति करता है। इससे मन में चल रहे द्वंद्व अथवा व्याकुलता दूर होती है।

९- [Pran Mudra] प्राण मुद्रा के नियमित अभ्यास से मानसिक स्वास्थ्य सबल होता है, अनिद्रा की शिकायत दूर होती है तथा नेत्र ज्योति बढ़ती है।

१०- किसी भी प्रकार का मानसिक तनाव, चिंता, डिप्रेशन, अथवा अन्य नकारात्मक भावनाएं आसानी से दूर हो जाती हैं, व्यक्ति वर्तमान में जीने लगता है। समस्याओं को सुलझाने कि क्षमता बढ़ जाती है तथा जीवन सुंदर बन जाता है।

११- मूलाधार चक्र सक्रिय होने के कारण मल मूत्र संबंधी बीमारियों में लाभ होता है। बीमारियां अति शीघ्र दूर हो जाती हैं।

१२- [Pran Mudra] प्राण मुद्रा के नियमित अभ्यास से कुण्डलिनी शक्ति मूलाधार चक्र से उपर उठने लगती है। इस शक्ति के प्रभाव से शरीर की अन्य बीमारियां भी ठीक होने लगती हैं।

१३- उच्च रक्तचाप, सांसों संबंधी बीमारियां, मधुमेह इत्यादि में प्राण मुद्रा के नियमित अभ्यास से आराम मिलता है।

१४- प्राण मुद्रा के नियमित अभ्यास से सिर्फ़ आंखों का ही नहीं बल्कि सभी इन्द्रियों अर्थात नाक कान, आंख, मुंह तथा गले की सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं।

१५- महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी समस्याएं दूर होती है तथा शारीरिक स्वास्थ्य संतुलित होता है।

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प्राण मुद्रा अभ्यास के दौरान सावधानियां

प्रत्येक मुद्र या आसन के अभ्यास से पहले सावधानियां ध्यान में रखना आवश्यक है।

१- [Pran Mudra] सर्दी या जुकाम को अवस्था में इस मुद्रा का अभ्यास ना करें।

२- प्रसव के ठीक बाद इस मुद्रा का अभ्यास करने से पहले योग्य शिक्षक की सलाह अवश्य लें।

३- शीघ्र तथा बेहतर परिणाम के लिए प्रतिदिन एक ही समय पर इस मुद्रा का अभ्यास करें।

४- पद्मासन में बैठकर किया गया प्राण मुद्रा का अभ्यास अधिक प्रभावी माना जाता है फिर भी जिस आसन में आप ज्यादा देर तक बैठ सकते हैं, उसी आसन का प्रयोग करें।

५- मेरुदंड में कोई स्वास्थ्य समस्या की अवस्था में चिकित्सक से परामर्श ज़रूर लें।

६- [Pran Mudra] प्राण मुद्रा का अभ्यास सुबह खाली पेट करें तथा उंगलियों को तेज़ी से ना दबाएं तथा हाथों को बिल्कुल सीधा रखें।

७- मुद्रा के अभ्यास के दौरान ध्यान को सांसों पर तथा आंतरिक गतिविधियों पर ही रखें।

Qstn: When Should we Perform Pran Mudra प्राण मुद्रा का अभ्यास कब करें? 

Ans: किसी भी मुद्रा, आसान का अभ्यास सुबह, सूर्योदय के पहले का समय सर्वोत्तम माना जाता है।
अक्सर प्राण मुद्रा का अभ्यास नेत्र संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है। यदि इस मुद्रा का अभ्यास अपान मुद्रा अथवा वायु मुद्रा का बाद किया जाए तो अन्य कई बीमारियों से मुक्ति में सहायक होती है।

Final Words: इस चमत्कारी [Pran Mudra] प्राण मुद्रा का अभ्यास प्रत्येक व्यक्ति ने नियमित करना चाहिए। कम से कम एक बार इस मुद्रा का अभ्यास इक्कीस दिनों तक कर के लाभ ज़रूर लें। कॉमेंट बॉक्स में अपना अनुभव हमारे साथ साझा करें।

इस आर्टिकल का दूसरों को भि लाभ हो, इस परोपकार को करने के लिए इस आर्टिकल को दूसरों के साथ अवश्य साझा करें।

भवतु सब्बै मंगलम!

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