Naukasana in Hindi: नौकासन का अभ्यास कैसे करें, 10 जादुई लाभ

Naukasana in Hindi शरीर को स्वस्थ रखने तथा चलाने के लिए मन, बुद्धि, इच्छाशक्ति के साथ साथ शरीर के कुछ अंग बेहद महत्वपूर्ण योगदान करते हैं। जिस प्रकार किसी भी मशीन को काम करने के साथ साथ समय समय पर उसकी सर्विसिंग अथवा साफ़ सफाई आवश्यक है, उसी प्रकार शरीर के लिए व्यायाम अति आवश्यक है।

बढ़ती उम्र तथा गलत खान पान होने के कारण शरीर के अंग कमज़ोर होने लगते हैं तथा बीमारियों का आगमन शुरू हो जाता है। योगासन एवं अन्य शारीरिक व्यायाम शरीर के इन अंगों पर विशेष प्रभाव डालते हैं जिससे वहां रक्त तथा आक्सीजन का संचार बढ़ता है।

रक्तसंचार सुचारू होने से उन अंगों का स्वास्थ्य अच्छा होने के साथ कार्य क्षमता भी बढ़ जाती है। शरीर के अंगों में एक महत्वपूर्ण अंग पाचन तंत्र है किन्तु सम्पूर्ण पेट में अत्यंत ही महत्वपूर्ण किन्तु अपेक्षित अंग नाभि है। नाभि चक्र के असंतुलन से मन, शरीर तथा कार्य प्रणाली सब कुछ असंतुलित एवं अस्त व्यस्त हो जाती है।
नाभि चक्र के बारे में अधिक जानने के लिए नीचे लिंक पर जाएं।

नाभि चक्र क्या है, कैसे काम करता है तथा इसे कैसे संतुलित करें

इसी नाभि तथा उसके साथ सम्पूर्ण पाचन तंत्र का खयाल रखने के लिए एक महत्वपूर्ण आसन है जिसे हिंदी में नौकासन कहते हैं।

MysticMind के इस आर्टिकल में हम Naukasana नौकासन क्या है,। इसे कैसे करते हैं तथा इसके जादुई फ़ायदे क्या क्या हैं, के बारे में विस्तार से जानकारी साझा करेंगे।

तो, आइए सबसे पहले देखते हैं कि नौकासन क्या है तथा इसका अभ्यास क्यों आवश्यक है?

What is Naukasana in Hindi

पाश्चात्य देशों एवं अंग्रेजी भाषा में Boat Pose के नाम से प्रचलित नौकासन संस्कृत भाषा के दो शब्दों नौका एवं आसन से मिलकर बना है। नौका का अर्थ पानी में चलने वाली नाव होता है तथा आसन अर्थात पोस्चर। इस प्रकार इस आसन का नाम नौकासन पड़ने की वजह यह है कि आसन के अभ्यास के दौरान शरीर का आकर नौका के समान हो जाता है।

लेटकर किए जाने वाले कुछ विशेष आसनों में से एक नौकासन है। इस आसन का प्रभाव विशेष रूप से नाभि तथा पर पर पड़ता है जिसका स्वास्थ्य सम्पूर्ण शरीर एवं मन पर असर करता है। दूसरे शब्दों में इस नावासन के नाम से भी जाना जाता है।

इस प्रभावशाली आसान Naukasana नौकासन से मिलने वाले लाभों जानने से पहले सही तरह से अभ्यास का तरीका जान लेना अत्यंत आवश्यक है। आसनों का लाभ तभी पूर्ण रूप से मिलता हैं जब इसका अभ्यास सही ढंग से किया जाए।

आइए देखते हैं कि नौकासन करने का सही तरीका क्या है?

Haw to do Naukasana in Hindi

नौकासन के अभ्यास के पूर्व Naukasana Steps को ध्यापूर्वक पढ़ें ताकि इसका लाभ मिले।

Naukasana Images

१- Naukasana नौकासन अभ्यास के लिए सबसे पहले हवादार स्थान तथा शांत वातावरण में दरी अथवा योगा मैट बिछाकर उसपर पीठ के बल लेट जाएं।

२- सम्पूर्ण शरीर को एक सीध में अर्थात हाथों को कमर के पास सीधा तथा पैरों को बिल्कुल सीधा रखें। सिर को सीधा रखें तथा शरीर सीधा होने के कारण हो रहे तनाव को महसूस करें।

३- आंखें बंद एक लंबी गहरी सांस लें, सांस को जब तक संभव हो अंदर रोकें फिर मुंह से बाहर छोड़ दें। इस प्रकार तीन से चार बार सांसों का अभ्यास कर ध्यान को वर्तमान में लाएं तथा आसन के अभ्यास के लिए तैयार हो जाएं।

४- सांस अंदर भरते हुए पीठ के ऊपर का हिस्सा, दोनों हाथ तथा दोनों पैरों को एक साथ ऊपर उठना शुरू करें। जितना संभव हो सिर एवं पैर को ऊपर उठाकर एक दूसरे की ओर ले जाएं।

५- जब शरीर का सारा भार कमर पर तथा नाभि पर महसूस होने लगे तो उसी अवस्था में सांस रोककर रुक जाएं। मन में एक से लेकर पंद्रह तक गिने तथा धीरे धीरे सांस बाहर छोड़ते हुए सिर एवम् पैर को नीचे की ओर ले जाएं।

६- जब शरीर का सारा भार कमर पर तथा प्रभाव नाभि पर रहता है तो शरीर का आकर नाव की भांति बन जाता है। इसीलिए इसे नौकासन कहते हैं।

७- सम्पूर्ण शरीर नीचे ज़मीन पर लाने के बाद कुछ देर स्थिर रहें तथा सांसों को सामान्य होने दें। इस प्रकार नौकासन का एक चक्र पूरा हुआ। एक बार में कम से कम तीन से चार चक्र नौकासन का पूरा करें।

नौकासन से पूर्व करने वाले आसन

आसनों को क्रमबद्ध तरीके से करने पर आसनों का लाभ बढ़ जाता है इसलिए नौकासन Naukasana से पहले अधोमुख़ श्वानासान एवं उत्तानासन का अभ्यास अधिक लाभदायक होता है।

नौकासन के बाद किए जाने वाले आसन

नौकासन के अभ्यास के बाद बद्ध कोण आसन, हलासन, शीर्षासन, भुजंगासन  एवं उत्कटासन का आभास लाभकारी होता है।

What are the benefits of Naukasana in Hindi

नौकासन अभ्यास की विधि जानने के बाद Naukasana Benefits in Hindi जान लेना आवश्यक है। ये लाभ आपको इसके अभयस करने के लिए अवश्य प्रोत्साहित करेंगे।

१- शरीर को ऊपर और नीचे से ऊपर उठाने की वजह से संपूर्ण शरीर का रक्त संचार बढ़ता है तथा शरीर का संतुलन बनाने की क्षमता बढ़ती है।

२- सम्पूर्ण शरीर का भार नितंबों पर पड़ने की वजह से नितंबों तथा पेट की अतिरिक्त वसा कम होती है। नियमित अभ्यास से कुछ ही दिनों में पेट कम होने लगता है।

३- नौकासन Naukasana के नियमित अभ्यास से किडनी तथा लीवर को अत्यधिक लाभ मिलता है। पेट में रक्त संचार बढ़ने के साथ पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम करने लगता है।

४- नौकासन के नियमित अभ्यास से पुराने से पुराना कब्ज़, गैस की समस्या आदि की समस्या से मुक्ति मिलती है।

५- नौकासन का सर्वाधिक असर मेरुदंड पर पड़ता है, फलस्वरूप रीढ़ की हड्डी लचीली होने के साथ मजबूत भी होती है।

६- नौकासन Naukasana के नियमित अभ्यास से हर्निया, मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, फिशर तथा बवासीर के ठीक होने के साथ साथ भूख बढ़ती है।

७- नौकासन के नियमित अभ्यास से छाती के अंगों जैसे कि हृदय, फेफड़े में रक्त संचार बढ़ने की वजह से अस्थमा, दमा आदि ठीक होता है। स्वसन नलियों में रक्त संचार बढ़ने के साथ सम्पूर्ण शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ जाता है।

८- नौकासन Naukasana के नियमित सही अभ्यास से कमर, पीठ एवं गर्दन की समस्या से मुक्ति मिलती है, हड्डियों का दर्द कम होता है।

९- नौकासन के नियमित अभ्यास से नाभि चक्र संतुलित होने के साथ पेट के अन्य अंगों में रक्त एवं ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है जिसकी वजह से शारीरिक चुस्ती फुर्ती बढ़ जाती है।

१०- जांघों की अतिरिक्त वसा कम होती है, जांघे मजबूत बनती है और जिससे शरीर सुडौल एवं सुदृढ़ बनता है।

११- Naukasana नौकासन के नियमित अभ्यास की वजहसे पैरों को ऊपर उठाए रखने की वजह से पैरों की ताकत बढ़ती है, हड्डियां एवं जोड़ मजबूत होते हैं।

Naukasana Precautions नौकासन में सावधानियां

नौकासन Naukasana अभ्यास से पूर्व कुछ सावधानियों पर विशेष ध्यान दें।

१- तीव्र कमर दर्द की हालात में नौकासन का अभ्यास बिना चिकित्सक की सलाह के ना करें।

२- हर्निया अथवा किसी अन्य बीमारी की अवस्था में चिकित्सक की सलाह एवं योग्य शिक्षक की निगरानी में ही नौकासन का अभ्यास करें।

३- पेट को अक्सर, कोलाइटिस एवं गर्भावस्था के दौरान नौकासन Naukasana के अभ्यास से बचें।

४- मेरुदंड अथवा कमर की हड्डियों में कोई गंभीर समस्या होने की हालात में नौकासन का अभ्यास न करें।

Naukasana for Beginners

नए लोगों को शरीर का संतुलन करने में मुश्किल हो सकती है इसलिए नौकासन अभ्यास के लिए किसी शिक्षक के सहयोग से सजी अभ्यास सीखें। नियमित अभ्यास से कुछ ही दिनों में आप स्वयं, बिना किसी मदद के, इसके अभ्यास आसानी से कर पाएंगे।

Naukasana Variations

Naukasana Variations Images

नियमित अभ्यास करने वाले नौकासन केअभ्यास को थोड़ा कठिन औरआसान बनाकर भी अभ्यास करते हैं। इस प्रकार Prishth Naukasana, एवं Supine Naukasana भी नौकासन के ही रूप हैं।

Final Words: नाभि चक्र को संतुलित कर आप अपने शरीर के साथ साथ मानसिक लाभ भी पा सकते हैं। इसके लिए नौकासन Naukasana का नियमित अभ्यास चमत्कारिक लाभ देगा।

उम्मीद है आपको अपने नियमित योगाभ्यास में नौकासन अवश्य शामिल करेंगे। यदि लेख अच्छा लगा हो तो दूसरों को दिशा दिखाएं तथा उनके साथ भी इसे साझा करें।

भवतु सब्बै मंगलम!

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