मालासन योग की सही विधि एवं 12 फ़ायदे । Malasana Yoga in Hindi

कब्ज से परेशान हों या फिर पाचन संबंधी कोई और समस्या वीरासन के साथ Malasana Yoga/ मालासन योग का अभ्यास इस समस्या को दूर करने के लिए रामबाण समान है। कुछ ही दिनों में परिणाम दिखने लगेंगे।

पेट, शरीर का वह महत्वपूर्ण अंग है जिसका स्वास्थ्य सीधा मस्तिष्क पर असर करता है। यदि पाचन तंत्र स्वस्थ और सुचारू रूप से काम करे तो सम्पूर्ण स्वास्थ्य अच्छा रहता है। पेट की एक समस्या सम्पूर्ण शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को खराब कर देता है।

देखा जाए तो मलासन योग/Malasana Yoga का अभ्यास हर उस व्यक्ति को करना चाहिए जो अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग है। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही एवं गलत खान पान के कारण मोटापा के साथ अन्य गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।

पेट की जिद्दी चर्बी को कम करने के लिए कुछ विशेष योगासनों के बारे में हमने पहले ही लिखा है। अवश्य पढ़ें।

पेट की चर्बी कम करने के उपाय एवं विशेष योगासन

MysticMind के इस आर्टिकल में मालासन योग क्या है, अभ्यास की सही विधि एवं इसके लाशों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

योगाभ्यास की खास बात यही है कि यह किसी एक अंग पर विशेष किंतु सम्पूर्ण शरीर पर कुछ न कुछ सकारात्मक असर करता है।

मालासन योग/Malasana Yoga भी पेट का साथ अन्य कई कारणों से अत्यंत लाभकारी आसन सिद्ध हुआ है। इसके लाभों को जानने से पहले जानते हैं कि मालासन योग क्या है तथा इसका सही तरह अभ्यास कैसे करें।

What is Malasana Yoga in Hindi

अंग्रेजी में गारलैंड पोज/ स्कॉट पोज/Wide Squats के नाम से प्रचलित मालासन योग संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है। माला तथा आसन।

माला, फूलों की बनाई हुई एक लड़ी जिसे गले में धारण किया जाता है। आसन अर्थात खड़े बैठने की अवस्था। इस प्रकार मालासन शरीर की वह अवस्था है जब ऐसा लगता है कि गले में कोई माला पड़ी हुई है।

भारतीय संस्कृति में पुराने समय से चली आ रही शरीर की यह अवस्था तब बनती है जब मल त्याग करने के लिए बैठा जाता है।

आज भी खेतों में तथा घर के काम काज में व्यस्त रहने वाले लोग इस आसन के अभ्यास अनायास ही कर लेते हैं। किंतु शहरों में, दफ्तरों में काम करने वाले लोगों के शरीर में अधिक प्रतिक्रिया नहीं होने के कारण पाचन संबंधी, गैस अथवा कब्ज़ की शिकायत आम बात हो जाती है।

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नियमित कुछ मिनटों को मालासन योग का अभ्यास कब्ज़ को कुछ ही दिनों में खत्म कर सकता है। आइए देखते हैं कि मालासन योग के अभ्यास की सही विधि क्या है or Malasana Yoga Kaise karte hain?

Malasana Yoga Steps in Hindi

आसनों का सही तरह से किया गया अभ्यास ही पूर्ण लाभ देता है इसलिए मालासन योग के स्टेप्स को सावधानी पूर्वक पढ़ें।

#१ मलासन योग/Malasana Yoga के अभ्यास के लिए सुबह सूर्योदय के पहले के समय अति उत्तम है। स्वच्छ हवादार एवं शांत स्थान देखकर समतल ज़मीन पर चटाई बिछाकर उसपर खड़े हो जाएं।

#२ दोनों पैरों के बीच दूरी रखें तथा लंबी गहरी सांस लें। फिर धीरे धीरे सांस को बाहर छोड़ते हुए घुटनों को मोड़कर नीचे बैठ जाएं।

 

#३ ध्यान रहे कि पूर्णतः जमीन पर न बैठें बल्कि पैरों के सहारे बैठें। दोनों हाथों को पैरों के बीच लाकर नमस्कार की अवस्था में लाएं तथा अनाहत चक्र के सामने रखें।

#४ दोनों हाथों की कोहनियों को पैरों के घुटने से अंदर की तरफ़ टिकाएं तथा दोनों जांघों को एक साथ दूर ढकेलें।

#५ रीढ़ की हड्डी सीधे रखें किंतु शरीर को आगे की ओर झुकाते हुए दोनों जांघों के बीच तक लाएं।

#६ लंबी गहरी सांस लें सांस भरते हुए सांस को गले, छाती, से होकर पेट तक जाते हुए महसूस करें। फिर धीरे धीरे सांस को बाहर छोड़ें।

#७ जितनी देर संभव हो उतनी देर तक मालासन/Malasana Yoga pose का अभ्यास करें। शुरुआती दिनों में एक से दो मिनट ठीक है। किंतु अभ्यास के साथ समय बढ़ते जाएं।

#८ मुख्य बात है कि मालासन अवस्था में बैठने के बाद सांसों को नाभिचक्र तक जाते हुए तथा वहां से वापस नाक तक आते हुए प्रक्रिया पर ध्यान दें।

Malasana Yoga benefits in Hindi। मालासन योग के लाभ

दिखने में अत्यंत सरल सा लगने वाला मालासन योग कभी कभी अभ्यास में कठिन हो जाता है। इसके दो मिनट प्रतिदिन का अभ्यास कब्ज़ जैसी भयानक समस्या को सरलता से दूर कर देता है। नियमित अभ्यास से अनेकों लाभ मिलने लगते हैं।

#१ पेट संबंधी समस्याओं को दूर कर पाचन तंत्र को स्वस्थ करता है तथा कब्ज़ से मुक्ति दिलाता है।

#२ मालासन योग/Malasana Yoga के अभ्यास से पेट पर दबाव पड़ने के कारण वहां रक्त संचार बढ़ जाता है। फलस्वरूप मोटापा कम होने के साथ त्वचा में भी कसाव आता है।

#३ सर्वाइवल चक्र अर्थात मूलधारा, स्वादिष्ठन चक्र, नाभि चक्र तथा मणिपुर चक्र सक्रिय होकर संतुलित होने लगते हैं।

#४ जांघों तथा पेट पर प्रभाव पड़ने के कारण मल तथा मूत्र द्वार के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

#५ मूलव्याध, फिशर आदि समस्याओं से छुटकारा दिलाने में मालासन योग का अभ्यास अत्यंत प्रभावी है।

#६ कब्ज, अपच तथा गैस की समस्या से परेशान लोगों में भूख ना लगाना एक आम बात है। ऐसे में शारीरिक एवं मानसिक रूप से कमज़ोरी स्वाभाविक है। मालासन योग पेट की समस्याओं को दूर कर भूख को जगाता है। परिणाम स्वरूप शारीरिक कमज़ोरी मिटाने में भी मदद करता है।

#७ कब्ज़ की समस्या से अक्सर चेहरे का रंग खराब होना, पिंपल्स का होना अथवा त्वचा बेजान होना स्वाभाविक है मालासन/Malasana Yoga के अभ्यास से पेट स्वस्थ होने पर चेहरे से पिंपल्स गायब होते हैं तथा रंगत प्राकृतिक रूप से निखारने लगती है।

#८ पेट का स्वास्थ्य ठीक होते ही सम्पूर्ण शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य सुधारने लगता है फलस्वरूप व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरने लगता है तथा आत्मविशाव बढ़ जाता है।

#९ जांघों तथा कमर की अतिरिक्त वसा को कम कर कमर का सौंदर्य बढ़ाने में भी मालासन योग सहायक आसन है।

#१० पैरों की हड्डियों के साथ घुटनों को भी मजबूत बनाने के साथ फेंफड़ों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का काम मालासन योग करता है।

#११ महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान होने वाली समस्याओं जैसे की तीव्र रक्त स्राव अथवा दर्द की समस्या को दूर करने में मालासन/Malasana Yoga अत्यंत सहायक है।

#१२ मेनोपॉज के समय होने वाले शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य का संतुलन रखता है।

Malasana Yoga Precautions in Hindi । मालसन योग में सावधानियां

अनेक लाभ देने वाले इस योग को करने से पूर्व कुछ बातों का विशेष ध्यान देना अति आवश्यक है।

#१ रीढ़, कमर अथवा निचले हिस्से की हड्डियों में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर इस आसन/Malasana Yoga का अभ्यास न करें। अथवा डॉक्टर की साला अनुसार करें।

#२ आर्थराइटिस के रोगी इस आसन का अभ्यास कतई न करें।

#३ तीव्र रक्तचाप अथवा दस्त की अवस्था में मालासन योग करने से बचें।

#४ गर्भावस्था के दौरान इस आसन का अभ्यास ना करें।

#५ किसी अन्य गंभीर समस्या होने पर चिकित्सक की सलाह एवं योग्य शिक्षक की निगरानी में ही इस आसन का अभ्यास करें।

Final Words: मालासन योग/Malasana Yoga का नियमित अभ्यास एक महीने के अंदर आपको जादुई परिणाम का अनुभव करा सकता है। उम्मीद है आप अपनी सेहत के प्रति जागरूक है एवं इस आसन को अनुभव अवश्य करेंगे।

दूसरों के साथ भी इस लेख को साझा कर उनका भला करें।

सबका भला हो

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