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कुम्भक प्राणायाम से होने वाले 12 लाभ | Kumbhaka Pranayama in Hindi

Kumbhaka Pranayama in Hindi | Benefits of Kumbhaka Pranayama in Hindi | Precautions in Kumbhaka Pranayama in Hindi | Types of Kumbhaka Pranayama in Hindi

आज के दौर में आधुनिक जीवनशैली और असंतुलित खानपान की वजह से अधिकांश लोग स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों का सामना कर रहे हैं। कई प्रकार की छोटी मोटी बीमारियों के लिए अस्पतालों का चक्कर लगाना पड़ता है।

ऐसे समय में नियमित योगाभ्यास आपकी दिनचर्या का अनिवार्य अंग बन जाना चाहिए। नियमित योगाभ्यास से तन और मन दोनों फिट रहते हैं. प्राणायाम भी योग की एक विधा है जिससे हम अपने सांसों की एक्सरसाइज कर सकते हैं।

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अगर आप भी अपने फेफड़ों को मजबूत बनाना चाहते हैं तो आपको कुंभक प्राणायाम का सहारा लेना चाहिए लेकिन इसके पहले आपको यह जान लेना चाहिए कि कुम्भक किसे कहते हैं | What is meaning of Kumbhaka Pranayama in Hindi और यह कितने प्रकार का होता है??

कुंभक क्या है? | Meaning of Kumbhaka Pranayama in Hindi

कुंभक शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है ‘घड़ा ‘। घड़ा शब्द से यहां पर अभिप्राय मानव शरीर से होता है।सांसों को लेने और छोड़ने की क्रिया के बीच जो समय का अंतराल होता है, उसे हम कुम्भक कहते हैं.

किसी भी प्रकार का प्राणायाम करते समय हम तीन क्रिया करते हैं. रेचक, पूरक और कुंभक।

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कुंभक भी दो प्रकार के होते हैं।

आंतरिक कुंभक और बाहरी कुंभक। कुंभक के दौरान सांस को अंदर खींचकर या फिर बाहर छोड कर रखा जाता है।

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कुंभक प्राणायाम के प्रकार | Types of Kumbhaka Pranayama in Hindi

कुंभक दो प्रकार के होते हैं । आंतरिक कुंभक और बाहरी कुंभक। आइए, हम कुंभक के इन दोनों प्रकारों को विस्तार से जानते हैं।

आंतरिक कुंभक : आंतरिक कुंभक क्रिया के अंतर्गत हम नाक के छिद्रों से हवा को अंदर खींचकर जितनी देर तक सांसों को रोक कर रख सकते हैं, उतने समय तक सांसों को अंदर रखते हैं और फिर धीरे धीरे सांस को बहार छोड़ दिया जाता है।

इस क्रिया को आंतरिक कुंभक की संज्ञा दी जाती है।

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बाह्य अथवा बाहरी कुंभक : बाह्य कुंभक क्रिया के तहत वायु को पहले बाहर छोड़ दिया जाता है। इसके बाद जितनी देर तक सांस को रोक कर रखना संभव होता है, उतनी देर तक उसे रोक कर रखा जाता है.

फिर शनैः शनैः सांसों को अंदर खींच लिया जाता है। इसे बाह्य अथवा बाहरी कुंभक कहा जाता है।

पूरक, रेचक कुंभक किसे कहते हैं ?

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अब इसके बाद यह प्रश्न आता है कि पूरक, रेचक और कुंभक किसे कहते हैं तो आप सामान्य तौर पर यह जान सकते हैं कि श्वांस लेने की प्रक्रिया को पूरक कहते हैं।

सांस को छोड़ने की विधि को रेचक कहते हैं और सांसों को रोके रखने की विधि को कुंभक कहा जाता है।

कुम्भक प्राणायाम के सम्पूर्ण लाभों को पाने के लिए अत्यन्त आवश्यक है कि इसका सही अभ्यास किया जाय। अभ्यास में त्रुटियां सिर्फ़ लाभों से वंचित करती हैं बल्कि नुकसान भी करती हैं।

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आइए जानते है कि Steps of Kumbhaka Pranayama in Hindi अर्थात कुम्भक प्राणायाम के अभ्यास की सही विधि क्या है?

कुंभक प्राणायाम की विधि | How To Do Kumbhaka Pranayama in Hindi

किसी भी प्रकार के योगाभ्यास का लाभ तभी प्राप्त होता है जब उसे सही एवं नियमित तरीके से किया जाए। ऐसे में आपको योगाभ्यास के सही तरीकों की जानकारी अवश्य होनी चाहिए अन्यथा आपको लाभ की बजाय नुकसान भी हो सकता है।

हम आपको सबसे पहले अभ्यंतर कुंभक प्राणायाम के तरीकों से अवगत करा रहे हैं। 

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  1. सर्वप्रथम आप पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं।
  2. अब फेफड़ों से पूरी तरह से सांस को बाहर निकाल लें।
  3. नाभि के पास से अपने पेट के हिस्से को अंदर की ओर दबाएं।
  4. सांस रोकने के पश्चात अपने गरदन को नीचे की ओर ठुड्डी पर लगाएं।
  5. जितनी देर तक संभव हो इसी स्थिति में रहें।
  6. अब सांसों को छोड़ने के लिए वापस गरदन को सामान्य मुद्रा में लेकर आएं।
  7. सांसों को शनैः शनैः आराम से बाहर की ओर छोड़ें।
  8. आप इस अभ्यास को कम से कम 05 बार करें।

यदि उपर्युक्त विधि से सावधानी पूर्वक कुम्भक प्राणायाम का अभ्यास किया जाए तो अद्भुद लाभ होते हैं।

आइए जानते हैं कि What are Benefits of Kumbhaka Pranamama in Hindi | कुंभक के अभ्यास से क्या लाभ होते हैं?

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कुंभक प्राणायाम के फायदे | Benefits of Kumbhaka Pranayama in Hindi

अगर आप नियमित तौर पर कुंभक प्राणायाम करते हैं तो आप इससे अनेकानेक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

  • नियमित कुंभक आपको मानसिक और शारीरिक रुप से सबल बनाता है। इसके अलावा कुंभक प्राणायाम से आपको ढेरों लाभ प्राप्त होते हैं।
  • नियमित कुंभक के अभ्यास आपके फेफड़े मजबूत होते हैं।
  • नियमित कुंभक प्राणायाम करने से शरीर में ऑक्सीजन की कमी नहीं होती और सांस लेने से जुड़ी दिक्कतों का सामना भी नहीं करना पड़ता है।
  • नियमित कुंभक अभ्यास करने से शारीरिक बल, उर्जा व क्षमता में वृद्धि होती है।
  • कुंभक प्राणायाम करने से भुजाओं के बल में वृद्धि होती है और सीने का आकार चौड़ा होता है।
  • कुंभक प्राणायाम के अभ्यास से रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।
  • अगर सही तरीके से कुंभक प्राणायाम किया जाए तो रक्तचाप संतुलित रहता है।
  • इतना ही नहीं नियमित कुंभक के अभ्यास से दीर्घायु जीवन की प्राप्ति होती है।
  • कुंभक का नियमित अभ्यास भूख और प्यास को नियंत्रित करता है। संकल्प और संयम में वृद्धि होती है।
  • कुंभक प्राणायाम करने वालों के मन में कभी नकारात्मक विचार नहीं आते।
  • सकारात्मक चिंतन में बढोतरी होती है.
  • कुंभक प्राणायाम करने से आंखों की रौशनी मजबूत होती है.

कुम्भक प्राणायाम के नुकसान

कुंभक प्राणायाम के लाभ तो आपने जान ही लिए होंगे लेकिन किसी भी प्राणायाम को करने से पूर्व इसके नुकसान व सावधानियों पर भी बात करना अति आवश्यक होता है।

कुंभक प्राणायम करने से शरीर मजबूत व तंदरुस्त होता है. इसे करने पर किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता है।

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नियमित कुंभक करने से बीमारियों का खतरा नहीं होता है लेकिन अगर इसे ठीक तरह से नहीं किया जाए तो इसका कोई लाभ प्राप्त भी नहीं होता और समय का नुकसान होता है.

कुंभक प्राणायाम के अभ्यास पूर्व कुछ बातों पर विशेष ध्यान दें। साथ ही अभ्यास के दौरान भी कुछ सावधानियां बरतें।

जानते हैं कि Precautions of Kumbhaka Pranayama in Hindi | कुंभक प्रणायाम के अभ्यास में क्या सावधानियां बरतें?

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कुंभक प्राणायाम में सावधानियां | Precautions in Kumbhaka Pranayama in Hindi

कुंभक प्राणायाम में सावधानियां भी जरुर बरतें, अन्यथा आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

  • सबसे पहले यह सुनिश्चित कर लें कि कुंभक प्राणायाम से पूर्व किसी योग चिकित्सक अथवा प्रशिक्षक से सलाह अवश्य लें।
  • संभव हो तो प्रारंभिक अवस्था में किसी योग विशेषज्ञ की सलाह लें।
  • अगर आप दमा या हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं तो भूल कर भी कुम्भक प्राणायाम न लगाएं। ये आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
  • अगर आप योगाभ्यास में नए हैं तो आपको प्रारंभ में कुंभक नहीं करना चाहिए।
  • पहले आप पूरक और रेचक का ही उचित तरीके से अभ्यास कर लें, उसके बाद भी कुंभक प्राणायाम करने का प्रयास करें।

आज की भाग दौड़ वाले व्यस्त जीवन में अकसर लोग यह कहकर खुद को नुकसान पहुंचाते हैं कि उनके पास समय नहीं है। कुंभक प्रणायाम के अभ्यास के लिए अत्यन्त कम समय लगता है जबकि लाभ अनेकों मिलते हैं।

आइए देखते हैं कि Duration of Kumbhak Pranayama in Hindi | कुंभक के अभ्यास की अवधि कितनी होती है?

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कुंभक प्राणायाम की मात्रा और अवधि

कुंभक प्राणायाम का अभया सुबह, दोपहर, शाम या रात किसी भी समय में किया जा सकता है। नियमानुसार कुंभक क्रिया प्रत्येक 03 घंटे पर एक दिन में 08 बार किया जा सकता है।

योग प्रशिक्षकों की मानें तो कुंभक की प्रारंभिक आवृतियां 1-2-1 की ही होनी चाहिए। इसे हम इस तरह से प्रयोग कर सकते हैं।

मान लिया जाए कि अगर हम सांस लेने में 01 सेकंड का समय लगा रहे हैं तो उसे 02 सेकंड के लिए अंदर रोकते हैं और 01 सेकंड में ही बाहर निकालें।

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धीरे धीरे इस कुंभक की अवधि को बढ़ाया जा सकता है। इसे 1-2-2, 1-3-2, 1-4-2 से आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

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कुंभक प्राणायाम और बाबा रामदेव

कुंभक प्राणायाम करने का प्रत्यक्ष लाभ आपको देखना हो तो आप योग गुरु स्वामी रामदेव के शरीर को ही देख लिजिए। आपको समझ में आ जाएगा कि कुंभक प्राणायाम से कितने फायदे हैं।

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प्राणायम की पांच विधाएं होती हैं। कुंभक भी इन्हीं पांच विधाओं में से एक होता है. नियमित प्राणायाम मानव शरीर का कायाकल्प कर देता है. बाबा रामदेव इसके साक्षात उदाहरण हैं.

Final Words: उम्मीद है कुंभक प्राणायाम से संबंधित सभी बातों के साथ इससे मिलने वाले लाभों | Benefits of Kumbhaka Pranayama in Hindi को जानकर आप इसे अपनी दिनचर्या में अवश्य शामिल करेंगे।

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सबका मंगल हो

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