How to do Uttanpadasana in Hindi: हफ्ते भर में करें पेट अंदर

How to do Uttanpadasana in Hindi कहते हैं किसी के हृदय तक पहुंचने का सबसे
आसान रास्ता उसका पेट है। सत्य भी यही है, किंतु इसी पेट के स्वास्थ्य को अनदेखा करने का का परिणाम अनेकों शारीरिक बीमारियां भी हैं।

यदि पेट के स्वास्थ्य का ध्यान रख कर खान पान एवं दिनचर्या बनाई जाय तो बीमारियां कोसों दूर रहेंगी। साथ ही लंबी उम्र एवं ऊर्जावान महसूस करेंगे।

स्वास्थ्य मात्र खान पान से नही बल्कि साथ में आवश्यक शारीरिक परिश्रम के समागम से मिलता है। यदि इन दोनों का उचित बैलेंस जीवन में है तो किसी भी प्रकार की बीमारी की संभावना नहीं होती है।

आजकल शारीरिक व्यायाम के कई प्रचलित तरीके चलन में हैं किंतु मेरे खयाल से सर्वोत्तम तरीका योगासनों का अभ्यास है। यदि दिनचर्या में आधे घंटे स्वयं के लिए निकलकर योगासनों का नियमित अभ्यास किया जाए तो संतुलित स्वास्थ्य आसान हो जाता है।

Mystic Mind के इस आर्टिकल में हम एक ऐसे ही अद्भुत एवं अत्यंत प्रभावी आसन, Uttanpadasana उत्तान पादासन के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।

इस आसन के नियमित अभ्यास से को लाभ मिलते हैं उन्हें जानने के बाद आप स्वयं को रोक नहीं पाएंगे।
उत्तान पादासन Uttanpadasana के मिलने वाले फायदों तथा How to do Uttanpadasana अथवा उत्तानपादासन कैसे करें यह जानने से पहले जानते हैं कि इस आसन का अर्थ क्या है?

Uttanpasana Meaning in Hindi

सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत के तीन शब्दों से बने उत्तानपादासन को अंग्रेजी में Raised Feet Yoga कहते हैं। संस्कृत शब्द उत्तान का अर्थ होता है ऊपर उठा हुआ, पद अर्थात पैर एवं आसन अर्थात मुद्रा। इस प्रकार
उत्तानपादासन Uttanpadasana का अर्थ देखें तो ऐसा आसन जिसमें पैर ऊपर उठे हुए हों।

पेट के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी यह आसन देखने में आसान सा किंतु थोड़ा मुश्किल सा आसन है। इसके नियमित अभ्यास से पेट संबंधी कई समस्याएं आसानी से खत्म हो जाती है।

Uttanpadasana उत्तानपादासन पूर्व किए जाने वाले योगासन

आसनों को क्रमबद्ध तरीके से करने से शरीर लचीला एवं स्वस्थ बनता जाता है। उत्तानपादासन करने से पूर्व सर्वांगासन, हलासन, कर्णपीड़ासन, ऊर्ध्व पद्मासन पिंडासन एवं मत्स्यासन का अभ्यास करने से शरीर एवं मस्तिष्क दोनों ही उत्तानपादासन Uttanpadasana के लिए तैयार हो जाता है।

How to do Uttanpadasana/ Uttanpadasana Steps in Hindi

आइए देखते हैं How to do Uttanpadasana/ उत्तानपादासन का सही अभ्यास कैसे करें। सम्पूर्ण लाभ लेने के लिए Uttanpadasana Steps को ध्यानपूर्वक पढ़ें।

१- शांतिमय, हवादार स्थान पर समतल ज़मीन देखकर चटाई बिछाकर उसपर वज्रासन मुद्रा में बैठ जाएं। पांच से दस बार लंबी गहरी सांस लेकर छोड़ें तथा शरीर को विश्राम दें।

२- How to do Uttanpadasana अब दोनों हाथों की कोहनियों को पीछे की ओर झुककर ज़मीन पर टिका दें एवं धीरे धीरे सम्पूर्ण शरीर को ज़मीन पर लिटा दें। पैरों को खोलकर बिल्कुल सीधा होकर लेट जाएं।

३- दोनों हाथों को पूर्ण रूप से सीधा रखें एवं दोनों पैरों को ऊपर उठाना शुरू कर दें। सत्तर डिग्री तक दोनों पैरों को ऊपर उठाएं फिर दोनों हाथों को भी ऊपर उंगलियों को पैरों की तरफ़ रखें।

How to do Uttanpadasana Images

४- How to do Uttanpadasana ध्यान को नाभि पर टिकाएं तथा पेट पर पड़ने वाले तीव्र प्रभाव पर ध्यान रखें। मन में एक से पंद्रह गिनने तक इसी अवस्था में रहें।

५- फिर धीरे धीरे दोनों पैरों को नीचे लेकर आएं तथा जमीन पर रख दें। दोनों हाथों को भी नीचे ज़मीन पर रख दें। अब उत्तानपादासन Uttanpadasana का एक चक्र पूर्ण होता है।

६- How to do Uttanpadasana थोड़ी देर सांसों को सामान्य कर, कुछ सेकंड के विश्राम के बाद दूसरा चक्र शुरू करें।

७- शुरू में एक से तीन चक्र का अभ्यास करें। समय और अभ्यास के साथ अवधि तरह चक्र बढ़ाते रहें।
उत्तानपादासन के बाद किए जाने वाले आसन

इस आसन के अभ्यास के बाद शीर्षासन, बद्ध पद्मासन, पद्मासन, तुलासन तथा अंत में शवासन का अभ्यास करने से शरीर का पोश्चर ठीक होने के साथ शरीर की थकान खत्म हो जाती है।

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उम्मीद है How to do Uttanpadasana जानने के बाद इसके होने वाले फ़ायदे जानने के बाद आप इस आसन का अभ्यास करने के लिए अधिक उत्साहित हो जायेंगे।

Uttanpadasana Benefits in Hindi

Uttana Padasana के नियमित अभ्यास से निम्न लाभ मिलना शुरू हो जाता है।

१- उत्तानपादासन Uttanpadasana अभ्यास के समय सबसे अधिक तनाव पेट की मांस पेशियों पर पड़ने से अतिरिक्त चर्बी कम होने लगती है तथा बढ़ा हुआ पेट अंदर जाने लगता है।

२- पेट पर प्रभाव पड़ने के कारण पाचन तंत्र तथा अन्य अंगों में रक्त संचार बढ़ने से पाचन प्रक्रिया में सुधार होने लगता है।

३- पाचन प्रक्रिया में सुधार आने के बाद पेट संबंधी समस्याएं जैसे कि गैस बनना, अपच होना अथवा कब्ज की समस्या दूर हो जाती है।

४- डायबिटीज की समस्या से भी छुटकारा दिलाने में उत्तानपदानास Uttanpadasana महत्वपूर्ण काम करता है।

५- छाती पर तनाव पड़ने के करना स्वांस नालिया स्वस्थ एवं स्वच्छ होती हैं तथा सांसों संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिलती है।

६- कंधों, गर्दन तथा कमर दर्द से राहत मिलती है एवं मांस पेशियां मजबूत बनती हैं।

७- नाभि चक्र को संतुलित कर नाभि संबंधी समस्याओं से निजात मिलती है।

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Uttanpadasana Precautions उत्तानपादासन अभ्यास पूर्व सावधानियां

 Uttanpadasana/MysticMind Images

अति उपयोगी इस आसन के अभ्यास पूर्व कुछ बातों पर विशेष ध्यान देने के बाद ही उत्तानपादासन Uttanpadasana का अभ्यास शुरू करें।

१- उच्च अथवा निम्न रक्तचाप के रोगी डॉक्टर की सलाह तथा योग्य शिक्षक की निगरानी में इस आसन का अभ्यास करें।

२- कमर की हड्डी अथवा जोड़ों में अधिक दर्द की हालात में इस आसन का अभ्यास करने से बचें।

३- पेट में किसी भी तरह का ऑपरेशन होने की स्थिति में इस आसन का अभ्यास ना करें। पूरी तरह से घाव भरने के बाद चिकित्सक की सलाह से ही शुरू करें।

४- गर्भावस्था के दौरान इस आसन का अभ्यास पूर्णतः वर्जित है।

५- अन्य किसी भी गंभीर बीमारी की हालत में चिकित्सक की सलाह अवश्य लें तथा योग शिक्षक की निगरानी में ही इस आसन का अभ्यास करें।

Final Word: उम्मीद है How to do Uttanpadasana के साथ उत्तानपादासन संबंधी अन्य सवालों के जवाब भी मिल गए होंगे।

इस आसन के नियमित अभ्यास से अनेकों बीमारियों से बचना संभव है। आर्टिकल लाभदायक लगे तो दूसरों के साथ भी अवश्य साझा करें।

भवतु सब्बै मंगलम

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