चंद्रभेदी प्राणायाम कैसे करें एवं इसके लाभ | ChandraBhedi Pranayam in Hindi

ChandraBhedi Pranayam in Hindi Images

ChandraBhedi Pranayam Meaning | ChandraBhedi Pranayam Steps in Hindi |
ChandraBhedi Pranayam Benefits in Hindi | ChandraBhedi Pranayam Precautions in Hindi

हमारे जीवन में दो नाड़ियों का महत्त्वपूर्ण स्थान है जिन्हें हम इड़ा एवं पिंगला के नाम से जानते हैं। प्राणायाम का अभ्यास इन नाड़ियों की स्वच्छता एवं स्वस्थ्य के लिए किया जाता है।

चंद्र भेदी प्राणायाम विशेषकर इड़ा को प्राभावित करता है। प्रणायाम सम्पूर्ण शरीरिक एवं मानसिक स्वस्थ्य को संतुलित कर में सक्षम क्रिया है।

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Mystic Mind के इस आर्टिकल में हम चंद्र भेदी प्रणायाम क्या है, इसे कैसे करते हैं तथा इससे क्या लाभ होते हैं इत्यादि विषयों पर विस्तार में जानकारी देंगे।

सबसे पहले आइए जानते हैं कि चंद्रभेदी प्राणायाम क्या है | What is ChandraBhedi Pranayam in Hindi?

चंद्रभेदी प्राणायाम क्या है? | Chandrabhedi Pranayam Kya hai?

प्राणायाम के द्वारा मानव बहुत समय से अपने शरीर की बीमारियों को दूर करता आया है। और विभिन्न प्रकार के प्राणायामों के बारे में भारतीय ग्रंथों में विस्तार से बताया है, जिसमें से एक Chandrabhedi Pranayam है चंद्रभेदी प्राणायाम बहुत ही साधारण प्राणायाम है। लेकिन इसके परिणाम बहुत ही ज्यादा असाधारण है।

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चंद्रभेदी प्राणायाम के अंदर बाई नाक से सांस से लिया जाता है, और दाई नाक से सांस को छोड़ दिया जाता है। और इस प्रक्रिया को कम से कम 10 बार दोहराया जाता है, जिसे एक चक्र कहा जाता है।

विभिन्न परिस्थितियों में इस चक्र को कम से कम 10 बार दोहराया जाता है। और इस पूरी प्रक्रिया को चंद्रभेदी प्राणायाम कहा जाता है।

इसे भी पढ़ें: नाड़ीशोधन प्राणायाम क्या है एवं इसके लाभ

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चंद्रभेदी प्राणायाम का अर्थ | Chndrabhedi Pranayam Meaning in Hindi

चंद्रभेदी प्राणायाम अपने आप में एक बड़ा ही वैज्ञानिक नाम है, और इसका कारण इसी प्रसंग में हम आपको बताएंगे। चंद्रभेदी प्राणायाम की प्रक्रिया में हम बाई नाक का प्रयोग सांस अंदर लेने के लिए करते हैं, लेकिन इससे सांस को बाहर छोड़ते नहीं है।

सांस लेने से नाक ठंडी होती है, और सांस छोड़ने से नाक गर्म होती है। इसलिए जब बायीं नाक से सांस अंदर लेते हैं, तो यह श्वास हमारी इड़ा / झड़ नाड़ी से होकर गुजरती है इड़ा / झड़ नाड़ी को चन्द्र नाड़ी भी कहा जात

चंद्र सामान्य तौर पर ठंड की निशानी होती है या फिर कहे तो शीतलता की निशानी होती है। और जब हम बाई नाक से सांस लेते हैं तो यह सांस हमारी इड़ा / झड़ नाड़ी से होकर गुजरती है। जिसके कारण इड़ा / झड़ नाड़ी हमारे पूरे शरीर में शीतलता का संचालन करती

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और इसी नाड़ी के नाम पर चंद्रभेदी प्राणायाम में “चंद्र” का उपयोग किया गया है, और पूरे शरीर पर शीतलता का नियंत्रण प्राप्त करना चंद्रभेदी प्राणायाम में “चंद्रभेदी” शब्द की उत्पत्ति करता

इसी प्रकार Chndrabhedi Pranayam Meaning यह होता है कि एक ऐसा प्राणायाम जो हमारे पूरे शरीर में शीतलता का प्रवाह करता है।

आइए जानते हैं कि चंद्रभेदी प्रणायाम अभ्यास की सही विधि क्या है अर्थात् ChandraBhedi Pranayam Steps in Hindi क्या हैं?

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चंद्रभेदी प्राणायाम कैसे करें? | How to do Chndrabhedi Pranayam in Hindi?

चंद्रभेदी प्राणायाम को करना बहुत ही आसान है, इसके लिए आपको अपने शरीर को शांत अवस्था में रखकर के सुबह के समय आराम से बैठ करके, अपनी बाईं नाक से सांस को अंदर लेना है और दाई नाक से सांस को बाहर छोड़ना है।

इस प्रक्रिया को कहीं देर तक दोहराना है। और इसी प्रकार से आप चंद्रभेदी प्राणायाम को सही ढंग से कर पाएंगे। लेकिन इसके कुछ नियम व स्टेप्स होते हैं, जिसके बारे में हम आपको नीचे बताएंगे।

चंद्रभेदी प्राणायाम की विधि | Steps for Chndrabhedi Pranayam in Hindi

  • भोर के समय आपको एक ऐसे स्थान पर बैठ जाना है जहां पर आपको शुद्ध वायु प्राप्त हो सके। यह छत भी हो सकती है या फिर आपके घर में गार्डन भी हो सकता है। आप चाहे तो पार्क में जाकर भी बैठ सकते हैं।
  • अब आपको सुखासन की अवस्था में बैठना है, और आपको अपनी गर्दन और रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधा रखना है।
  • इसके बाद में अब आपको अपने बाएं हाथ को बाएं घुटने पर रखना है, और दाएं हाथ से दाएं नाक के छिद्र को बंद करना है, और बाएं नाक के छिद्र से श्वास को अपने अंदर खींचना है।
  • अब उस खींची हुई श्वास वायु को अपने शरीर में कम से कम 10 सेकंड तक रखना है।
  • अब अपने दाएं हाथ के तर्जनी उंगली से अपने बाएं नाक के नथुने को बंद करना है, और दाई नाक के नथुने से अंदर खींचे गई वायु को बाहर निकालना है।
  • यह प्रक्रिया आपको धीरे-धीरे दोहरानी है।
  • जब आप इस प्रक्रिया को 10 बार पूरा कर लेंगे, तब इसका एक चक्र पूरा हो जाएगा।
  • सामान्य परिस्थितियों में आपको इसकी शुरुआत कम से कम 5 चक्र के साथ करनी होगी।
  • जब आप इसे करने में बहुत ही ज्यादा सहज महसूस करें तब आप इस चक्र की प्रक्रिया को 10 चक्र तक धीरे-धीरे पहुंचा सकते हैं।
  • इसी पूरी प्रक्रिया में आपका चंद्रभेदी प्राणायाम पूर्ण हो जाएगा।

आसान सी प्रक्रिया के नियमित अभ्यास से अनेकों स्वस्थ्य लाभ मिलते हैं। आइए जानते हैं कि Chandrabhedi Pranayam Benefits in Hindi क्या क्या हैं?

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चंद्रभेदी प्राणायाम के फायदे | Benefits of Chndrabhedi Pranayam in Hindi
  • चंद्रभेदी प्राणायाम करने से आपके शरीर की गर्मी कम होती है, और आपको ऊर्जा का एहसास होता है।
  • यह प्राणायाम करने के बाद में आप के कलेजे की जलन कम होने लगती है।
  • यह प्राणायाम करने के बाद में आप एकदम तरोताजा महसूस करने लगते हैं, और आपका आलस्य भी आपसे दूर हो जाता है।
  • यदि आपको किसी भी प्रकार से हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी है तो यह प्राणायाम आपके लिए रामबाण साबित होगा।
  • चंद्रभेदी प्राणायाम किसी भी प्रकार के मौसमी ज्वर में काफी ज्यादा सहायता करती है।
  • यदि आपके शरीर में पित्त की परेशानी है तो यह प्राणायाम आपके शरीर में पित्त के प्रवाह को काफी हद तक रोक देता है।
  • यदि आप किसी भी प्रकार से एकाग्रता करना चाहते हैं, और आप का ध्यान नहीं लगता है, तो इसे प्राणायाम के बाद में आपका ध्यान लगना शुरू हो जाएगा।
  • यदि आप पूरे दिन में मानसिक तनाव से या फिर अन्य किसी वैचारिक समस्याओं से जूझते रहते हैं तो शाम के समय या फिर भोर के समय आपके लिए यह प्रणाम करना बहुत ही ज्यादा उपयोगी होगा।

चंद्रभेदी प्राणायाम वैसे तो बहुत सारे फायदे देता है, लेकिन इसके कुछ नियम है जिनके अंतर्गत इसे करना चाहिए। और इसके लिए कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए।

चंद्रभेदी प्राणायाम के लिए बरती जाने वाली सावधानियां | Precautions for Chndrabhedi Pranayam in Hindi
  • चंद्रभेदी प्राणायाम कभी भी तीव्र सर्दी में नहीं करना चाहिए।
  • चंद्रभेदी प्राणायामकरने का सबसे बेहतरीन समय सर्दियों में दोपहर को तथा गर्मियों में भोर के समय है।
  • यदि आपको अस्थमा, खांसी, जुकाम, या फिर ऐसी कोई बीमारी है जो कि आपकी स्वास्थ्य तंत्र से जुड़ी हुई है, तो आपको यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
  • यदि आपको ब्लड प्रेशर की समस्या है, तो यह प्राणायाम करने से पहले आपको अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। सामान्य तौर पर यह ब्लड प्रेशर में सहायता करता है। लेकिन कुछ परिस्थितियों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
  • कभी भी एक साथ बहुत सारे चंद्रभेदी प्राणायाम ना करें। अधिक से अधिक पांच बार यानी कि 5 चक्र के लिए यह प्राणायाम करना सही होता है।
  • यह प्रणाम करते समय आपको सांस अपनी बायीं नाक से लेना है और दाई नाक से छोड़ना है। कृपया करके इसे अनुलोम-विलोम समझ करके दायीं नाक से श्वास लेकर के बायीं नाक से छोड़ने का प्रयास ना करें। क्योंकि इस परिस्थिति में इस चंद्रभेदी प्राणायाम का कोई भी महत्व नहीं रह जाएगा।
चंद्रभेदी प्राणायाम रामदेव | ChandraBhedi Pranayam By Baba Ramdev

चंद्रभेदी प्राणायाम करने में बहुत ही आसान होता है, लेकिन फिर भी यदि आपको यह करना समझ में नहीं आता है, तो इसका सबसे अच्छा उदाहरण आपको रामदेव बाबा से मिल सकता है। रामदेव बाबा ने यूट्यूब पर इसके बहुत सारे वीडियो डाल रखे हैं।

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इसके अलावा चंद्रभेदी प्राणायाम के लिए आप रामदेव बाबा के लाइव शो में भी हिस्सा ले सकते हैं। रामदेव बाबा के द्वारा चंद्रभेदी प्राणायाम को बहुत सारे लोगों की पहुंच मिली है।

चंद्रभेदी प्राणायाम शरीर को शीतलता प्रदान करता है, जिसके कारण पूरा शरीर स्वस्थ और तरोताजा रहता है।

FAQS
चंद्रभेदी प्राणायाम किस नाड़ी से किया जाता है?

चन्द्र भेदी प्राणायाम को बाईं नाक से ही किया जाता है। यदि आप दाईं नाक अथवा दोनों नथुनों से प्राणायाम का अभ्यास करेंगे तो चन्द्र भेदी के लाभ से वंचित रह जायेंगे।

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Final Words: उम्मीद है आप अपनी दिनचर्या में कुछ समय निकालकर चंद्रभेदी प्रणायाम का अनुभव अवश्य करना चाहेंगे। ध्यान रहे चंद्रभेदी एवं कपालभाति प्राणायाम न सिर्फ अभ्यास में भिन्न हैं बल्कि इनके परिणाम भी भिन्न होते हैं।

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