चंद्र नमस्कार कैसे करें तथा इसके लाभ। Chandra Namaskar in Hindi

सूर्य नमस्कार, शरीर में अग्नि तत्व का संतुलन करने तथा शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ाने में सहायक है। चंद्र नमस्कार Chandra Namaskar, शरीर में अग्नि तत्व का संतुलन करने तथा मन को शांत रखने में मदद करता है।

चंद्र नमस्कार की अपेक्षा सूर्य नमस्कार अत्यधिक प्रचलित है। जबकि सूर्य नमस्कार की ही भांति चंद्र नमस्कार भी अत्यंत महत्वपूर्ण क्रिया है।

Mystic Mind के इस आर्टिकल में चंद्र नमस्कार क्या है, चंद्र नमस्कार सूर्य नमस्कार से कैसे भिन्न है तथा चंद्र नमस्कार के क्या लाभ होते हैं, इत्यादि सवालों के जवाब देखेंगे।

शरीर में अत्यधिक ऊर्जा का होना अर्थात अग्नि तत्व का असंतुलन होना। परिणामस्वरूप अधिक गर्मी महसूस होना अथवा हाथ, पैर में जलन होना।

अक्सर लोग शरीर में होने वाले परिवर्तन पर इस नजर से नहीं देखते यही कारण है की बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। अपने स्वास्थ्य का बेहतर खयाल रखने के लिए आयुर्वेद तथा योग का संतुलन अत्यंत आवश्यक है।

चंद्रमा और सूर्य दोनों की ऊर्जा का शरीर पर अत्यंत प्रभावी असर होता है। सूर्य नमस्कार अधिक प्रचलित होने के कारण सूर्य नमस्कार करने की विधि सबको पता है। मात्र पूर्णिमा के दिन चंद्र नमस्कार का अभ्यास कई शारीरिक एवं मानसिक बीमारियों से राहत दे सकता है।

इससे पहले कि चंद्र नमस्कार से होने वाले लाभों के बारे में विस्तार से जाने आइए देखते हैं यह चंद्र नमस्कार क्या है?

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What is Chandra Namaskar in Hindi/चंद्र नमस्कार क्या है?

सूर्य नमस्कार की ही भांति चंद्र नमस्कार भी योगासनों का एक समूह है जो शरीर एवं मन में शांति के साथ शीतलता प्रदान करता है।

संस्कृत के दो शब्द चंद्र तथा नमस्कार से मिला चंद्र नमस्कार चंद्रमा की ऊर्जा को ग्रहण करने का एक सरल तरीका है।

अध्यात्म जगत में चंद्रमा का विशेष महत्व है। चंद्रमा मनुष्य के मन और शरीर को अत्यंत प्रभावित करता है क्योंकि मनुष्य शरीर में 70% से अधिक पानी है। चंद्रमा की स्थिति पानी पर सबसे अधिक प्रभाव डालती है।

यही कारण है कि ध्यानी लोग पूर्णिमा और अमावस्या के दिन विशेष चंद्रमा की पूजा तथा इसके लिए ध्यान करते हैं।

सूर्य नमस्कार सुबह सूर्योदय अथवा सूर्य की उपस्थिति में किया जाता है। सूर्य से ऊर्जा लेकर अपने संपूर्ण दिवस को ऊर्जावान बनाने के लिए यह अभ्यास किया जाता है।

चंद्र नमस्कार Chandra Namaskar चंद्रमा की उपस्थिति में अर्थात रात में अपने दिन भर की थकान को मिटाने के लिए तथा शरीर और मस्तिष्क को आराम देने के लिए किया जाता है।

चंद्र नमस्कार का अभ्यास शरीर से थकान मिटा कर मन को शांत कर रात्रि में अच्छी-अच्छी एवं गहरी नींद के लिए अत्यंत लाभदायक विधि है।

आइए देखते हैं चंद्र नमस्कार करने का सही तरीका क्या है?

How To Do Chandra Namaskar Yoga/ Chandra Namaskar Steps in Hindi

चंद्र नमस्कार की विधि को ध्यान से पढ़ें ताकि अभ्यास में किसी प्रकार की त्रुटि न हो। एक गलती से परिणाम विपरीत हो सकते हैं

#१ प्रणामासन

दोनों पैरों को एक साथ रखें तथा प्रार्थना की मुद्रा में बिल्कुल सीधे खड़े हो जाएं। आंखें बंद कर लंबी गहरी सांस लें तथा शरीर को ढीला छोड़ दें।

#२ हस्त उत्तानासन

सांस भीतर ले तथा दोनों हाथों को ऊपर उठाकर शिर्के बिल्कुल सीध में ले जाएं। धीरे-धीरे दोनों हाथों को पीछे की ओर ले जाते हुए पीठ पीछे की तरफ झुकाएं। ध्यान रहे कि संपूर्ण शरीर बिल्कुल सीधा होना चाहिए सिर्फ कमर के ऊपर का हिस्सा पीछे की तरफ थोड़ा सा झुका हुआ।

#३ उत्तासन

तीसरे चरण में सांस को बाहर छोड़ते हुए हाथ को आगे की ओर ले आए तथा धीरे-धीरे कमर से नीचे की तरफ झुकें। पैरों को बिल्कुल सीधा रखें और धीरे-धीरे नीचे झुकते हुए दोनों हथेलियों को पैरों के बगल में जमीन पर टिका दें।

#४ अश्व संचालन आसन

सांस अंदर ले तथा बाएं घुटने को मोड़ते हुए दाहिने पैर को पीछे की ओर लेकर जाएं। जितना संभव हो उतना पीछे ले जाएं। गर्दन से चेहरे को ऊपर की तरफ उठाएं शरीर का संतुलन बनाए रखें।

#५ अर्ध चंद्रासन

पूर्व अवस्था में शरीर को संतुलित कर सांस भीतर तथा दोनों हाथों को उठाते हुए सिर के ऊपर ले जाएं। अब धीरे-धीरे दोबारा पीठ के ऊपर का हिस्सा पीछे की ओर धकेलें। जितना संभव हो इतना पीछे जाए तथा रुक जाएं।

#६ पर्वतासन

अब धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ते हुए दोनों हाथों को सामने की तरफ से लाएं तथा वापस जमीन पर टिका दें। अब दोनों पैरों को पीछे की तरफ ले जाए तथा संपूर्ण शरीर को एक सीध में बनाए रखें।

जानें: पर्वतासन अभ्यास की सही विधि तथा इसके लाभ

#७ अष्टांग नमस्कार

सांस बाहर छोड़ें तथा दोनों पैरों के घुटने को जमीन पर दिखाएं। अब घुटने छाती और छुट्टी को एक-एक कर जमीन पर टिकाए बाकी शरीर के सभी हिस्सों को ऊपर उठाए रखिए। दोनों हथेलियों को सीने के दोनों बगल जमीन पर टिका दें।

#८ भुजंगासन

सांस भीतर ली तथा सीने से ऊपर का हिस्सा ऊपर उठाएं। शरीर का स्वरूप भुजंग टिफन जैसा दिखाई देने लगता है।

जानें: भुजंगासन कैसे करें तथा उसके लाभ

इसके आगे उपर्युक्त आसनों को दोहराते जाना है।

#९ पर्वतासन

उपर्युक्त विधि

#१० अश्व संचालन आसन

उपर्युक्त विधि

#११ अर्ध चंद्रासन

उपर्युक्त विधि

#१२ उत्तानासन

उपर्युक्त विधि

#१३ हस्त उत्तानासन

उपर्युक्त विधि

#१४ प्रणामासन

उपर्युक्त विधि

इस प्रकार चंद्र नमस्कार का एक चक्र पूरा हुआ।

Chandra Namaskar Mantra

Chandra Namaskar benefits in Hindi/ चंद्र नमस्कार के लाभ

चंद्र नमस्कार के अभ्यास से कई ऐसे लाभ होते हैं जिनके बारे में लोग अभी भी अनजान है। आइए देखते हैं कि इसके अभ्यास से क्या-क्या शारीरिक मानसिक एवं भावनात्मक लाभ होते हैं।

#१ चंद्र नमस्कार Chandra Namaskar भी सूर्य नमस्कार की तरह अपने आप में एक संपूर्ण व्यायाम है जिसके अभ्यास से शरीर की ऊर्जा संतुलित होती हैं थकान दूर होती है मन शांत होता है तथा शारीरिक व्याधियों दूर होती हैं।

#२ रीड की हड्डी अर्थात उर्जा प्रवाह की सबसे मूर्ख सोर्स और पिंगला स्वच्छ होती हैं तथा शरीर में किसी भी प्रकार का अवरोध दूर होता है।

#३ चंद्र नमस्कार के नियमित अभ्यास से हाथ पैर कमर एवं संपूर्ण शरीर की हड्डियों एवं मांसपेशियों में सुधार आता है।

#४ दशैन प्रवृत्ति के लोगों के लिए चंद्र नमस्कार रामबाण जैसा काम करता है क्योंकि चंद्रमा की ऊर्जा जब शरीर में प्रवेश करती है तो मस्तिष्क को शांत करती हैं जिसका असर होता है कि व्यक्ति का गुस्सैल स्वभाव धीरे-धीरे शांत स्वभाव में बदल जाता है।

#५ चंद्र नमस्कार Chandra Namaskar के नियमित अभ्यास से शरीर में एकत्रित नकारात्मक ऊर्जा तथा अतिरिक्त वसा दूर होती है जिससे शरीर लचीला एवं मजबूत बनता है।

#६ चंद्र नमस्कार का अभ्यास मुख्यता रात्रि के समय किया जाता है। जिसके फलस्वरूप शरीर से थकान दूर होती है तथा निद्रा आसानी से आती है। दूसरे शब्दों में कहें तो योग निद्रा जैसी निद्रा चंद्र नमस्कार का अभ्यास भी देता है।

#७ चंद्र नमस्कार/Chandra Namaskar के अभ्यास से शरीर में पांच तत्वों का संतुलन होता है तथा सभी चक्र सुचारू रूप से काम करते हैं। फलस्वरूप लंबे समय से चली आ रही किसी भी बीमारी को ठीक होने में मदद मिलती है।

#८ चंद्र नमस्कार विशेष रूप से निचले शारीरिक चक्र अर्थात अनाहत चक्र के नीचे के चक्रों पर अधिक प्रभाव डालता है। फलस्वरूप शारीरिक एवं वैश्विक जीवन में सुधार आता है तथा मनुष्य की ऊर्जा को एक रचनात्मक और सही दिशा मिलती है।

#९ चंद्र नमस्कार का अभ्यास रात्रि भोजन के 3 से 4 घंटे बाद किया जाता है। और अभ्यास के बाद भी शरीर सारी रात आराम की स्थिति में होता है। परिणाम स्वरूप पाचन तंत्र सुदृढ़ बनता एवं सुचारु रुप से काम करता है। पेट संबंधी बीमारियों में लाभ मिलता है।

When to Do Chandra Namaskar Yoga?/ चंद्र नमस्कार करने का सही समय

चंद्र नमस्कार करने का सही समय रात्रि भोजन कि 3 से 4 घंटे बाद का है। विशेष रुप से ध्यान रहे कि चंद्रमा की रोशनी में किया गया चंद्र नमस्कार का अभ्यास अधिक लाभ देता है।

सूर्य नमस्कार एवं चंद्र नमस्कार में अंतर/ Chandra Namaskar vs Surya Namaskar

#१ सूर्य नमस्कार नमस्कार मनुष्य के शरीर के बाहर रूप को प्रभावित करता है जैसे कि शरीर में गर्मी उत्पन्न करना संसार को प्रकाश देना इत्यादि। जबकि चंद्र नमस्कार मनुष्य को अपने अंदर की तरफ ले जाता है अर्थात उनको शीतलता प्रदान करता है मन को शांति देता है तथा ध्यान के अभ्यास में मदद करता है।

#२ सुधार एवं चंद्र नमस्कार/Chandra Namaskar का सबसे महत्वपूर्ण अंतर है कि सूर्य नमस्कार सुबह किया जाता है जब दिन की शुरुआत होती हैं। और चंद्र नमस्कार तब किया जाता है जब दिन का अंत होता है।

#३ सूर्य नमस्कार शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ाता है जिससे मनुष्य दिन भर के कामों के लिए खुद को अधिक ऊर्जावान महसूस करता है। जबकि चंद्र नमस्कार शरीर को शिथिल बनाता है मन को शांत करता है तथा रात्रि मित्रों के लिए शरीर को तैयार करता है।

#४ सूर्य नमस्कार का अभ्यास करते वक्त आसनों को जल्दी-जल्दी बदला जाता है जबकि चंद्र नमस्कार Chandra Namaskar का अभ्यास धीरे-धीरे किया जाता है।

#५ सूर्य नमस्कार की 12 स्टेप्स 12 राशियों से संबंधित हैं। इसका अभ्यास करने से भिन्न भिन्न राशियों पर अलग प्रभाव पड़ता है। जबकि चंद्र नमस्कार मनुष्य के मन को प्रभावित करता है इसलिए इसके 14 चरण हैं जो चंद्रमा के 14 दिनों के आकार से संबंध रखते हैं।

#६ सूर्य नमस्कार से शरीर को ऊर्जा प्रदान कर उसे गतिशील बनाता है जबकि चंद्र नमस्कार मन को शांत कर मनुष्य को रचनात्मक बनाता है।

नोट: दिखने में यह दोनों क्रिया अलग है तथा इनका प्रभाव भी अलग-अलग है। यह दोनों आसन अलग होते हुए भी मनुष्य के शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि शरीर में सूर्य तथा चंद्रमा दोनों की ऊर्जा का संतुलन करते हैं।

FAQS

#1 चंद्र नमस्कार में कितनी स्थिति होती है?

चंद्र नमस्कार/Chandra Namaskar में 14 स्थिति होती है।

FINAL WORDS: उम्मीद है चंद्र नमस्कार/Chandra Namaskar का अभ्यास कर आप अपनी अनेकों परेशानियों से मुक्ति पा लेंगे। अन्य किसी भी सवाल का जवाब पाने के लिए आप हमसे ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं।

सबका भला हो

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