Balayam Yoga in Hindi: बालायाम योग के 9 अद्भुत लाभ एवं खतरे

Balayam Yoga दोनों हाथों को आपस में रगड़ते हुए तो लोगों को अवश्य ही आपने देखा होगा। अक्सर लोग इस क्रिया को बालों को काला करने, लंबा करने अथवा घना करने के लिए दोहराते हैं। अंग्रेजी में जानी जाने वाली यह Nail Rubbing प्रक्रिया प्राचीन भारत के आयुर्वेद जगत की अद्भुत खोज है।

प्राचीन गुरुओं द्वारा संशोधित की गई छोटी से छोटी क्रिया हमारे मन, मस्तिष्क तथा शरीर पर विशेष प्रभाव करती है। नेल रबिंग प्रक्रिया अथवा बालासन सिर्फ़ बालों को लंबा, घना अथवा दोबारा उगाने की प्रक्रिया ही नहीं बल्कि इससे गहरा विज्ञान इसमें छिपा है।

आज के इस आर्टिकल में हम बालायाम योग  के सभी गूढ़ रहस्यों को आपके सामने उजागर करेंगे। उम्मीद है इस आसान सी मुद्रा के अद्भुत लाभ जान जाने के बाद आप भी इसका लाभ उठाना चाहेंगे।

सबसे पहले जानते हैं कि बालायाम Balayam Yoga क्या है तथा इसकी उत्पत्ति का कारण क्या है?

What is Balayam in Hindi

शाब्दिक अर्थ में लिया जाए तो बालायाम संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है, बाल+ व्यायाम। इस प्रकार शाब्दिक रूप से बालों के लिए किया गया व्यायाम ही बालायाम योग कहलाता है।

अक्सर हम देखते हैं कि उम्र के साथ बालों का झड़ना अथवा उनका रूखापन आम बात हो जाती है। बड़े अफसोस की बात यह है कि आजकल छोटी उम्र के लोगों को भी इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

५- २० साल में ही बाल प्राकृतिक रूप से सफ़ेद होने लगे हैं। प्राचीन समय में जब योगियों ने देखा कि समय परिवर्तन के साथ मानसिक बीमारियां अथवा मानसिक तनाव बढ़ता ही जाएगा तो उन्होंने योग आसनों तथा मुद्राओं का शोध किया।

मुख्य बात यह है कि मस्तिष्क का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सिर ही है, और सबसे पहले वही भाग प्रभावित होता है। इसका कारण है कि सिर के ऊपरी हिस्से पर किसी भी प्रकार की शारीरिक हलचल नहीं होती है। जिसके कारण रक्त संचार अन्य हिस्सों में मुकाबले वहां कम होता है।

बालायाम योग Balayam Yoga का प्रयोग कर उस हिस्से में भी रक्त संचार बढ़ाया जाता है। दूसरे शब्दों में कहूं तो जिस प्रकार शारीरिक व्यायाम उस हिस्से के बाह्य तथा अंदरूनी दोनों हिस्सों को प्रभावित करता है, उसी प्रकार बालायाम योग बालों की जड़ों को प्रभावित करता है।

Prasana Mudra And Balayam Yoga

किसी भी क्रिया को जब विधिवत किया जाता है तो वह मात्र एक प्रक्रिया नहीं बल्कि यौगिक क्रिया के रूप में परिवर्तित होकर विशेष लाभ देती है। बालायाम योग प्राचीन यौगिक क्रियाओं में प्रसन्न मुद्रा के नाम से भी जाना जाता है।

पाश्चात्य देशों में प्रसन्न मुद्रा HairDo Asana अर्थात हेयरडू आसन के नाम प्रचलित है। चलिए, अब देखते हैं कि बालायाम योग का अभ्यास करने की सही प्रक्रिया क्या है।

How to Do Balayam Yoga in Hindi

अक्सर हमने सुना है कि बहुत सारे लोगों की शिकायत होती है कि आसनों अथवा मुद्राओं से उतना लाभ नहीं मिलता। इसका मुख्य कारण है, अभ्यास का सही तरीके से ना होना। इसलिए किसी भी योगा, आसन अथवा मुद्रा का अभ्यास करने के लिए नियमों का पालन अति आवश्यक है।

१- बालायाम Balayam Yoga के अभ्यास के लिए योगा मैट पर सुखासन अथवा वज्रासन में बैठ जाएं। महत्वपूर्ण यह है कि आप आरामदायक आसन का चुनाव करें।

२- ध्यान को वर्तमान में लाने तथा शरीर को आरादायक स्थित में लाने के लिए सांसों पर ध्यान दें।

३- लंबी गहरी सांस लेकर अंदर रोकें रखें, जितनी देर संभव हो, रोक कर रखें फिर एकलय में सांसों को मुख द्वारा बाहर छोड़ें। इसी प्रकार पांच से दस चक्र सांसों का अभ्यास करें।

४- सांसों के इस अभ्यास प्रक्रिया से ना सिर्फ़ आपका मन बल्कि शरीर एवं औरा भी स्वच्छ होकर यौगिक क्रिया के लिए तैयार हो जाता है।

४- दोनों हाथों को घुटने से मोड़कर हृदय चक्र के सामने लाएं तथा हथेलियों से अर्ध मुट्ठी बनाएं।

५- दोनों हथेलियों की चार उंगलियों को नाखूनों के टिप अर्थात पोरों से मिलाकर रगड़ना शुरू करें तथा कम से कम एक मिनट तक करें

Note: ध्यान रहे सिर्फ़ अंगूठा इस उंगलियों से दूर होना चाहिए।

६- अब दाहिने हाथ के नाखूनों की जड़ों पर बाएं हाथ के पोरों से रगड़ना शुरू करें। इसे टिप टू रूट तथा रूट टू टिप दो तरह से किया जाता है।

टिप तथा रूट को समझने के लिए चित्र का सहारा लें।

Balayam Yoga Images

७- अब एक मिनट के बाद बाएं हाथ के नाखूनों रूट अर्थात जड़ों पर दाहिने हाथ के टिप अर्थात पोरों से रगड़ना शुरू करें। इस प्रकार तीन चरण में तथा तीन मिनट में बालायाम योग का एक चक्र पूरा होता है।

८ – घर्षण के दौरान नाखूनों से लेकर हाथ, सिर अथवा सम्पूर्ण शरीर में किस किस स्थान पर किसी भी प्रकार का बदलाव महसूस होता है उसपर विशेष ध्यान दें।

९- समय के साथ रगड़ने का समय बढ़ाते जाएं, ९ से १२ मिनट तक इस मुद्रा का अभ्यास किया जा सकता है।

बालायाम करने का सही समय

सही तरीके तथा सही समय पर किया गया व्यायाम अथवा यौगिक क्रिया सम्पूर्ण लाभ देती है।

अन्य यौगिक क्रियाओं जैसे कि योगासनों अथवा ध्यान मुद्रा का सही समय सुबह सूर्यास्त के पहले का है, यदि बालायाम योग का अभ्यास भी उनके साथ किया जाए तो अत्यंत फलदाई है।

सुबह का समय तथा खाली पेट शरीर पर आसन तथा मुद्राओं का सबसे ज्यादा महत्व होता है। फिर भी, यदि सुबह संभव ना हो तो शाम को छह से सात के बीच भी किया जा सकता है।

Benefits of Balayam Yoga बालायाम के लाभ

बालायाम योग के फ़ायदे सिर्फ़ बालों को ही नहीं बल्कि कई अन्य लाभ भी होते हैं।

Balayam Yoga/ Hairs Images

१- बालायाम योग Balayam Yoga के नियमित अभ्यास करने से नाखूनों के घर्षण से उत्पन्न ऊर्जा के फलस्वरूप मस्तिष्क में रक्त प्रवाह सुचारू रूप से होने लगता है।

२- बालों की जड़ों में रक्त प्रवाह तथा ऊर्जा का सुचारू प्रवाह के प्रभाव में बालों को ज़रूरत के हिसाब से प खनिज तत्व मिलने लगते हैं।

३- बालों का गिरना, सफ़ेद होना अथवा कमज़ोर होना रुक जाता है तथा बल मजबूत एवं चमकदार बनते हैं।

४- बालों से रूसी अथवा अतिरिक्त तेल का प्रवाह रुक जाता है जिसकी वजह से बाल दोबारा स्वस्थ होने लगते हैं।

५- बालायाम योग Balayam Yoga एक्युप्रेशर के जैसा काम करता है तथा उंगलियों के पोर शरीर के कई अंगों जैसे कि आंखों से मिले होते हैं। इनके सक्रिय होने से शरीर के उन अंगों का स्वास्थ्य भी अच्छा होने लगता है।

६- बालायाम योग से मस्तिष्क की अन्य कोशिकाओं पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है तथा वह बेहतर तरीके से काम करने लगता है।

७- चिंता, तनाव तथा रक्त कोशिकाओं के सुचारू संचार के परिणामस्वरूप शरीर पहले ले बेहतर तथा मन पहले से अधिक स्वस्थ होने लगता है।

८- नाखूनों का पेट का साथ गहरा संबंध है, इसलिए बालायाम योग का अभ्यास पाचन तंत्र को भी सहयोग देता है।

९- रक्त संचार बढ़ने से त्वचा अधिक चमकदार बनती है तथा चेहरे को रंगत में भी निखार आने लगता है।

Balayam Yoga Results Time In Hindi

अक्सर बालायाम का निरंतर तथा उचित समय पर सही मात्रा में अभ्यास करने के बाद ३-४ महीने में परिणाम देखने के लिए मिलता है।

यदि बालायाम के साथ कुछ और मुद्राएं जैसे कि शीर्षासन, कपालभाति अथवा नदिशोधन का अभ्यास करें तो परिणाम और भी बेहतर होते हैं।

Balayam Yoga Results in Hindi

संपूर्ण तथा मनचाहा परिणाम पाने के लिए हफ़्ते में एक बार बालों में नारियल अथवा आंवले के तेल से मालिश करें।

इसके अलावा आप किसी अन्य आयुर्वेदिक तेल का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। अतिरिक्त स्पा अथवा अन्य तरीके से रखा गया खयाल अतिरिक्त लाभ देगा तथा आपके बाल पहले से बेहतर होने लगेंगे।

किसे बालायम योग नहीं करना चाहिए

प्रत्येक योगासन अथवा मुद्राओं को किसी विशेष अवस्था में वर्जित किया है वरना इसके उल्टे परिणाम होने लगते हैं। बालायाम Balayam Yoga किन स्वरूपों में तथा किसे नहीं करना चाहिए ये जानना अति आवश्यक है।

१- गर्भवती महिलाएं जिनका गर्भकाल दो महीने से अधिक हो गया है, बालायाम योग का अभ्यास ना करें क्योंकि गर्भाशय पर इसका विपरीत परिणाम हो सकता है।

२- उच्च रक्तचाप अर्थात हाई ब्लड प्रेशर के बीमार Balayam Yoga बालायाम का अभ्यास ना करें, इससे रक्तचाप बढ़ने की उम्मीद बनी रहती है।

३- उंगलियों में किसी भी प्रकार की चोट अथवा संक्रमण की अवस्था में इस योग का अभ्यास न करें अन्यथा परिस्थिति अधिक खराब हो सकती है।

४- किसी भी प्रकार की सर्जरी अथवा आप्रेशन के काम से कम छह महीने के बाद बालायाम Balayam Yoga का अभ्यास शुरू करें।

Side effects of Balayam Yoga

योग प्राणायम की सबसे अच्छी बात यह है कि इन क्रियाओं के कोई साइड इफेक्ट अथवा उल्टे परिणाम नहीं होते हैं। आपको सिर्फ इतना ध्यान रखना है कि अभ्यास सही तरीके से करना है।

फिर भी कुछ बातें ध्यान में रखें।

१- नाखूनों के घर्षण के समय दोनों हाथों का प्रयोग करें, कहा जाता है कि एक हाथ के प्रयोग से चेहरे पर भी बाल आने लगते हैं।

२- हाथों की सिर्फ़ उंगलियों का प्रयोग करें अंगूठे का नहीं करें। कहते हैं कि अंगूठे का प्रयोग करने से कानों में बालों की बढ़ोत्तरी होने लगती है।

Final Words: इस प्रकार देखा जाए तो Balayam Yoga बालायाम योग बालों के साथ त्वचा तथा आंखों के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है। उम्मीद है आज से ही आपके योगाभ्यास में दस मिनट के लिए बालायाम का अभ्यास जुड़ जाएगा।

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भवतु सब्बै मंगलम !

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