Atiganda Yoga in Hindi। अतिगण्ड योग शांति के 9 सरल एवं असरदार उपाय

क्या आपको लगता है कि धन संपदा, सुख वैभव होते हुए भी जीवन में शांति नहीं है? कुछ है जो परिस्थितियों को कठिन बना रहा है? या लाख कोशिशों के बावजूद आपका अपने गुस्से अथवा नकारात्मक विचारों पर काबू नहीं होता? हो सकता है आपकी कुंडली में Atiganda Yoga/अतिगण्ड योग  बना है जो आपके जीवन को प्रभावित कर रहा है।

जन्म के समय ग्रहों की दशा मनुष्य के जीवन को अत्यंत प्रभावित करती है। यदि ग्रहों की दशा से राजयोग बना तो जीवन सुखद किंतु दरिद्र योग अथवा Atiganda Yoga/ अतिगण्ड योग बना तो जीवन अत्यंत कष्टदाई हो जाता है।

अच्छी बात यह है कि जन्म के समय ग्रहों का योग पूर्व जन्मों के आधार पर बनता है। यदि गंदा योग है, तो उसके प्रभाव को कम करने के लिए इस जन्म में अवसर ही है।

Mystic Mind के इस आर्टिकल में कुंडली में Atiganda Yoga/ अतिगण्ड योग का अर्थ, इसका प्रभाव और इसके प्रभाव को कम करने के तरीके साझा करेंगे।

अतिगण्ड योग का जीवन पर प्रभाव कैसे पड़ता है तथा इसका निवारण क्या है? यह जानने से पहले जानते हैं कि अतिगण्ड योग क्या है? उससे पहले जानते हैं कि इसका अर्थ क्या है?

Atiganda Yoga Meaning in Hindi/ Atiganda in Astrology

यदि इस योग का शाब्दिक अर्थ देखा जाए तो एक होता है बुरा तथा दूसरा होता है अत्यंत बुरा। इस प्रकार अतिगण्ड योग अत्यंत ही अशुभ योग है जो जीवन को अंदर से खोखला करता है।

किंतु डरने की कोई बात नहीं है, है समस्या का समाधान भी होता है। इसलिए आगे आपको इसके प्रभाव से बचने के आसन तरीके भी पता चलेंगे।

आइए, कुंडली में बने Atiganda Yoga/ अतिगण्ड योग के बारे में थोड़ा विस्तार से देखते हैं।

What is Atiganda Yoga in Hindi

हिंदू ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुल २७ योग बनते हैं जिनमें कुछ शुभ, कुछ अशुभ तथा कुछ अत्यंत अशुभ ग्रह होते हैं।

अतिगण्ड योग/Atiganda Yoga अत्यंत अशुभ, कष्टदाई योग है पारिवारिक मर्यादा को क्षति पहुंचाने वाला योग माना जाता है।

अतिगण्ड निचले क्रम के सात पुरुष योगों में से छठा योग है। यह योग चंद्र शासित योग है जिसके प्रभाव से जीवन में बहुत सारी समस्याएं आती हैं।

Also Read:

Atiganda Yoga Effect/ अतिगण्ड योग में जन्में लोग कैसे होते हैं?

अतिगण्ड योग में जन्म व्यक्ति वैश्विक संपत्ति में धनी होने के साथ आक्रामक स्वभाव का हो सकता है। अभिमानी होने के साथ आस्तिक होने का पाखंड करता है।

ऐसा व्यक्ति अपने अभिमानी, और उग्र स्वभाव के वशीभूत होकर अपने परिवार की मान मर्यादा को सर्वाधिक नुकसान पंहुचाता है।

अतिगंड योग/Atiganda Yoga में जन्मे व्यक्ति के इस योग का प्रभाव उसकी मां को सर्वाधिक होता है क्योंकि वह व्यक्ति मां को भी परेशान करता है।

जुबान और भाषा पर नियंत्रण न होने के कारण उसे गले अथवा मुंह संबंधी बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।

प्रत्येग योग की प्रथम एवं अंतिम अवस्था होती है। अतिगण्ड योग के अंतिम चरण के प्रभाव में व्यक्ति किसी की जान के लिए भी अहितकर हो सकता है।

ऐसी मानसिक अवस्था को शांत करने तथा इस योग के प्रभाव को कम करने के लिए निम्न में से किसी एक उपाय को नियमित रूप से करें।

Atiganda Yoga Remedies/अतिगण्ड योग शांति के उपाय

गंडात योग में जन्में शिशु का चेहरा पिता ने इस योग की शांति कराने के बाद ही देखना चाहिए। अपने आस पास की अच्छे ज्योतिष से सलाह परामर्श लेकर इस योग की शांति कराएं।

यदि आप वयस्क हैं तो निम्न उपायों को कर इस योग के प्रभाव से बच सकते हैं।

#१ अमावस्या एवं पूर्णिमा के दिन निराजल उपवास रखें तथा गंड योग देवता चन्द्रमा की विशेष पूजा करें।

#२ नियमित धूप दीप के साथ गणेश पूजा कर गणेश वंदना के साथ दिन की शुरुआत करें।

#३ सोमवार को व्रत रखें तथ शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। चंद्र के नकारात्मक प्रभावों को काटने का सर्वोत्तम उपाय भगवान शिव की पूजा एवं ओम नमः शिवाय का जाप करना है।

#४ महीने में कम से कम एक शनिवार संकटमोचन हनुमान जी के मंदिर जाकर उनके दर्शन करें। नियमित हनुमान चालीसा का पाठ भी नकारात्मक योग के प्रभाव को कम करता है।

#५ गरीबों को भोजन के साथ सफ़ेद कपड़ों का गुप्त दान करने से Atiganda Yoga/ अतिगण्ड योग का प्रभाव कम होने लगता है।

#६ नियमित रूप से कम से कम पंद्रह मिनट ध्यान करें तथा ध्यान में चंद्रमा से अपनी गलतियों के लिए माफ़ी मांगे तथा अपने आप को माफ़ करें।

#७ गण्ड तिथि में बैल का दान, गण्ड नक्षत्र में गाय का दान तथा गण्ड लग्न में सोने का दान करने से भी इस योग के नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है।

#८ आपके आस पास की प्रत्येक स्त्री को सम्मान दें तथा उन्हें पवित्र नज़रों से देखें। विशेषकर अपनी माता का सम्मान करें, उन्हें किसी भी प्रकार का कष्ट न दें। माता को खुश रखना अर्थात जीवन में खुशियों एवं सुख शांति को निमंत्रण देना है।

#९ सबसे महत्वपूर्ण, दूसरों को क्षमा करना सीखें। रात्रि सोने से पहले दो मिनट के लिए आंखें बंद करें। जिनकी भी वजह से आपका मन, दुखी अथवा अशांत हो, उन्हें मन ही मन माफ़ कर सोने जाएं।

याद रखें माफ़ करने वाले से अधिक शक्तिशाली कोई नहीं होता।

नोट: उपर्युक्त उपायों में से २, ८ और ९ का नियमित अभ्यास करना आवश्यक है। इसके अलावा को एक उपाय को अपनाकर इस योग/Atiganda Yoga के सारे नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकते हैं।

Related: व्यतिपात योग शांतिपूजा

Final Words: ग्रहों की दशा मनुष्य के जीवन को प्रभावित करती है, इसमें कोई शक नहीं है। जैसा कि हर ताले की चाबी होती है, इसलिए ग्रहों के प्रभाव को कम करने के उपाय भी हैं।

उम्मीद है उपर्युक्त उपायों को अपना कर आप Atiganda Yoga के प्रभाव को अवश्य कम कर पाएंगे।

सबका भला हो

Advertisement

Leave a Reply

%d bloggers like this: