Ashvini Mudra in Hindi: अश्विनी मुद्रा सावधानियाँ तथा 5 लाभ

Ashvini Mudra/ Ashwini Mudra in Hindi अंग्रेजी में एक कहावत है,“God Never Create Garbage” जिसका अर्थ है – ईश्वर कचरे की रचना कभी नहीं करता है।

इस पृथ्वी ग्रह पर जितने भी जीव जंतु तथा पेड़ पौधे हैं, किसी न किसी रुप में एक दूसरे से जुड़े हैं। किसी ना किसी प्रकार एक दूसरे की मदद करते रहते हैं।

इन्हीं में से एक जानवर है घोड़ा! प्राचीन काल में यातायात के लिए घोड़ों का प्रयोग किया जाता था। बदलते समय के साथ जीवन को गतिवान बनाने के लिए वाहनों के इंजिन की गति को आज भी हॉर्स पावर अर्थात घोड़े की गति से मापा जाता है।

क्या आपको पता है कि घोड़े की इस अद्भुत गति का राज़ क्या है? मनुष्य जीवन को घोड़ों की तरह फुर्तीला, गतिवान तथा तेजस्वी बनाने के लिए प्राचीन गुरुओं ने उनका राज़ ढूंढा। उसी राज़ को अश्विनी मुद्रा के नाम से जाना जाता है।

आज हम Ashvini Mudra से अपने जीवन को किस प्रकार नई दिशा तथा गति दी जा सकती है, उसके बारे में विस्तार से जानेंगे।

What is Ashwini Mudra अश्विनी मुद्रा क्या है

मुद्राओं में कम प्रचलित किन्तु अत्यधिक प्रभावी Yoga ki Ashwini Mudra है। इस मुद्रा का अर्थ इसके नाम में ही छिपा है। अश्व अर्थात घोड़ा, सरल शब्दों में कहूं तो अश्व के समान क्रिया करना।

यदि आप गौर करेंगे तो पाएंगे कि घोड़े मल त्याग करने के पश्चात मल द्वार को बार बार संकुचित करते हैं। मल द्वार को अंदर सिकोड़ना तथा फिर सामान्य करने की इसी क्रिया में उनकी ताकत का राज़ छिपा है।
इसी प्रक्रिया को सही समय तथा विधि से करना Ashvini Mudra अश्विनी मुद्रा कहलाती है।

How To Do Ashwini Mudra Yoga in Hindi

Ashwini Mudra Yoga Images


यह प्रक्रिया अत्यंत आसान है किन्तु जब ध्यानपूर्वक किसी भी क्रिया को किया जाता है तो उसके लाभ कई गुना बढ़ जाते हैं।

Ashwini Mudra Posture/ Ashvini Mudra Steps

इस मुद्रा के अभ्यास के लिए दो प्रचलित विधियां हैं, आपको जो सही तथा आरामदायक लगे उसका प्रयोग कर सकते हैं।

१- ज़मीन पर आसान बिछाकर सुखासन अथवा पद्मासन की अवस्था में पूर्व अथवा उत्तर दिशा में मुंह करके बैठ जाएं। ५- १० बार नाड़ी शोधन प्राणायाम करें। इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए नीचे लिंक पर जाएं

नाड़ी शोधन प्राणायाम की विधि तथा इसके लाभ

अब ध्यान को सांसों पर लाएं तथा सम्पूर्ण शांत होने दें। लंबी गहरी सांस लें, सांस को अंदर रोकें तथा ध्यान को मलद्वार अथवा गुदा के पास ले जाएं। गुदा द्वार को अंदर की तरफ़ खींचे तथा बाहर छोड़ दें, कम से कम ७-८ बार गुदा द्वार को सिकोड़ने के बाद सांस बाहर छोड़ें।

दो से तीन सांस लेकर स्वयं को सामान्य करें, फिर सांस भीतर लेकर गुदा द्वार को संकुचित कर अश्विनी मुद्रा का अभ्यास करें।

२- अश्विनी मुद्रा का अभ्यास करने की दूसरी विधि अत्यंत सरल है। कागसन में बैठ जाएं अर्थात जिस प्रकार से मल विसर्जन के लिए बैठते हैं, उस प्रकार बैठें।

ध्यान को मलद्वार पर ले जाएं तथा उसे अंदर की तरफ़ सिकोड़ें। इसी अवस्था में जितनी देर रुक सकते हैं, रुकें फिर सामान्य हो जाएं। फिर दोबारा गुदा द्वार को अंदर लें तथा जितनी देर रोककर रख सकते हैं, रखें।
जितनी अधिक देर तक इस मुद्रा का अभ्यास कर सकते हैं, अवश्य करें। दोनों ही विधि अच्छे परिणाम देती है।

Ashwini Mudra Baba Ramdev ने भी इस मुद्रा को अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्रा बताते हुए कुछ बीमारियों की अवस्था में करने की सलाह दी है।

Ashwini Mudra Benefits in Hindi/ Ashwini Mudra Ke Fayde

अश्विनी मुद्रा के लाभ

अश्विनी मुद्रा एक अत्यंत लाभकारी मुद्रा मानी जाती है क्योंकि इस मुद्रा के अभ्यास से कई ऐसी बीमारियों में लाभ होता है जिसे बताने में लोग संकोच करते हैं।

१- अश्विनी मुद्रा के अभ्यास से गुदा द्वार सम्बन्धी बीमारियां जैसे कि बवासीर, तथा भगंदर आदि ठीक होती हैं। हर्निया के रोगियों के लिए भी यह मुद्रा रामबाण के समान काम करती है।

२- Ashvini Mudra अश्विनी मुद्रा के अभ्यास से स्त्रियों में प्रसव के बाद बार बार पेशाब आने की समस्या तथा कब्ज़ से निजात मिलता है।

३- अश्विनी मुद्रा पुरुषों की नपुंसकता दूर करने तथा शीघ्र पतन जैसी समस्या को दूर करने में सहायक है।

४- अश्विनी मुद्रा पेट के नीचे के सभी अंगों जैसे कि गर्भाशय , मल द्वार, मूत्र द्वार आदि के स्वास्थ्य में अधिक सहायक है।

५- इस मुद्रा के निरंतर अभ्यास से शरीर अधिक बलशाली, ऊर्जावान तथा जवान बना रहता है।

Spiritual Benefits of Ashvini Mudra अश्विनी मुद्रा के आध्यात्मिक लाभ

प्रथम चक्र अर्थात मूलाधार चक्र गुदा के पास ही स्थित है जिसमें कुण्डलिनी शक्ति सुप्त अवस्था में वास करती है। मूलाधार चक्र के बारे में विस्तार से जानने के लिए नीचे लिंक पर जाएं

मूलाधार चक्र कैसे जगाएं तथा उसके अद्भुत लाभ

अश्विनी मुद्रा के प्रतिदिन अभ्यास करने से मूलाधार चक्र सक्रिय होने लगता है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो अश्विनी मुद्रा कुण्डलिनी शक्ति जागने में भी मदद करती है। चक्रों का संतुलित रहना भी अत्यंत आवश्यक है इसलिए कुण्डलिनी शक्ति के बारे में ज़रूर पढ़े।

कुंडलिनी जागरण तथा उसके लाभ

Ashwini Mudra Side Effects in Hindi

जैसा कि हम सभी जानते हैं, हर चीज़ के फायदे और नुकसान होते हैं। कुछ अवस्था में अश्विनी मुद्रा का अभ्यास करने से परिणाम नुकसानदायक हो सकते हैं।

१- यदि आप किसी भी मल द्वार अथवा मूत्र द्वार के बीमारी से पीड़ित हैं तो किसी योग्य शिक्षक की सलाह से ही इस मुद्रा का अभ्यास करें।

२- स्त्रियां मासिक चक्र के दौरान Ashvini Mudra का अभ्यास न करें।

३- कुण्डलिनी चक्रों का कम चलना तथा अधिक चलना दोनों ही हाल में नकारात्मक परिणाम होते हैं। चूंकि यह मुद्रा प्रथम चक्र को तेज़ी से प्रभावित करती है इसलिए मूलाधार चक्र के बारे में अवश्य जानें। ताकि आपको आभास रहे को चक्र संतुलित है।

४- गर्भावस्था की स्थिति में Ashvini Mudra अश्विनी मुद्रा का अभ्यास पूर्ण रूप से वर्जित है।

Ashvini Mudra Precautions/ अश्विनी मुद्रा अभ्यास में सावधानियां

१- इस मुद्रा के पहले ध्यान दें कि आपका पेट खाली हो अर्थात मल – मूत्र त्याग करने के पश्चात ही इसका अभ्यास करें।

२- पेट खाली होने के बावजूद भी यदि मुद्रा के अभ्यास के दौरान मल अथवा मूत्र का आभास हो तो रुके नहीं, बल्कि Ashvini Mudra अभ्यास करें।

३- गुदा द्वार पर गंभीर बीमारी की अवस्था में एक बार डॉक्टर से अवश्य सलाह लें।

Ashwini Mudra Yoga for Piles

अश्विनी मुद्रा का अभ्यास पेट तथा पेट के निचले हिस्से की मांस पेशियों को प्रभावित करती है। पाचन तंत्र, गर्भाशय, मलाशय तथा गुदा द्वार की मांस पेशियों को मजबूत करती है।

परिणामस्वरूप कब्ज़ तथा बवासीर ठीक करने के लिए अश्विनी मुद्रा यौगिक तथा अत्यंत प्रभावी तरीका है।

Ashwini Mudra Yoga for regular periods

स्त्रियों अथवा लड़कियों में अक्सर मासिक धर्म के दौरान दर्द की समस्या देखने के लिए मिलती है। मासिक चक्र का असंतुलन तथा, तेज़ अथवा कम प्रवाह, पेट अथवा पीठ में दर्द, चक्कर आना उल्टी मिचली आदि समस्याओं में अश्विनी मुद्रा लाभदायक है।

Ashvini Mudra अश्विनी मुद्रा के नियमित अभ्यास से गर्भाशय संबधी समस्याएं दूर होने के साथ तनाव भी कम होता है। फलस्वरूप मासिक धर्म समय पर तथा सामान्य हो जाता है।

Final Words: Ashvini Mudra के अभ्यास से कई घातक बीमारियों से सुरक्षित रहना आसान है। उम्मीद है आपको यह लेख मदद करेगा। यदि आर्टिकल अच्छा लगे तो दूसरों के साथ साझा कर उन्हें भी निरोगी जीवन का मार्ग दिखाएं।

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