अग्निसार प्राणायाम के 8 लाभ | Agnisar Pranayama Benefits in Hindi

अग्निसार प्राणायाम के 8 लाभ | Agnisar Pranayama Benefits in Hindi

Agnisar Pranayama in Hindi | Agnisar Pranayama Benefits in Hindi | Agnisar Kriya Side Effects in Hindi | Agnisar Pranayama Precautions

नमस्कार पाठकों, कहते हैं कि मानव शरीर में किसी भी बीमारी का आगमन उसके पेट से होता है। दूसरे शब्दों में कहें तो हमारा खान पान हमारे पेट को प्रभावित करता है।

यदि हम अपना खान-पान सही तरीके से रखें तो शरीर में किसी बीमारी का आना मुश्किल होता है। वहीं दूसरी ओर यदि हमारे भोजन में पोषक तत्वों की कमी अथवा अस्वस्थ भोजन की अधिकता हुई तो बीमारियों का आगमन हो जाता है।

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बीमारियों से निपटने के लिए हमें दवाइयों का सहारा लेना पड़ता है। यदि आप भी किसी भी प्रकार की पेट की समस्या से परेशान हैं तथा प्रकृतिक रुप से अपना इलाज करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है।

इस लेख में हम आपके लिए एक ऐसे प्रणायाम की जानकारी। देंगे जो आपके पेट संबंधी बीमारियों के लिए रामबाण सिद्ध होगा।

Agnisar Pranayama steps क्या है, Agnisar Pranayama Benefits in Hindi क्या हैं, यह कैसे किया जा सकता है तथा Agnisar kriya side effects क्या होते हैं, Sahaj Agnisar Mudra क्या होती है, और अग्निसार प्राणायाम के बारे में हम आपको पूरी जानकारी देंगे।

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इससे पहले कि हम अग्निसार प्रणायाम अभ्यास की विधि एवं Agnisar Pranayama Benefits in Hindi के बारे में जानें, आइए जानते हैं कि अग्निसार प्राणायाम क्या है?

अग्निसार प्राणायाम का अर्थ | What is Agnisar Pranayama in Hindi

अग्निसार संस्कृत के दो शब्दों अग्नि एवं सार से मिलकर बना है। अग्निकाअर्थ आग अर्थात गर्मी होता है तथा सार का अर्थ छोटा स्वरूप होता है।

इस प्रकार अग्निसार प्रणायाम का शाब्दिक अर्थ देखें तो वह प्रणायाम जिसके अभ्यास से शरीर में तीव्र ऊर्जा का संचार हो, अग्निसार प्रणायाम कहते हैं।

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अग्निसार प्राणायाम क्यों किया जाता है | Agnisar Pranayama in Hindi

बहुत बार ऐसा होता है कि हमारे शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है, कई बार हमारे पेट में जलन होने लगती है, या फिर हमारा दिमाग बर्न आउट हो जाता है। यानी कि हमें सोचने और समझने में काफी दिक्कत होने लगती है, तथा उसकी वजह हमारा पेट होता है, और हमारा सर दर्द भी काफी होने लगता है। तथा बहुत बार इनके कारण भी अपच तथा पेट से संबंधित कई बीमारियां होती है।

यह बीमारियां काफी लंबे समय से चली आ रही हो सकती है, इसके दो इलाज होते हैं एक तो इसका चिकित्सालय में उपचार किया जाए या फिर प्राणायाम के द्वारा इसे ठीक किया जाए।
अग्निसार प्राणायाम इसी प्रकार से पेट की तकलीफ को दूर करने के और शरीर में ऊर्जा का संचार करने के लिए किया जाने वाला प्राणायाम है।

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अग्निसार प्राणायाम श्वसन क्रिया के द्वारा किया जाने वाला एक प्राणायाम है जिसकी सहायता से पेट की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, और उन्हें तुलनात्मक रूप से खिंचाव पैदा होता है। जिसकी सहायता से पेट की मांसपेशियों सही ढंग से और सुचारू रूप से काम करने लगती है। जिससे अपच, दस्त या फिर पेट दर्द जैसी बीमारियां नहीं होती है।

यह प्राणायाम शरीर की ऊर्जा और भूख भी बढ़ाता है, जिससे अधिक काम करने की ऊर्जा पैदा होती है।

Agnisar Pranayama Benefits जानने से पहले अग्निसार प्राणायाम | Sahaj Agnisar Mudra की विधि जानते हैं।

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अग्निसार प्राणायाम करने की विधि | Agnisar Pranayama Steps in Hindi

  • Sahaj Agnisar Mudra के लिए सबसे पहले आपको पद्मासन की स्थिति में बैठ जाना है। यानी कि सामान्य बैठने की स्थिति जिसमें घुटने मोड़कर बैठा जाता है, उस स्थिति में आपको बैठ जाना है। और आपको अपनी आंखों को थोड़ा सा बंद करके लंबी सांस लेकर के मन को एकाग्र करना है।
  • आपको धीमे-धीमे करके लंबी सांस छोड़नी है, और लंबी सांस छोड़ने के बाद में आपको कुछ क्षणों तक अपनी सांस को रोक देना है, जिसे बहिर्मुख भी कहा जाता है।
  • अब आपको अपने दोनों हाथों से अपने दोनों घुटनों को पकड़ना है और अपने पेट को थोड़ा सिकोड़ना है। और इतना सिकुड़ना है कि आपकी नाभि आपके पेट के अंदर की गहराई को छूने लगे या फिर छूने की कोशिश करें।
  • अब श्वास वापस लेने से पहले आपको अपने शरीर को सामान्य स्थिति में लाना है, यानी कि आप को फिर से अपने हाथों को सामान्य स्थिति में रखना है, और अपने पेट पर पड़ रहे दबाव को कम करना है।
  • इसके बाद भी आपको धीरे-धीरे करके लंबी सांस लेनी है। इस पूरी प्रक्रिया को एक अग्निसार प्राणायाम कहा जाता है।
  • 10 बार अग्निसार प्राणायाम करने के चक्र को एक चक्र कहा जाता है।
  • जब भी आप अग्निसार प्राणायाम करने की कोशिश करें तब आपको कम से कम पांच चक्र से इसकी शुरुआत करनी चाहिए।
  • इसके बाद भी आप चक्रों के अंदर प्रक्रियाओं की संख्या बढ़ा सकते हैं।
  • ध्यान रखें कि गर्मियों में इसकी संख्या कम रखें, और सर्दियों में इसकी संख्या 10 से बढ़ाकर 25 तक भी कर सकते हैं।
  • हर चक्र के बाद में आपको 1 मिनट का ब्रेक लेना अनिवार्य है।

आइए जानते हैं कि Agnisar Pranayama Benefits क्या – क्या है?

अग्निसार प्राणायाम के फायदे Agnisar Pranayama Benefits in Hindi

  • अग्निसार प्राणायाम शरीर के अंदर की ऊर्जा को अत्यन्त तेजी से बढ़ता है।
  • इस प्राणायाम को करने के बाद शरीर ऊर्जावान महसूस करता है, और पाचन प्रक्रिया भी बहुत अच्छी हो जाती है।
  • अग्निसार प्राणायाम के अभ्यास से कब्ज अपच और भूख की कमी जैसी तकलीफों से निजात मिलती है।
  • इसके लगातार प्रयास करते रहने से शारीरिक तंत्र अच्छे से काम करता है।
  • यह आपके आंतरिक अंगों और कुछ मांसपेशियों को मजबूत करता है तथा फेफड़े को भी स्वस्थ करता है।
  • अग्निसार प्राणायाम के नियमित अभ्यास करने से मोटापा भी नियंत्रण में आने लगता है।
  • अग्निसार प्राणायाम करने से अस्थमा, तपेदिक, और अन्य गंभीर बीमारियां ठीक हो जाती है।
  • इसकी सहायता से पुरानी कफ की तकलीफें भी जल्दी ही नष्ट हो जाती है।

Agnisar Kriya Side Effects in Hindi

Agnisar Kriya के Side effects बहुत ही कम देखने को मिलते हैं, वह भी तब जब कोई व्यक्ति अपनी शारीरिक क्षमता से बहुत ज्यादा संख्या में अग्निसार क्रिया करने लगता है।

अग्निसार क्रिया बहुत ज्यादा मात्रा में करने से पूरा शरीर थकान महसूस करने लगता है, और शरीर में मांसपेशियां दुखने लगती है। पेट दर्द करने लगता है।

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आइए जानते हैं कि अग्निसार अभ्यास शुरू करने से पूर्व किन बातों को ध्यान में रखना अति आवश्यक है।

अग्निसार प्रणायाम अभ्यास से पूर्व सावधानियां | Agnisar Pranayama Precautions in Hindi
  • अग्निसार प्रणायाम सुबह फ्रेश होकर करना चाहिए। यानी कि आपको मल मूत्र त्याग करके और सभी काम पूरे करने के बाद आप को यह करना चाहिए।
  • सुबह-सुबह या फिर शाम में यह प्रक्रिया करना ठीक रहता है। क्योंकि उस समय गर्मी पूरे दिन की सबसे निचले स्तर पर होती है।
  • सर्दियों में इस प्रक्रिया को करना चाहे तो किसी भी समय कर सकते हैं। पर ध्यान रहे कि आप को रात्रि भोजन करने के 4 घंटे बाद और सुबह भोजन करने से 2 घंटे पहले इसे करना जरूरी है।
  • अग्निसार प्राणायाम करते समय आपको कभी भी भारी या तेलिय खाना या फिर मांसाहारी भोजन करने से बचना चाहिए। और धूम्रपान या फिर शराब का सेवन कभी भी नहीं करना चाहिए।
  • यदि आपके आंतों में कोई समस्या है या फिर पेट के अन्य भागों में कोई तकलीफ है, जैसे कि हर हर्निया या फिर उच्च रक्तचाप की समस्या है तो आपको यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
  • यदि आपका पेट का ऑपरेशन कुछ समय पहले ही हुआ है, तो आपको यह प्राणायाम करने से जरूर बचना चाहिए।
  • काफी योग शिक्षक Agnisar Kriya for acidity के लिए अपना सुझाव देते है अग्निसार क्रिया, acidity के लिए बहुत कारगर है।
  • यह प्राणायाम हमेशा अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए। क्षमता से अधिक चक्र का अभ्यास कभी भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह बाद में फायदे की जगह नुकसान देने लगता है।
  • पेट के साथ-साथ यदि आपके कान, आंख, नाक, इनमें भी कोई समस्या है या फिर दिल में दर्द होता हैं तो आपको अग्निसार प्राणायाम नहीं करना चाहिए।

कुछ लोग अग्निसार प्राणायाम और कपालभाति प्राणायाम को एक समझने की गलती कर बैठते हैं। आइए जानते हैं कि अग्निसार एवं कपालभाति प्रणायाम में क्या विषेश अंतर है।

Difference Between Agnisar and Kapalbhati in Hindi
  • अग्निसार प्राणायाम का उद्देश्य मुख्य रूप से पेट को स्वस्थ रखना है, और आँतों को भी स्वस्थ रखना है। लेकिन कपालभाती का मुख्य उद्देश्य श्वसन प्रक्रिया को सही करना तथा फेफड़ों की बीमारी को जड़ से दूर करना है।
  • कपालभाति करने की प्रक्रिया और अग्निसार प्राणायाम करने की प्रक्रिया पूर्ण रूप से अलग है।
  • कपालभाति करते समय आपको पद्मासन में बैठ कर के धीरे से सांस खींच कर के उसे एक झटके से इस तरह बाहर निकाला जाता है, कि पेट अंदर की ओर दबाव महसूस करें, तथा श्वास नाक के द्वारा एक झटके से बाहर निकले। इस प्रक्रिया में सांस को रोककर के नहीं रखा जाता। और इस प्रक्रिया को लगातार त्वरित रूप से किया जाता है यानी कि 10 सेकंड में कपालभाति की प्रक्रिया को 20 से 25 बार किया जाता है।
  • अग्निसार प्राणायाम इसके बिल्कुल ही उलट है। अग्निसार प्राणायाम में पद्मासन में बैठकर के श्वास को बाहर निकाला जाता है, और बाद में पेट को दबाव सहित अंतर धकेला जाता है।लगभग 10 सेकंड के लिए पेट अन्दर रखा जाता है इसके बाद भी सांस वापस से धीरे-धीरे ली जाती है और इस पूरे चक्र को कई बार दोहराया जाता है।
  • कपालभाती से पेट के साथ-साथ फेफड़ों में भी ऊर्जा का संचार होता है, और विभिन्न प्रकार की यकृत से संबंधित बीमारियां कपालभाती से दूर हो जाती है।
  • कपालभाति की प्रक्रिया से शरीर से, शरीर में बढ़ी हुई कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को कम करने के लिए या ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाने के लिए यह प्रक्रिया करी जाती है
  • यह सांस लेने और छोड़ने की बहुत ही त्वरित प्रक्रिया है, जो कि अग्निसार प्राणायाम की तुलना में बिल्कुल ही अलग है, जिसमें सांस लेना और छोड़ना तुलनात्मक रूप से बहुत ही दीर्घकालिक प्रक्रिया है।

आखिरी शब्द: आज के लेख में हमने जाना कि Agnisar Pranayama in Hindi क्या होता है Agnisar Pranayama benefits in Hindi क्या हैं, और Agnisar Pranayama steps क्या है, तथा Agnisar Pranayama side effects क्या हो सकते हैं, और इसकी सावधानियां क्या-क्या हैं।

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सबका मंगल हो

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